⚡ 10-शब्द त्वरित गाइड: दो शब्दों के मेल से बना संक्षिप्त सार्थक शब्द समास कहलाता है।
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हिंदी व्याकरण में ‘समास’ (Samas) एक ऐसा महत्वपूर्ण और अंकदायी अध्याय है, जिसका सामना कक्षा 6 से लेकर 12वीं तक की बोर्ड परीक्षाओं (UP Board, CBSE, MP Board, Bihar Board) और राज्य व केंद्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UP Police Constable, UPSSSC PET/लेखपाल, CTET, UPTET, BPSC, RO/ARO व SSC GD) में अनिवार्य रूप से होता है।
परीक्षाओं में अक्सर छात्र समास की परिभाषा तो याद कर लेते हैं, परंतु जब ‘पीतांबर’, ‘दशानन’, ‘त्रिनेत्र’ या ‘नीलकमल’ जैसे शब्द आते हैं, तो वे कर्मधारय, द्विगु और बहुव्रीहि के बीच अंतर न कर पाने के कारण गलत विकल्प चुन बैठते हैं।
शिक्षातक (sikshatak.com) के इस संपूर्ण पिलर गाइड में हम समास का शाब्दिक अर्थ, पूर्वपद व उत्तरपद का गणित, समास और संधि में मूल अंतर, समास के 6 प्रमुख भेद, विग्रह करने के जादुई नियम, 50+ सर्वाधिक पूछे जाने वाले उदाहरण और विगत 15 वर्षों के 10 हल प्रश्न प्रस्तुत कर रहे हैं।
📌 त्वरित अवलोकन तालिका: समास के 6 भेद और पद प्रधानता का सूत्र
समास को पहचानने का सबसे वैज्ञानिक तरीका ‘पद की प्रधानता’ (Dominance of Words) है:
| समास का नाम | पद प्रधानता का नियम (Formula) | मुख्य पहचान / ट्रिक | प्रमुख उदाहरण (सामासिक पद ➔ विग्रह) |
|---|---|---|---|
| 1. अव्ययीभाव समास | पूर्वपद (पहला पद) प्रधान व अव्यय | उपसर्ग (यथा, प्रति, भर, आ, बे) या शब्दों की पुनरुक्ति | प्रतिदिन ➔ प्रत्येक दिन; रातोंरात ➔ रात ही रात में |
| 2. तत्पुरुष समास | उत्तरपद (दूसरा पद) प्रधान | दोनों पदों के बीच कारक चिन्हों (का, की, के, से, में, पर) का लोप | राजपुत्र ➔ राजा का पुत्र; रोगमुक्त ➔ रोग से मुक्त |
| 3. कर्मधारय समास | उत्तरपद प्रधान (विशेषण-विशेष्य संबंध) | पहला पद विशेषण व दूसरा विशेष्य, विग्रह में ‘है जो’ या ‘के समान’ | नीलकमल ➔ नीला है जो कमल; चरणकमल ➔ कमल के समान चरण |
| 4. द्विगु समास | पूर्वपद संख्यावाची (Numeric) | पहला पद गिनती/संख्या बताए और समूह (समाहार) का बोध हो | चौराहा ➔ चार राहों का समाहार; त्रिफला ➔ तीन फलों का समूह |
| 5. द्वंद्व समास | दोनों पद प्रधान (Both Equal) | दोनों पदों के बीच योजक चिन्ह (-) और विग्रह में ‘और’, ‘या’, ‘अथवा’ | माता-पिता ➔ माता और पिता; दिन-रात ➔ दिन और रात |
| 6. बहुव्रीहि समास | कोई पद प्रधान नहीं (Third Meaning) | दोनों पद मिलकर किसी तीसरे विशेष व्यक्ति/देवता की ओर संकेत करें | दशानन ➔ दस हैं आनन जिसके (अर्थात रावण); लंबोदर ➔ गणेश |
📖 1. समास क्या है? अर्थ एवं मूल अवधारणा (Definition of Samas)
समास का शाब्दिक अर्थ:
‘समास’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों के योग से बना है — ‘सम्’ + ‘आस’।
- सम् का अर्थ होता है — ‘भली-प्रकार’ या ‘संक्षिप्त रूप में’।
- आस का अर्थ होता है — ‘बैठना’ या ‘पास रखना’।
अतः समास का शाब्दिक अर्थ है — ‘संक्षेपीकरण’ (Briefing / Compacting)। जब दो या दो से अधिक शब्द अपने बीच के कारक चिन्हों या संयोजकों को छोड़कर आपस में मिलकर एक नया और सार्थक संक्षिप्त शब्द बनाते हैं, तो उस प्रक्रिया को समास कहते हैं।
उदाहरण से समझें:
- ‘राजा का पुत्र’ (तीन शब्द) ➔ संक्षिप्त होकर बना ‘राजपुत्र’।
- ‘रसोई के लिए घर’ (चार शब्द) ➔ संक्षिप्त होकर बना ‘रसोईघर’।
- ‘हाथ के लिए कड़ी’ ➔ ‘हथकड़ी’।
सामासिक शब्द (समस्त पद) और उसके दो अंग:
समास के नियमों से बने नए शब्द को ‘समस्त पद’ या ‘सामासिक पद’ कहा जाता है। प्रत्येक सामासिक पद में सामान्यतः दो पद (शब्द) होते हैं:
- पूर्वपद (Purvapad): पहले आने वाले शब्द को पूर्वपद कहते हैं।
- उत्तरपद (Uttarapad): बाद में आने वाले शब्द को उत्तरपद कहते हैं।
उदाहरण: गंगाजल में ‘गंगा’ पूर्वपद है और ‘जल’ उत्तरपद है।
⚖️ 2. समास और संधि में मूल अंतर (Difference Between Sandhi and Samas)
प्रायः विद्यार्थी संधि और समास को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि दोनों में मूलभूत व्याकरणिक अंतर होता है:
| तुलनात्मक बिंदु | संधि (Sandhi) | समास (Samas) |
|---|---|---|
| मूल तत्व | दो वर्णों (ध्वनियों/अक्षरों) का मेल होता है। | दो या दो से अधिक शब्दों (पदों) का मेल होता है। |
| परिवर्तन (विकार) | वर्णों के मेल से ध्वनि में विकार (परिवर्तन) अनिवार्य है (जैसे: विद् + आलय = विद्यालय)। | शब्दों के बीच से कारक चिन्हों या अव्ययों का लोप होता है, वर्ण नहीं बदलते। |
| तोड़ने की क्रिया | संधि को अलग करने को ‘संधि-विच्छेद’ कहते हैं। | सामासिक पद को अलग करने को ‘समास-विग्रह’ कहते हैं। |
| प्रकृति | यह ध्वन्यात्मक (Phonetic) प्रक्रिया है। | यह शाब्दिक व अर्थपरक (Semantic) प्रक्रिया है। |
✂️ 3. समास विग्रह क्या होता है? (Samas Vigrah Meaning)
समस्त पद (सामासिक पद) के सभी पदों को अलग-अलग करके उनके बीच के लुप्त कारक चिन्हों या संबंधों को स्पष्ट रूप से दर्शाना ‘समास विग्रह’ कहलाता है।
- समस्त पद: देशभक्ति ➔ समास विग्रह: देश के लिए भक्ति
- समस्त पद: यथाशक्ति ➔ समास विग्रह: शक्ति के अनुसार
- समस्त पद: पाप-पुण्य ➔ समास विग्रह: पाप और पुण्य
🔍 4. समास के 6 प्रमुख भेद: विस्तृत नियम, पहचान ट्रिक व उदाहरण
हिंदी व्याकरण में समास के मुख्य रूप से 6 भेद स्वीकार किए गए हैं:
(1) अव्ययीभाव समास (Avyayibhav Samas)
परिभाषा: जिस समास का पहला पद (पूर्वपद) प्रधान हो और वह कोई अव्यय या उपसर्ग हो, तथा संपूर्ण सामासिक पद भी अव्यय की भांति कार्य करे, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।
⚡ पहचान की 3 अचूक ट्रिक्स:
- उपसर्ग ट्रिक: शब्द के आरंभ में यथा, प्रति, आ, भर, बे, अनु, नि, हर, बा जुड़े होते हैं।
- पुनरुक्ति ट्रिक: जब एक ही शब्द बिना किसी कारक चिन्ह के दो बार लगातार दोहराया जाए (जैसे: रातोंरात, दिनोंदिन, हाथोंहाथ, घर-घर, बीचोंबीच)।
- लिंग/वचन अपरिवर्तनीय: यह शब्द कभी भी बहुवचन में नहीं बदलता (जैसे ‘प्रतिदिनों’ नहीं होता)।
प्रमुख उदाहरण:
- यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार
- प्रतिदिन = प्रत्येक दिन (दिन-दिन)
- आजन्म = जन्म से लेकर
- भरपेट = पेट भरकर (विस्तृत अध्ययन हेतु देखें: भरपेट में कौन सा समास है)
- बेकसूर = बिना कसूर के
- अनुरूप = रूप के अनुसार
- रातोंरात = रात ही रात में
- हाथोंहाथ = हाथ ही हाथ में
- प्रत्यक्ष = आँखों के सामने (प्रति + अक्ष)
- निःसंदेह = बिना संदेह के
(2) तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas)
परिभाषा: जिस समास में दूसरा पद (उत्तरपद) प्रधान होता है तथा दोनों पदों के बीच में आने वाले कारक चिन्हों (विभक्तियों) का लोप हो जाता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।
कारकों के आधार पर तत्पुरुष समास के 6 प्रमुख उपभेद होते हैं (कर्ता और संबोधन कारक को छोड़कर):
| तत्पुरुष का भेद | लुप्त होने वाला कारक चिन्ह | महत्वपूर्ण उदाहरण (समस्त पद ➔ विग्रह) |
|---|---|---|
| 1. कर्म तत्पुरुष (द्वितीया) | ‘को’ का लोप | गगनचुंबी = गगन को चूमने वाला; ग्रामगत = ग्राम को गया हुआ |
| 2. करण तत्पुरुष (तृतीया) | ‘से’ / ‘के द्वारा’ का लोप | हस्तलिखित = हाथ से लिखित; तुलसीकृत = तुलसी द्वारा रचित |
| 3. संप्रदान तत्पुरुष (चतुर्थी) | ‘के लिए’ का लोप | रसोईघर = रसोई के लिए घर; देशभक्ति = देश के लिए भक्ति; यज्ञशाला = यज्ञ के लिए शाला |
| 4. अपादान तत्पुरुष (पंचमी) | ‘से’ (अलग होने का भाव) | ऋणमुक्त = ऋण से मुक्त; धनहीन = धन से हीन; पथभ्रष्ट = पथ से भ्रष्ट |
| 5. संबंध तत्पुरुष (षष्ठी) | ‘का’, ‘की’, ‘के’ का लोप | राजपुत्र = राजा का पुत्र; सेनापति = सेना का पति (मालिक); गंगाजल = गंगा का जल |
| 6. अधिकरण तत्पुरुष (सप्तमी) | ‘में’, ‘पर’ का लोप | पुरुषोत्तम = पुरुषों में उत्तम; आपबीती = आप पर बीती; घुड़सवार = घोड़े पर सवार |
विशेष उपभेद — नञ् तत्पुरुष (Negative Tatpurush): जिस समास के पूर्वपद में निषेध या अभाव का बोध कराने वाले नकारात्मक उपसर्ग (अ, अन्, ना, गैर) लगे हों, उसे नञ् तत्पुरुष कहते हैं।उदाहरण: अधर्म (न धर्म), अन्याय (न न्याय), अनदेखा (न देखा हुआ), नापसंद (न पसंद)।
(3) कर्मधारय समास (Karmadharaya Samas)
परिभाषा: जिस समास का उत्तरपद प्रधान हो और पूर्वपद तथा उत्तरपद के बीच विशेषण-विशेष्य (Adjective-Noun) अथवा उपमान-उपमेय (Comparison) का संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।
⚡ पहचान की ट्रिक:
जब आप सामासिक पद का विग्रह करेंगे, तो दोनों पदों के बीच में ‘है जो’ अथवा ‘के समान’ (या ‘रूपी’) शब्द आते हैं।
प्रमुख उदाहरण:
- नीलकमल = नीला है जो कमल (विशेषण-विशेष्य)
- महात्मा = महान है जो आत्मा
- पीतांबर = पीला है जो अंबर (वस्त्र)
- चरणकमल = कमल के समान चरण (उपमान-उपमेय)
- चंद्रमुख = चंद्रमा के समान मुख
- विद्याधन = विद्या रूपी धन
- मृगनयनी = मृग (हिरण) के समान नयन वाली
- क्रोधग्नि = क्रोध रूपी अग्नि
- कालीमिर्च = काली है जो मिर्च
- श्वेतांबर = श्वेत (सफेद) है जो अंबर
(4) द्विगु समास (Dvigu Samas)
परिभाषा: जिस समास का पहला पद (पूर्वपद) संख्यावाचक विशेषण (गिनती बताने वाला) हो और समस्त पद किसी समूह (Group) या समाहार का ज्ञान कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं।
⚡ पहचान की ट्रिक:
शब्द के पहले अक्षर संख्या (1, 2, 3, 4, 5, 7, 8, 9, 10 आदि) को दर्शाते हैं और विग्रह के अंत में अनिवार्य रूप से ‘का समूह’ या ‘का समाहार’ आता है।
प्रमुख उदाहरण:
- चौराहा = चार राहों का समाहार (विस्तृत अध्ययन हेतु देखें: चौराहा में कौन सा समास है)
- त्रिफला = तीन फलों का समूह
- पंचवटी = पांच वट (बरगद) वृक्षों का समाहार
- सप्ताह = सात दिनों (अहों) का समूह
- नवरत्न = नौ रत्नों का समाहार
- तिरंगा = तीन रंगों का समाहार
- शताब्दी = सौ वर्षों (अब्दों) का समूह
- अठन्नी = आठ आनों का समाहार
- त्रिभुवन = तीन भुवनों का समूह
- दुपट्टा = दो पट्टों का समाहार
(5) द्वंद्व समास (Dvandva Samas)
परिभाषा: जिस समास में दोनों पद प्रधान (समान महत्व वाले) होते हैं और दोनों पदों को मिलाते समय बीच के योजक अव्यय लुप्त हो जाते हैं, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।
⚡ पहचान की ट्रिक:
- दोनों शब्दों के बीच प्रायः योजक चिन्ह (Hyphen -) लगा होता है।
- दोनों शब्द एक-दूसरे के विलोम (Opposite), पूरक या मिलते-जुलते जोड़े होते हैं।
- विग्रह करने पर बीच में ‘और’, ‘तथा’, ‘या’, ‘अथवा’ आता है।
द्वंद्व समास के 3 उपभेद:
- इतरेतर द्वंद्व: जहाँ ‘और’ का लोप हो (जैसे: माता-पिता = माता और पिता, दाल-रोटी = दाल और रोटी)।
- वैकल्पिक द्वंद्व: जहाँ विलोम शब्द हों और ‘या/अथवा’ का लोप हो (जैसे: पाप-पुण्य = पाप या पुण्य, भला-बुरा = भला या बुरा)।
- समाहार द्वंद्व: जहाँ दोनों पद अपने अर्थ के अलावा उस जाति के अन्य अर्थों का भी बोध कराएं (जैसे: हाथ-पांव = हाथ, पांव आदि अंग; कपड़ा-लत्ता = कपड़ा, लत्ता आदि)।
प्रमुख उदाहरण:
- माता-पिता = माता और पिता
- सुख-दुख = सुख और दुख
- दिन-रात = दिन और रात
- हानि-लाभ = हानि या लाभ
- धर्म-अधर्म = धर्म या अधर्म
- छोटा-बड़ा = छोटा या बड़ा
- अन्न-जल = अन्न और जल
- राधा-कृष्ण = राधा और कृष्ण
- दूध-दही = दूध और दही
- नर-नारी = नर और नारी
(6) बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas)
परिभाषा: जिस सामासिक पद में न तो पूर्वपद प्रधान हो और न ही उत्तरपद प्रधान हो, बल्कि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे विशेष पद (संज्ञा/अर्थ) की ओर संकेत करते हैं, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।
⚡ पहचान की ट्रिक:
सामासिक पद का सामान्य अर्थ छोड़कर उसका एक पौराणिक, ऐतिहासिक या रूढ़ अर्थ (तीसरा व्यक्ति या देवता) निकलता है। विग्रह करने पर ‘जिसका’, ‘जिसकी’, ‘जिसके’, ‘वाला’ आता है।
प्रमुख उदाहरण:
- दशानन = दस हैं आनन (मुख) जिसके ➔ अर्थात रावण
- लंबोदर = लंबा है उदर (पेट) जिसका ➔ अर्थात गणेश जी
- चक्रपाणि = चक्र है पाणि (हाथ) में जिसके ➔ अर्थात भगवान विष्णु
- नीलकंठ = नीला है कंठ जिसका ➔ अर्थात भगवान शिव
- पीतांबर = पीत (पीले) हैं अंबर (वस्त्र) जिसके ➔ अर्थात भगवान श्रीकृष्ण
- चतुर्भुज = चार हैं भुजाएं जिनकी ➔ अर्थात भगवान विष्णु
- गजानन = गज के समान मुख है जिसका ➔ अर्थात गणेश जी
- त्रिनेत्र = तीन हैं नेत्र जिसके ➔ अर्थात भगवान शिव
- वीणापाणि = वीणा है हाथ में जिसके ➔ अर्थात माता सरस्वती
- पंकज = पंक (कीचड़) में जो जन्म लेता है ➔ अर्थात कमल
⚠️ 5. छात्रों का सबसे बड़ा भ्रम: कर्मधारय, द्विगु और बहुव्रीहि में अंतर कैसे करें?
प्रतियोगी परीक्षाओं में सबसे अधिक विवाद और गलतियां इन्हीं तीन समासों के बीच होती हैं। आइए इसे एक स्पष्ट नियम से समझें:
1. कर्मधारय बनाम बहुव्रीहि (उदाहरण: ‘पीतांबर’):
- यदि विग्रह है — “पीला है जो अंबर (वस्त्र)” ➔ तो यह कर्मधारय समास है (क्योंकि यहाँ पीले रंग की विशेषता बताई जा रही है)।
- यदि विग्रह है — “पीले हैं वस्त्र जिसके अर्थात श्रीकृष्ण” ➔ तो यह बहुव्रीहि समास है (क्योंकि यहाँ तीसरे व्यक्ति श्रीकृष्ण की प्रधानता है)।
- परीक्षा में क्या चुनें? यदि किसी प्रश्न में ‘पीतांबर’ पूछा जाए और विग्रह न दिया हो, तथा विकल्प में कर्मधारय और बहुव्रीहि दोनों मौजूद हों, तो हमेशा बहुव्रीहि समास को प्राथमिकता दी जाती है।
2. द्विगु बनाम बहुव्रीहि (उदाहरण: ‘दशानन’ / ‘त्रिनेत्र’):
- दशानन: यद्यपि पहला पद ‘दस’ (संख्या) है, परंतु यह 10 मुखों का सामान्य समूह नहीं है, बल्कि ‘रावण’ का वाचक है। अतः यह बहुव्रीहि समास होगा।
- त्रिनेत्र: ‘तीन नेत्रों का समूह’ (द्विगु) न होकर ‘भगवान शिव’ का बोध कराता है, अतः बहुव्रीहि समास है।
- पंचवटी: पांच वटों का समाहार (द्विगु); परंतु यदि विशेष रामायण कालीन दंडकारण्य स्थल का रूढ़ अर्थ माना जाए तो बहुव्रीहि भी बनता है, किंतु सामान्यतः इसे द्विगु समास माना जाता है।
📊 6. परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले 50+ महत्वपूर्ण सामासिक शब्द व विग्रह (Master Table)
| क्र. सं. | सामासिक पद (समस्त पद) | सही समास विग्रह | समास का नाम |
|---|---|---|---|
| 1 | यथाक्रम | क्रम के अनुसार | अव्ययीभाव |
| 2 | प्रतिवर्ष | प्रत्येक वर्ष | अव्ययीभाव |
| 3 | बेखटके | बिना खटके के | अव्ययीभाव |
| 4 | आमरण | मरण तक | अव्ययीभाव |
| 5 | दिनोंदिन | दिन ही दिन में | अव्ययीभाव |
| 6 | घर-घर | प्रत्येक घर | अव्ययीभाव |
| 7 | यथामति | मति (बुद्धि) के अनुसार | अव्ययीभाव |
| 8 | बाकायदा | कायदे के अनुसार | अव्ययीभाव |
| 9 | स्वर्गप्राप्त | स्वर्ग को प्राप्त | कर्म तत्पुरुष |
| 10 | माखनचोर | माखन को चुराने वाला | कर्म तत्पुरुष |
| 11 | भयाकुल | भय से आकुल | करण तत्पुरुष |
| 12 | मदांध | मद से अंधा | करण तत्पुरुष |
| 13 | रेखांकित | रेखा से अंकित | करण तत्पुरुष |
| 14 | गौशाला | गायों के लिए शाला | संप्रदान तत्पुरुष |
| 15 | विधानसभा | विधान के लिए सभा | संप्रदान तत्पुरुष |
| 16 | राहखर्च | राह के लिए खर्च | संप्रदान तत्पुरुष |
| 17 | जन्मांध | जन्म से अंधा | अपादान तत्पुरुष |
| 18 | नेत्रहीन | नेत्र से हीन | अपादान तत्पुरुष |
| 19 | पदच्युत | पद से च्युत (हटाया हुआ) | अपादान तत्पुरुष |
| 20 | राजदरबार | राजा का दरबार | संबंध तत्पुरुष |
| 21 | विद्याभ्यास | विद्या का अभ्यास | संबंध तत्पुरुष |
| 22 | पराधीन | पर (दूसरों) के अधीन | संबंध तत्पुरुष |
| 23 | आनंदमग्न | आनंद में मग्न | अधिकरण तत्पुरुष |
| 24 | कविराज | कवियों में राजा | अधिकरण तत्पुरुष |
| 25 | ध्यानमग्न | ध्यान में मग्न | अधिकरण तत्पुरुष |
| 26 | महाकवि | महान है जो कवि | कर्मधारय |
| 27 | मृगनयन | मृग के समान नयन | कर्मधारय |
| 28 | लौहपुरुष | लोहे के समान सुदृढ़ पुरुष | कर्मधारय |
| 29 | प्राणप्रिय | प्राणों के समान प्रिय | कर्मधारय |
| 30 | नीलगगन | नीला है जो गगन | कर्मधारय |
| 31 | दुअन्नी | दो आनों का समाहार | द्विगु |
| 32 | त्रिलोक | तीन लोकों का समाहार | द्विगु |
| 33 | पंचामृत | पांच अमृतरूपी द्रव्यों का समाहार | द्विगु |
| 34 | सप्तर्षि | सात ऋषियों का समूह | द्विगु |
| 35 | अठकोना | आठ कोनों का समाहार | द्विगु |
| 36 | पाप-पुण्य | पाप और पुण्य | द्वंद्व |
| 37 | सीता-राम | सीता और राम | द्वंद्व |
| 38 | ऊंच-नीच | ऊंच या नीच | द्वंद्व |
| 39 | रात-दिन | रात और दिन | द्वंद्व |
| 40 | घी-शक्कर | घी और शक्कर | द्वंद्व |
| 41 | दाल-भात | दाल और भात | द्वंद्व |
| 42 | भला-बुरा | भला या बुरा | द्वंद्व |
| 43 | गिरिधर | गिरि (पर्वत) को धारण करने वाले (श्रीकृष्ण) | बहुव्रीहि |
| 44 | मुरलीधर | मुरली धारण करने वाले (श्रीकृष्ण) | बहुव्रीहि |
| 45 | चंद्रशेखर | चंद्र है शिखर पर जिसके (भगवान शिव) | बहुव्रीहि |
| 46 | जलज | जल में जन्म लेता है जो (कमल) | बहुव्रीहि |
| 47 | निशाचर | निशा (रात) में विचरण करने वाला (राक्षस) | बहुव्रीहि |
| 48 | श्वेतपद्मा | श्वेत पद्म (कमल) पर बैठती हैं जो (सरस्वती) | बहुव्रीहि |
| 49 | त्रिलोचन | तीन लोचन हैं जिसके (भगवान शिव) | बहुव्रीहि |
| 50 | मृगेंद्र | मृगों (पशुओं) का इंद्र (सिंह/शेर) | बहुव्रीहि |
🏆 7. विगत वर्षों के 10 हल बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs with Explanations)
विभिन्न बोर्ड परीक्षाओं एवं प्रतियोगी परीक्षाओं (UP Police, UPSSSC, CTET, REET) में पूछे गए शीर्ष 10 प्रश्न:
प्रश्न 1: ‘यथाशक्ति’ शब्द में कौन सा समास है? (UP Police Constable 2024)
(A) तत्पुरुष
(B) बहुव्रीहि
(C) अव्ययीभाव
(D) कर्मधारय
उत्तर: (C) अव्ययीभाव
व्याख्या: ‘यथा’ एक अव्यय/उपसर्ग है। इसका विग्रह ‘शक्ति के अनुसार’ होता है।
प्रश्न 2: किस समास में दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं? (CTET)
(A) द्वंद्व समास
(B) बहुव्रीहि समास
(C) कर्मधारय समास
(D) तत्पुरुष समास
उत्तर: (B) बहुव्रीहि समास
व्याख्या: बहुव्रीहि में कोई पद प्रधान नहीं होता, दोनों पद मिलकर अन्य तीसरे पद का बोध कराते हैं।
प्रश्न 3: ‘चौराहा’ में कौन सा समास है? (UP Board Class 10)
(A) द्वंद्व
(B) तत्पुरुष
(C) द्विगु
(D) कर्मधारय
उत्तर: (C) द्विगु
व्याख्या: पहला पद ‘चौ’ (चार) संख्यावाची है और चार राहों के समाहार का बोध कराता है।
प्रश्न 4: ‘रोगमुक्त’ का सही समास विग्रह क्या होगा? (UPSSSC VDO)
(A) रोग और मुक्त
(B) रोग से मुक्त (अपादान तत्पुरुष)
(C) रोग का मुक्त
(D) रोग में मुक्त
उत्तर: (B) रोग से मुक्त
व्याख्या: यहाँ रोग से अलग होने (मुक्ति) का भाव है, अतः अपादान तत्पुरुष समास है।
प्रश्न 5: ‘माता-पिता’ में कौन सा समास है? (BSEB Class 12)
(A) अव्ययीभाव
(B) द्वंद्व
(C) द्विगु
(D) तत्पुरुष
उत्तर: (B) द्वंद्व
व्याख्या: दोनों पद समान प्रधान हैं और विग्रह ‘माता और पिता’ होता है।
प्रश्न 6: ‘नीलकमल’ में कौन सा समास है? (UP TGT Hindi)
(A) कर्मधारय
(B) बहुव्रीहि
(C) द्विगु
(D) तत्पुरुष
उत्तर: (A) कर्मधारय
व्याख्या: पहला पद ‘नीला’ विशेषण है और दूसरा पद ‘कमल’ विशेष्य है (नीला है जो कमल)।
प्रश्न 7: ‘लंबोदर’ शब्द में कौन सा समास माना जाएगा? (UPPSC RO/ARO)
(A) कर्मधारय
(B) बहुव्रीहि
(C) द्विगु
(D) तत्पुरुष
उत्तर: (B) बहुव्रीहि
व्याख्या: लंबा है उदर जिसका अर्थात भगवान गणेश। रूढ़ अर्थ के कारण बहुव्रीहि माना जाएगा।
प्रश्न 8: ‘रातोंरात’ में कौन सा समास है? (REET Level 2)
(A) द्वंद्व
(B) अव्ययीभाव
(C) तत्पुरुष
(D) कर्मधारय
उत्तर: (B) अव्ययीभाव
व्याख्या: जब एक ही शब्द की बिना कारक चिन्ह के पुनरुक्ति हो (रात ही रात में), तो अव्ययीभाव होता है।
प्रश्न 9: ‘राजपुत्र’ में किस कारक चिन्ह का लोप हुआ है? (MP Board Class 10)
(A) संप्रदान (के लिए)
(B) संबंध (का)
(C) करण (से)
(D) अधिकरण (में)
उत्तर: (B) संबंध (का)
व्याख्या: राजा का पुत्र = राजपुत्र। षष्ठी संबंध तत्पुरुष समास है।
प्रश्न 10: ‘अधर्म’ शब्द में तत्पुरुष का कौन सा विशेष उपभेद है? (UP Police SI)
(A) प्रादि तत्पुरुष
(B) नञ् तत्पुरुष
(C) उपपद तत्पुरुष
(D) अलुक तत्पुरुष
उत्तर: (B) नञ् तत्पुरुष
व्याख्या: जहाँ पूर्वपद में ‘अ’ या ‘अन्’ निषेधवाची उपसर्ग लगे हों (न धर्म), वहाँ नञ् तत्पुरुष होता है।
❓ 8. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: समास के कुल कितने भेद होते हैं?
उत्तर: हिंदी व्याकरण में समास के मुख्य रूप से 6 भेद होते हैं: (1) अव्ययीभाव, (2) तत्पुरुष, (3) कर्मधारय, (4) द्विगु, (5) द्वंद्व, और (6) बहुव्रीहि।
Q2: ‘दशानन’ में द्विगु समास है या बहुव्रीहि?
उत्तर: ‘दशानन’ में बहुव्रीहि समास मान्य है। यद्यपि ‘दस’ संख्या है, परंतु यह 10 मुखों का सामान्य समूह न होकर रावण के लिए रूढ़ हो चुका है। यदि परीक्षा में बहुव्रीहि विकल्प न हो, केवल तभी द्विगु चुना जाता है।
Q3: पद की प्रधानता के आधार पर समास कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: पद की प्रधानता के आधार पर समास 4 प्रकार के होते हैं:
- पूर्वपद प्रधान: अव्ययीभाव
- उत्तरपद प्रधान: तत्पुरुष (कर्मधारय व द्विगु इसी के अंतर्गत आते हैं)
- दोनों पद प्रधान: द्वंद्व
- दोनों पद अप्रधान (अन्य पद प्रधान): बहुव्रीहि
Q4: अव्ययीभाव समास को पहचानने की सबसे आसान ट्रिक क्या है?
उत्तर: शब्द के शुरू में उपसर्ग देखें (यथा, प्रति, भर, आ, बे, अनु) जैसे—यथाशक्ति, भरपेट, प्रतिदिन। इसके अलावा शब्दों की पुनरुक्ति वाले शब्द (हाथोंहाथ, रातोंरात) हमेशा अव्ययीभाव होते हैं।
Q5: बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षा में समास विग्रह कैसे लिखें?
उत्तर: समस्त पद को अलग करते समय केवल संधि की तरह टुकड़े न करें, बल्कि उसके बीच के लुप्त संबंध को स्पष्ट लिखें। जैसे ‘राजभवन’ का विग्रह ‘राजा का भवन’ लिखें, न कि ‘राज + भवन’।
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📌 10. छात्र परामर्श एवं संपादकीय डिस्क्लेमर (Student Guidance & Editorial Note)
यह विस्तृत व्याकरणिक मार्गदर्शिका कामताप्रसाद गुरु, डॉ. वासुदेवनंदन प्रसाद, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) तथा माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश (UPMSP) के अधिकृत हिंदी व्याकरण पाठ्यक्रमों के आधार पर संकलित की गई है।
कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों और प्रतियोगी अभ्यर्थियों को यह सलाह दी जाती है कि वे समास को केवल रटने के बजाय ‘पद प्रधानता’ और ‘अर्थ के विस्तार’ को समझकर अभ्यास करें। परीक्षा में जब भी कर्मधारय और बहुव्रीहि में संशय हो, तो शब्द के संदर्भ और विग्रह पर विशेष ध्यान दें। शिक्षातक (sikshatak.com) सभी छात्रों के उज्ज्वल भविष्य और परीक्षा में शत-प्रतिशत सफलता के लिए सदैव समर्पित है।

