UP Board Class 12 Hindi Model Paper 2026: कक्षा 12 सामान्य हिंदी मॉडल पेपर संपूर्ण हल सहित (UPMSP Exam Pattern)

UP Board Class 12 Hindi Model Paper 2026: कक्षा 12 सामान्य हिंदी मॉडल पेपर संपूर्ण हल सहित (UPMSP Exam Pattern)

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) द्वारा आयोजित की जाने वाली 12वीं बोर्ड परीक्षा में सामान्य हिंदी एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रतिशत-वर्धक विषय है। विज्ञान, कला और वाणिज्य—तीनों स्ट्रीम के विद्यार्थियों के लिए हिंदी अनिवार्य विषय है। इस विस्तृत लेख में UP Board Class 12 Hindi Model Paper 2026 का संपूर्ण प्रश्न-पत्र, उसके सटीक उत्तर, परीक्षा पैटर्न और उत्तर लेखन की टॉपर रणनीतियों का समावेश किया गया है।


Table of Contents

2. परीक्षा संरचना एवं अंक विभाजन (Exam Pattern 2026)

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की कक्षा 12 सामान्य हिंदी परीक्षा कुल 100 अंकों की होती है, जिसके लिए 3 घंटे 15 मिनट का समय निर्धारित किया गया है (शुरुआती 15 मिनट प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए)। यह प्रश्न-पत्र दो मुख्य भागों में विभाजित रहता है:

  • खण्ड ‘क’ (50 अंक): पाठ्यपुस्तक आधारित साहित्य, जीवन परिचय, गद्यांश/पद्यांश प्रश्नोत्तर, कहानी और खंडकाव्य।
  • खण्ड ‘ख’ (50 अंक): संस्कृत गद्य/पद्य अनुवाद, अपठित गद्यांश, व्याकरण, काव्य सौंदर्य के तत्व, पत्र लेखन एवं निबंध।

हिंदी एक ऐसा विषय है जहाँ थोड़ा सा योजनाबद्ध अभ्यास आपको 95+ अंक दिला सकता है, जो आपके संपूर्ण ओवरऑल प्रतिशत को काफी बढ़ा देता है।


3. खण्ड ‘क’ (पूर्णांक: 50 अंक) – संपूर्ण प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

प्रश्न 1: हिंदी गद्य साहित्य का इतिहास (बहुविकल्पीय प्रश्न – 5 अंक)

(i) ‘सरस्वती’ पत्रिका के प्रसिद्ध संपादक कौन थे?
(क) भारतेंदु हरिश्चंद्र
(ख) आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ग) रामचंद्र शुक्ल
(घ) श्यामसुंदर दास
उत्तर: (ख) आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

(ii) ‘राष्ट्र का स्वरूप’ निबंध के लेखक कौन हैं?
(क) डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल
(ख) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(ग) प्रो. जी. सुंदर रेड्डी
(घ) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
उत्तर: (क) डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल

(iii) ‘चिंतामणि’ किस लेखक का निबंध संग्रह है?
(क) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
(ख) श्यामसुंदर दास
(ग) डॉ. संपूर्णानंद
(घ) अज्ञेय
उत्तर: (क) आचार्य रामचंद्र शुक्ल

(iv) ‘आवारा मसीहा’ नामक जीवनी रचना के लेखक कौन हैं?
(क) अमृतराय
(ख) विष्णु प्रभाकर
(ग) डॉ. रामविलास शर्मा
(घ) राहुल सांकृत्यायन
उत्तर: (ख) विष्णु प्रभाकर

(v) हिंदी का प्रथम उपन्यास माना जाता है—
(क) गोदान
(ख) परीक्षा गुरु
(ग) तितली
(घ) गबन
उत्तर: (ख) परीक्षा गुरु (लाला श्रीनिवास दास)


प्रश्न 2: हिंदी काव्य साहित्य का विकास (बहुविकल्पीय प्रश्न – 5 अंक)

(i) ‘तार सप्तक’ का प्रकाशन वर्ष कौन-सा है?
(क) 1943 ई.
(ख) 1951 ई.
(ग) 1959 ई.
(घ) 1979 ई.
उत्तर: (क) 1943 ई. (संपादक: अज्ञेय)

(ii) छायावाद की मुख्य विशेषता क्या है?
(क) इतिवृत्तात्मकता
(ख) सौंदर्य एवं प्रेम की व्यंजना
(ग) समाज सुधार
(घ) युद्धों का सजीव वर्णन
उत्तर: (ख) सौंदर्य एवं प्रेम की व्यंजना

(iii) निम्नलिखित में से कौन रीतिकाल के कवि हैं?
(क) सूरदास
(ख) बिहारीलाल
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) जयशंकर प्रसाद
उत्तर: (ख) बिहारीलाल

(iv) ‘कामायनी’ महाकाव्य के रचयिता कौन हैं?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) सुमित्रानंदन पंत
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
उत्तर: (ग) जयशंकर प्रसाद

(v) ‘प्रिय प्रवास’ महाकाव्य किस बोली/भाषा में लिखा गया है?
(क) अवधी
(ख) खड़ी बोली
(ग) ब्रज भाषा
(घ) मैथिली
उत्तर: (ख) खड़ी बोली (लेखक: अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’)


प्रश्न 3: गद्यांश पर आधारित प्रश्नोत्तर (10 अंक)

दिए गए गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:“भूमि का निर्माण देवों ने किया है, वह अनंत काल से है। उसके भौतिक रूप, सौंदर्य और समृद्धि के प्रति सचेत होना हमारा आवश्यक कर्तव्य है। भूमि के पार्थिव स्वरूप के प्रति हम जितने अधिक जागरूक होंगे, उतनी ही हमारी राष्ट्रीयता बलवती हो सकेगी। यह पृथ्वी सच्चे अर्थों में समस्त राष्ट्रीय विचारधाराओं की जननी है। जो राष्ट्रीयता पृथ्वी के साथ नहीं जुड़ी, वह निर्मूल होती है। राष्ट्रीयता की जड़ें पृथ्वी में जितनी गहरी होंगी, उतना ही राष्ट्रीय भावों का अंकुर पल्लवित होगा। इसलिए पृथ्वी के भौतिक स्वरूप की आद्योपान्त जानकारी प्राप्त करना, उसकी सुंदरता, उपयोगिता और महिमा को पहचानना आवश्यक धर्म है।”

प्रश्नोत्तर:

  1. पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए।
    उत्तर: पाठ का शीर्षक: ‘राष्ट्र का स्वरूप’। लेखक का नाम: डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल।
  2. रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए: (“राष्ट्रीयता की जड़ें पृथ्वी में जितनी गहरी होंगी, उतना ही राष्ट्रीय भावों का अंकुर पल्लवित होगा।”)
    उत्तर: लेखक का कथन है कि राष्ट्र प्रेम या राष्ट्रीयता की भावना तभी वास्तविक और स्थायी हो सकती है जब मनुष्य अपनी मातृभूमि के भौतिक स्वरूप, उसकी भूगोल और प्राकृतिक संसाधनों से गहराई से जुड़ा हो। जिस प्रकार वृक्ष का पोषण उसकी जड़ों से होता है, उसी प्रकार राष्ट्रीय चेष्टाएं मातृभूमि के जुड़ाव से ही फलती-फूलती हैं।
  3. राष्ट्रीयता की जड़ें कब निर्मूल होती हैं?
    उत्तर: जब राष्ट्रीयता या राष्ट्रप्रेम का आधार मातृभूमि (पृथ्वी) के व्यावहारिक ज्ञान और लगाव से कट जाता है, तो वह भावना आधारहीन (निर्मूल) हो जाती है।
  4. भूमि के प्रति हमारा प्राथमिक कर्तव्य क्या है?
    उत्तर: भूमि के भौतिक रूप, उसकी सुंदरता, समृद्धि, पर्यावरण तथा उपयोगिता के प्रति पूर्णतः जागरूक रहना और उसकी रक्षा करना हमारा प्राथमिक कर्तव्य है।
  5. ‘आद्योपान्त’ तथा ‘निर्मूल’ शब्दों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
    उत्तर: ‘आद्योपान्त’ का अर्थ है—शुरू से अंत तक (प्रारंभ से समाप्त होने तक)। ‘निर्मूल’ का अर्थ है—बिना जड़ का (निराधार)।

प्रश्न 4: पद्यांश पर आधारित प्रश्नोत्तर (10 अंक)

दिए गए पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:“बैठी खिन्ना एक दिवस वे गेह में थीं अकेली,
आके आँसू दृग-युगल में थे धरा को भिगोते।
आई धीरे इस सदन में पुष्प-गंधों को ले,
प्रातःवाली सुपवन इसी काल वातावरणों से॥”

प्रश्नोत्तर:

  1. उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
    उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के काव्य-खंड में संकलित ‘पवन दूतिका’ शीर्षक कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हैं (महाकाव्य: ‘प्रिय प्रवास’)।
  2. राधिका जी किस अवस्था में और कहाँ बैठी थीं?
    उत्तर: राधिका जी अपने घर में दुःखी और उदास होकर अकेली बैठी हुई थीं।
  3. प्रातःकालीन पवन किस मार्ग से तथा किस रूप में कमरे में प्रवेश करती है?
    उत्तर: प्रातःकालीन पवन झरोखों (खिड़कियों/वातावरणों) के मार्ग से विभिन्न पुष्पों की सुगंध को साथ लेकर घर के भीतर प्रवेश करती है।
  4. रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए: (“आके आँसू दृग-युगल में थे धरा को भिगोते।”)
    उत्तर: श्रीकृष्ण के वियोग में व्यथित राधा की दोनों आँखों में अश्रु भरकर लगातार ढुलक रहे थे, जो नीचे गिरकर पृथ्वी को भिगो रहे थे।
  5. प्रस्तुत पद्यांश में प्रयुक्त छंद तथा अलंकार का नाम बताइए।
    उत्तर: छंद: मंदाक्रांता छंद। अलंकार: अनुप्रास अलंकार तथा मानवीकरण अलंकार (पवन का मानवीकरण किया गया है)।

प्रश्न 5 (क): लेखक का साहित्यिक परिचय व कृतियाँ (5 अंक – शब्द सीमा: ~80 शब्द)

डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल

जीवन एवं साहित्यिक परिचय:
डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल (1904-1967 ई.) हिंदी साहित्य में पुरातत्व, संस्कृति और इतिहास के विद्वान शोधकर्ता के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने प्राचीन भारतीय साहित्य, संस्कृति और कला का गहन अध्ययन कर निबंध साहित्य को समृद्ध किया। उनके निबंधों में बौद्धिक प्रौढ़ता और चिंतन की गहराई स्पष्ट दिखाई देती है।

प्रमुख कृतियाँ:

  • निबंध संग्रह: ‘पृथ्वी पुत्र’, ‘कल्पवृक्ष’, ‘मातृभूमि’, ‘कला और संस्कृति’, ‘भारत की एकता’।
  • शोध ग्रंथ: ‘पाणिनिकालीन भारतवर्ष’।
  • संपादन: ‘पद्मावत’ (मलिक मोहम्मद जायसी) की संजीवनी व्याख्या।

भाषा-शैली:
इनकी भाषा परिमार्जित, शुद्ध खड़ी बोली तथा प्रांजल संस्कृतनिष्ठ है। शैली विचारप्रधान, व्याख्यात्मक तथा गवेषणात्मक है।


प्रश्न 5 (ख): कवि का साहित्यिक परिचय व कृतियाँ (5 अंक – शब्द सीमा: ~80 शब्द)

जयशंकर प्रसाद

जीवन एवं साहित्यिक परिचय:
छायावादी युग के प्रवर्तक जयशंकर प्रसाद (1889-1937 ई.) बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने अपनी कविताओं में सौंदर्य, प्रेम, राष्ट्रीय चेतना और दर्शन का अपूर्व समन्वय किया। ‘कामायनी’ जैसे कालजयी महाकाव्य की रचना करके उन्होंने हिंदी काव्य-जगत को अमरता प्रदान की।

प्रमुख काव्य रचनाएँ:

  • महाकाव्य: ‘कामायनी’ (15 सर्गों का मानवीय चेतना का महाकाव्य)।
  • काव्य ग्रंथ: ‘आँसू’, ‘लहर’, ‘झरना’, ‘चित्रधार’, ‘कानन कुसुम’।

काव्यगत विशेषताएँ:
प्रसाद जी के काव्य में छायावादी सौंदर्य, रहस्यवादी भावना, देशप्रेम और मानवतावादी दर्शन प्रधान है। भाषा-शैली में संस्कृत तत्सम शब्दावली एवं लाक्षणिकता का प्रचुर प्रयोग मिलता है।


प्रश्न 6: कहानी का सारांश एवं उद्देश्य (5 अंक – शब्द सीमा: ~80 शब्द)

‘पंचलाइट’ (लेखक: फणीश्वरनाथ ‘रेणु’)

सारांश व उद्देश्य:
‘पंचलाइट’ आंचलिक कथाकार फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ द्वारा रचित ग्रामीण जीवन का यथार्थ चित्रण करने वाली एक श्रेष्ठ कहानी है।

महतो टोली के ग्रामीण रामनवमी के मेले से ‘पंचलाइट’ (पेट्रोमैक्स) खरीद कर लाते हैं। पूजा का सामान सज जाता है, परंतु पूरे टोले में किसी को पंचलाइट जलाना नहीं आता। दूसरी ओर, टोले के पंचों ने गोधन नाम के युवक का हुक्का-पानी बंद कर रखा था, क्योंकि वह मुनरी से प्रेम करता था। जब पता चलता है कि गोधन पंचलाइट जलाना जानता है, तो जाति की प्रतिष्ठा बचाने के लिए पंच गोधन के सारे अपराध क्षमा कर देते हैं और उसे ससम्मान बुलाते हैं। गोधन अपनी कुशलता से पंचलाइट जला देता है। सब अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

उद्देश्य: रेणु जी ने यह स्पष्ट किया है कि आवश्यकता और परिस्थिति के आगे सामाजिक रूढ़ियाँ तथा व्यक्तिगत वैमनस्य निरर्थक साबित हो जाते हैं। कहानी ग्रामीण मनोविज्ञान का जीवंत दस्तावेज है।


प्रश्न 7: स्वपठित खंडकाव्य आधारित प्रश्न (5 अंक)

विभिन्न जिलों में निर्धारित खंडकाव्य (जैसे—मुक्ति यज्ञ, सत्य की जीत, रश्मिरथी, आलोक वृत्त, त्यागपथी, श्रवण कुमार) के आधार पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

उदाहरणात्मक उत्तर: ‘रश्मिरथी’ (रामधारी सिंह ‘दिनकर’) के आधार पर कर्ण का चरित्र-चित्रण

  1. परम दानी एवं उदार: कर्ण अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध हैं। द्वार पर आए किसी भी याचक (यहाँ तक कि छद्मवेशी इंद्र) को खाली हाथ नहीं लौटाते और अपने जीवन रक्षक ‘कवच-कुंडल’ दान कर देते हैं।
  2. सच्चा मित्र: दुर्योधन के साथ उनकी मित्रता निस्वार्थ और अटूट है। विपत्ति के समय वे पांडवों का पक्ष जानते हुए भी अपने मित्र दुर्योधन का साथ नहीं छोड़ते।
  3. महान धनुर्धर एवं प्रखर तेजस्वी: सूत-पुत्र कहलाने के बावजूद अपनी योग्यता और पराक्रम से वे संसार के महानतम योद्धाओं में गिने जाते हैं।
  4. विषम परिस्थितियों का शिकार: कर्ण जीवन भर सामाजिक उपेक्षा और छल-प्रपंच का शिकार रहे, फिर भी उन्होंने अपने नैतिक धर्म का त्याग नहीं किया।

4. खण्ड ‘ख’ (पूर्णांक: 50 अंक) – संपूर्ण प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

प्रश्न 8 (क): संस्कृत गद्यांश का संदर्भ सहित अनुवाद (7 अंक = 2 संदर्भ + 5 अनुवाद)

गद्यांश:“मैत्रेयी! उदयास्यन् अहम् अस्मात् स्थानादस्मि। ततस्तेऽनया कात्यायन्या विच्छेदं करवाणीति। मैत्रेयी उवाच—यदि यं सर्वा पृथिवी वित्तेन पूर्णा स्यात् तत् किं तेनामृता स्यामिति? याज्ञवल्क्य उवाच—नेति। यथैव उपकरणवतां जीवनं तथैव ते जीवनं स्यात्। अमृतत्वस्य तु नाशास्ति वित्तेनेति।”

उत्तर:

संदर्भ:
प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खंड में संकलित ‘आत्मज्ञ एव सर्वज्ञः’ (जो आत्मज्ञानी है, वही सर्वज्ञ है) शीर्षक पाठ से अवतरित है।

हिंदी अनुवाद:
याज्ञवल्क्य ने कहा—”हे मैत्रेयी! मैं इस (गृहस्थ) आश्रम से ऊपर (संन्यास आश्रम में) जाने वाला हूँ। इसलिए तुम्हारा अपनी दूसरी पत्नी कात्यायनी के साथ संपत्ति का बँटवारा कर दूँ।” मैत्रेयी ने कहा—”यदि धन से भरी यह पूरी पृथ्वी मेरी हो जाए, तो क्या मैं उससे अमर हो जाऊँगी?” याज्ञवल्क्य ने कहा—”नहीं! जैसा जीवन साधन-संपन्न लोगों का होता है, वैसा ही तुम्हारा जीवन भी होगा। धन से अमरता की आशा नहीं की जा सकती।”


प्रश्न 8 (ख): संस्कृत श्लोक का संदर्भ सहित अनुवाद (7 अंक = 2 संदर्भ + 5 अनुवाद)

श्लोक:सुखार्थिनः कुतो विद्या कुतो विद्यार्थिनः सुखम्।
सुखार्थी वा त्यजेद्विद्यां विद्यार्थी वा त्यजेत्सुखम्॥

उत्तर:

संदर्भ:
प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खंड के ‘सुभाषितानि’ / ‘सुभाषितरत्नानि’ पाठ से लिया गया है।

हिंदी अनुवाद:
सुख चाहने वाले को विद्या कहाँ (प्राप्त हो सकती है) और विद्या चाहने वाले (विद्यार्थी) को सुख कहाँ? इसलिए सुख की इच्छा रखने वाले को विद्या त्याग देनी चाहिए और विद्या प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले को सुख त्याग देना चाहिए।


प्रश्न 9: मुहावरे और लोकोक्तियाँ (2 अंक)

(i) अंधे की लाठी होना

  • अर्थ: एकमात्र सहारा।
  • वाक्य प्रयोग: श्रवण कुमार अपने वृद्ध और अंधे माता-पिता के लिए अंधे की लाठी थे।

(ii) ऊँट के मुँह में जीरा

  • अर्थ: आवश्यकता से बहुत कम वस्तु मिलना।
  • वाक्य प्रयोग: पहलमान भीमचंद को नाश्ते में केवल दो बिस्कुट देना ऊँट के मुँह में जीरा के समान है।

प्रश्न 10: अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नोत्तर (नया बोर्ड पैटर्न 2026 – 5 अंक)

अपठित गद्यांश:“मानव जीवन की सार्थकता कर्म में है, निष्क्रियता में नहीं। जो व्यक्ति जीवन में कठिनाइयों से डरकर अपने कदम पीछे खींच लेता है, वह कभी सफलता का स्वाद नहीं चख सकता। इसके विपरीत, जो कर्मवीर समस्याओं को चुनौती मानकर उनका सामना करते हैं, वे अपने मार्ग की बाधाओं को दूर कर सफलता के शिखर पर पहुँचते हैं। लगन, परिश्रम और अनुशासन ही मनुष्य की वास्तविक शक्ति हैं।”

प्रश्नोत्तर:

  1. मानव जीवन की सार्थकता किसमें निहित है?
    उत्तर: मानव जीवन की सार्थकता सतत कर्म करने में निहित है, निष्क्रिय होकर बैठने में नहीं।
  2. सफलता प्राप्त करने के लिए किन गुणों का होना आवश्यक है?
    उत्तर: सफलता प्राप्त करने के लिए लगन, कठोर परिश्रम, साहस और अनुशासन जैसे गुणों का होना आवश्यक है।
  3. गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
    उत्तर: उपयुक्त शीर्षक: ‘कर्म ही जीवन है’ अथवा ‘परिश्रम का महत्त्व’।

प्रश्न 11: शब्द रूप, युग्म व शुद्धिकरण (8 अंक)

(क) सही अर्थ का चयन कीजिए:

  1. वसन – व्यसन
    (अ) राजा और प्रजा
    (ब) वस्त्र और आदत (बुरी आदत)
    (स) निवास और बर्तन
    उत्तर: (ब) वस्त्र और आदत
  2. अंबुज – अंबुद
    (अ) कमल और बादल
    (ब) जल और वायु
    (स) समुद्र और कमल
    उत्तर: (अ) कमल और बादल

(ख) निम्नलिखित में से किसी एक शब्द के दो अर्थ (अनेकार्थी) लिखिए:

  • कनक: सोना, धतूरा, गेहूं।
  • तीर: बाण, नदी का तट (किनारा)।

(ग) वाक्यांश के लिए एक शब्द:

  • जो सब कुछ जानता हो — सर्वज्ञ
  • जिसकी कोई सीमा न हो — असीमित / असीम

(घ) निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए:

  1. अशुद्ध: मैं भोजन कर लिया हूँ।
    शुद्ध: मैंने भोजन कर लिया है।
  2. अशुद्ध: केवल ₹100 मात्र दे दीजिए।
    शुद्ध: केवल ₹100 दे दीजिए। (या ₹100 मात्र दे दीजिए।)

प्रश्न 12: काव्य सौंदर्य के तत्व (6 अंक)

(क) शृंगार अथवा करुण रस (2 अंक)

करुण रस:

  • परिभाषा: जब प्रिय व्यक्ति के विनाश, बंधु-वियोग या अनिष्ठ की प्राप्ति से मन में स्थित ‘शोक’ नामक स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव और संचारी भाव के संयोग से रस रूप में परिणत होता है, तब ‘करुण रस’ की निष्पत्ति होती है।
  • उदाहरण:“मणि खोये भुजंग-सी जननी, फंसा पटक रही थी शीश।”
    “अंधी आज बनाकर मुझको, किया न्याय तुमने जगदीश॥”

(ख) उपमा अथवा उत्प्रेक्षा अलंकार (2 अंक)

उत्प्रेक्षा अलंकार:

  • लक्षण (परिभाषा): जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। इसमें मनु, मानो, जनु, जानो, मनहुँ, जनहुँ जैसे वाचक शब्दों का प्रयोग होता है।
  • उदाहरण:“सोहत ओढ़े पीतु पटु, सलोने गात।”
    “मनौ नीलमणि शैल पर, आतपु पर्यो प्रभात॥”

(ग) दोहा अथवा सोरठा छंद (2 अंक)

सोरठा छंद:

  • लक्षण: यह अर्धसम मात्रिक छंद है। यह दोहा का उल्टा होता है। इसके प्रथम और तृतीय (विषम) चरणों में 11-11 मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ (सम) चरणों में 13-13 मात्राएँ होती हैं। तुक प्रथम और तीसरे चरण में मिलती है।
  • उदाहरण:“जो सुमिरत सिधि होइ, गन नायक करिबर बदन।”
    “करहु अनुग्रह सोइ, बुद्धि रासि शुभ गुन सदन॥”

प्रश्न 13: पत्र लेखन (6 अंक)

अपने मोहल्ले में नियमित सफाई व्यवस्था हेतु नगर निगम अधिकारी / अधिशासी अधिकारी को आवेदन पत्र

सेवा में,
स्वास्थ्य अधिकारी,
नगर निगम, [शहर का नाम], उत्तर प्रदेश।

विषय: मोहल्ले में नियमित सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने हेतु शिकायती पत्र।

महोदय,

मैं आपका ध्यान [अपने मोहल्ले/क्षेत्र का नाम, जैसे—गांधी नगर] की नारकीय सफाई व्यवस्था की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। पिछले तीन सप्ताह से हमारे मोहल्ले में सफाई कर्मचारी नहीं आ रहे हैं, जिसके कारण सड़कों के किनारे कचरे के ढेर लग गए हैं।

नालियों का पानी अवरुद्ध होकर सड़कों पर बह रहा है, जिससे दुर्गंध फैल रही है तथा मच्छर एवं संक्रामक बीमारियाँ (डेंगू, मलेरिया) फैलने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। स्थानीय निवासियों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है।

अतः आपसे नम्र निवेदन है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में सफाई कर्मचारियों की नियमित तैनाती करने तथा कीटनाशक दवाओं (ब्लीचिंग पाउडर) का छिड़काव कराने की कृपा करें।

सधन्यवाद!

भवदीय,
Person (समस्त निवासीगण)
मोहल्ला: Place
दिनांक: Date


प्रश्न 14: निबंध लेखन (9 अंक – शब्द सीमा: ~300 शब्द)

पर्यावरण प्रदूषण: कारण, प्रभाव एवं निवारण

रूपरेखा (Outline)

  1. प्रस्तावना
  2. प्रदूषण के प्रकार
  3. प्रदूषण के मुख्य कारण
  4. मानव जीवन पर प्रभाव
  5. निवारण के उपाय
  6. उपसंहार

1. प्रस्तावना

प्रकृति और मानव का संबंध सनातन है। जब प्रकृति के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में ऐसा अवांछनीय परिवर्तन आ जाता है, जिससे समस्त जीव-जगत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो उसे ‘पर्यावरण प्रदूषण’ कहते हैं। आधुनिक युग में औद्योगीकरण और वैज्ञानिक प्रगति के साथ यह समस्या विश्वव्यापी संकट बन चुकी है।

2. प्रदूषण के प्रमुख प्रकार

  • वायु प्रदूषण: वाहनों और कारखानों के जहरीले धुएँ से विषैली गैसों (CO2, SO2) का बढ़ना।
  • जल प्रदूषण: औद्योगिक कचरा और सीवेज का नदियों व जलाशयों में गिरना।
  • मृदा (भूमि) प्रदूषण: रासायनिक उर्वरकों और प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग।
  • ध्वनि प्रदूषण: लाउडस्पीकर, वाहनों के हॉर्न और मशीनों का तीव्र शोर।

3. कारण एवं प्रभाव

वनों की कटाई (अंधाधुंध शहरीकरण), बढ़ती जनसंख्या और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन इसके प्रमुख कारण हैं। इसके कारण असमय वर्षा, ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन परत का क्षरण तथा मानव में कैंसर, श्वास रोग जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं।

4. निवारण के उपाय

  • सघन वृक्षारोपण: ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसी मुहिम चलाकर व्यापक स्तर पर पौधे लगाए जाएं।
  • सौर व हरित ऊर्जा का प्रयोग: पेट्रोल-डीजल के स्थान पर ई-वाहनों और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना।
  • प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध: सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को समाप्त करना।

5. उपसंहार

पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है। यदि हम आज सचेत नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। “वृक्ष लगाओ, धरा बचाओ, जीवन को खुशहाल बनाओ।”


5. Topper Presentation Strategy: बोर्ड परीक्षा में 95+ अंक कैसे लाएं?

  1. काले और नीले पेन का सही संतुलन:
    प्रश्न संख्या, हेडिंग्स, कवि/लेखक के नाम, रचनाएँ और मुख्य बिंदुओं को ब्लैक पेन/स्केच पेन से लिखें। मुख्य उत्तर ब्लू पेन से दें।
  2. शब्द सीमा का कड़ाई से पालन (80 शब्द):
    साहित्यिक परिचय और कहानियों के सारांश में अति-विस्तार से बचें। 80 से 100 शब्दों के भीतर प्रासंगिक बिंदु ही लिखें।
  3. स्पष्ट मार्जिन और लाइन गैप:
    प्रत्येक उत्तर समाप्त होने के बाद 2 लाइनों का गैप छोड़ें या एक हल्की सीधी रेखा खींचें। उत्तरों को क्रमांकित (जैसे: प्रश्नोत्तर संख्या 3) स्पष्ट रूप से दर्ज करें।
  4. व्याकरण में पूर्ण सटीकता:
    व्याकरण, रस-छंद-अलंकार में परिभाषा के साथ सटीक उदाहरण अवश्य लिखें, क्योंकि इसमें पूरे अंक मिलते हैं।

6. अन्य महत्वपूर्ण बोर्ड एवं प्रतियोगी परीक्षा गाइड्स (Internal Links)


7. ⚠️ महत्वपूर्ण नोट एवं अध्ययन सलाह (Editorial Disclaimer Box)

संपादकीय सूचना एवं डिस्क्लेमर:
यह अध्ययन सामग्री (मॉडल पेपर एवं हल) केवल विद्यार्थियों के मार्गदर्शन, परीक्षा पैटर्न को समझने और अभ्यास हेतु तैयार की गई है। UP Board / UPMSP समय-समय पर अपने पाठ्यक्रम या परीक्षा पैटर्न में आंशिक बदलाव कर सकता है। अतः छात्र-छात्राएं परीक्षा की तैयारी करते समय आधिकारिक वेबसाइट (upmsp.edu.in) तथा अपनी NCERT पाठ्यपुस्तकों का संदर्भ अवश्य लें।


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