कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में भौतिक विज्ञान (Physics) का प्रैक्टिकल परीक्षा भाग अत्यंत निर्णायक होता है। कुल 100 अंकों में से 30 अंक केवल प्रयोगात्मक परीक्षा (Practical Exam) के निर्धारित होते हैं। यदि आप लिखित परीक्षा में 70 में से उत्कृष्ट अंक प्राप्त करते हैं, लेकिन प्रयोगात्मक परीक्षा के 30 अंकों में पिछड़ जाते हैं, तो आपकी अंतिम प्रतिशत (Percentage) प्रभावित हो सकती है।
प्रैक्टिकल परीक्षा के 30 अंकों का विभाजन निम्न प्रकार से होता है:
| परीक्षा घटक | अंक |
|---|---|
| दीर्घ प्रयोग (Long Experiment) | 08 अंक |
| लघु प्रयोग (Short Experiment) | 07 अंक |
| प्रैक्टिकल रिकॉर्ड फाइल (Practical Record File) | 05 अंक |
| चार्ट पेपर / इन्वेस्टिगेटरी प्रोजेक्ट (Project) | 05 अंक |
| मौखिक परीक्षा (Viva-Voce) | 05 अंक |
बाह्य परीक्षक (External Examiner) केवल आपकी फाइल या प्रोजेक्ट देखकर अंक नहीं देते, बल्कि मौखिक परीक्षा (Viva) के दौरान आपके द्वारा दिए गए उत्तरों से आपकी विषयगत समझ और अवधारणात्मक स्पष्टता (Conceptual Clarity) का मूल्यांकन करते हैं। यदि आप परीक्षक के सामने प्रश्नों का सटीक, स्पष्ट और आत्मविश्वास से उत्तर देते हैं, तो आपको 30 में से पूरे 30 अंक प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता।
1. धारा विद्युत एवं प्रतिरोध के प्रयोग (Electricity & Resistance Experiments)
1. मीटर ब्रिज (Meter Bridge)
प्रश्न 1: मीटर ब्रिज किस सिद्धान्त पर कार्य करता है?
उत्तर: मीटर ब्रिज व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge) के सिद्धान्त पर कार्य करता है। संतुलन की स्थिति में P / Q = R / S होता है।
प्रश्न 2: मीटर ब्रिज में तार की लम्बाई 1 मीटर ही क्यों रखी जाती है?
उत्तर: 1 मीटर (100 सेमी) लम्बाई होने के कारण इसकी गणना सरल हो जाती है, इसलिए इसे ‘मीटर ब्रिज’ कहा जाता है।
प्रश्न 3: मीटर ब्रिज का तार किस धातु का बना होता है और क्यों?
उत्तर: मीटर ब्रिज का तार नाइक्रोम, कांस्टेंटन (Constantan) या यूरेका (Eureka) मिश्रधातु का बनाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इनका विशिष्ट प्रतिरोध (Specific Resistance) उच्च तथा प्रतिरोध ताप गुणांक (Temperature Coefficient of Resistance) अत्यंत नगण्य होता है।
प्रश्न 4: शून्य विक्षेप बिंदु (Null Deflection Point) को तार के मध्य (40 cm से 60 cm) में ही प्राप्त करने का प्रयास क्यों किया जाता है?
उत्तर: जब शून्य विक्षेप बिंदु तार के मध्य भाग में प्राप्त होता है, तब व्हीटस्टोन सेतु की सुग्राहिता (Sensitivity) सर्वाधिक होती है और मापन में प्रतिशत त्रुटि न्यूनतम होती है।
2. विभवमापी (Potentiometer)
प्रश्न 5: विभवमापी का मुख्य सिद्धान्त क्या है?
उत्तर: जब किसी एकसमान अनुप्रस्थ काट वाले तार में नियत धारा प्रवाहित की जाती है, तो तार के किसी भी भाग पर विभव पतन (Potential Drop) उसकी लम्बाई के समानुपाती होता है (V ∝ L या V = K · L)।
प्रश्न 6: विभव प्रवणता (Potential Gradient – K) से आप क्या समझते हैं? इसका SI मात्रक क्या है?
उत्तर: विभवमापी तार की प्रति एकांक लम्बाई में होने वाले विभव पतन को विभव प्रवणता कहते हैं ($K = V / L$)। इसका SI मात्रक वोल्ट प्रति मीटर (V/m) होता है।
प्रश्न 7: विभवमापी को एक आदर्श वोल्टमीटर क्यों माना जाता है?
उत्तर: वोल्टमीटर मापते समय परिपथ से कुछ धारा ग्रहण कर लेता है, जिससे सटीक मान प्राप्त नहीं होता। इसके विपरीत, विभवमापी शून्य-विक्षेप (Null Deflection) की स्थिति में कार्य करता है और परिपथ से कोई धारा नहीं लेता। अतः यह अनंत प्रतिरोध वाले आदर्श वोल्टमीटर की भांति कार्य करता है।
3. ओम का नियम एवं विशिष्ट प्रतिरोध (Ohm’s Law & Specific Resistance)
प्रश्न 8: ओम का नियम क्या है? इसकी मुख्य सीमाएं क्या हैं?
उत्तर: यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएं (जैसे ताप, दाब आदि) स्थिर रहें, तो चालक के सिरों पर लगाया गया विभवांतर ($V$) उसमें प्रवाहित धारा ($I$) के समानुपाती होता है ($V = I \cdot R$)। इसकी सीमा यह है कि यह केवल धात्विक चालकों पर लागू होता है और ताप परिवर्तन नहीं होना चाहिए।
प्रश्न 9: ओमीय तथा अन-ओमीय परिपथ में क्या अंतर है?
उत्तर:
- ओमीय परिपथ: जो परिपथ ओम के नियम का पालन करते हैं (जैसे तांबे या एल्युमीनियम का तार)। इनके लिए $V-I$ ग्राफ एक सरल रेखा होता है।
- अन-ओमीय परिपथ: जो ओम के नियम का पालन नहीं करते (जैसे पी-एन डायोड, ट्रांजिस्टर, टॉर्च का बल्ब)। इनके लिए $V-I$ ग्राफ वक्राकार (Non-linear) होता है।
प्रश्न 10: विशिष्ट प्रतिरोध (Resistivity – ρ) किसे कहते हैं? इसका सूत्र एवं मात्रक लिखिए।
उत्तर: किसी पदार्थ के 1 मीटर लंबे तथा 1 वर्ग मीटर अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल वाले तार के प्रतिरोध को उसका विशिष्ट प्रतिरोध कहते हैं।
सूत्र: ρ = (R × A) / l
SI मात्रक: ओम-मीटर (Ω·m)।
प्रश्न 11: ताप बढ़ाने पर धातुओं और अर्द्धचालकों के प्रतिरोध पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
- धातु (Conductor): ताप बढ़ाने पर प्रतिरोध बढ़ता है।
- अर्द्धचालक (Semiconductor): ताप बढ़ाने पर प्रतिरोध घटता है।
2. प्रकाशिकी के प्रयोग (Optics Experiments)
1. उत्तल लेंस एवं अवतल दर्पण (Convex Lens & Concave Mirror)
प्रश्न 12: उत्तल लेंस के लिए यू-वी (u-v) का सूत्र क्या है?
उत्तर: 1/f = 1/v – 1/u (जहाँ f = फोकस दूरी, v = प्रतिबिंब की दूरी, u = वस्तु की दूरी)।
प्रश्न 13: सूचकांक त्रुटि (Index Error) किसे कहते हैं?
उत्तर: प्रकाशित बेंच पर पिनों की वास्तविक दूरी और बेंच के पैमाने पर पढ़ी गई दूरियों के बीच के अंतर को सूचकांक त्रुटि कहते हैं।
2. लंबन (Parallax)
प्रश्न 14: लंबन (Parallax) क्या है और इसे कैसे दूर किया जाता है?
उत्तर: जब दो वस्तुएं आगे-पीछे रखी हों और आंख को बाएं-दाएं हटाने पर वे एक-दूसरे के सापेक्ष गति करती प्रतीत होती हैं, तो इस विस्थापन को लंबन कहते हैं। जब दोनों पिनों की नोक एक-दूसरे के ठीक ऊपर स्थिर रहें और आंख हटाने पर भी अलग न हों, तो लंबन दूर हो जाता है।
3. प्रिज्म का अपवर्तनांक (Refractive Index of Prism)
प्रश्न 15: प्रिज्म के अपवर्तनांक का सूत्र लिखिए。
उत्तर:
n = sin[(A + δm)/2] / sin(A/2)
जहाँ A = प्रिज्म कोण तथा δm = न्यूनतम विचलन कोण (Angle of Minimum Deviation) है。
प्रश्न 16: प्रिज्म में प्रवेश करने पर किस रंग का विचलन सबसे अधिक और किस रंग का सबसे कम होता है?
उत्तर: बैगनी (Violet) रंग का विचलन सबसे अधिक और लाल (Red) रंग का विचलन सबसे कम होता है, क्योंकि बैगनी रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम और लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होती है।
प्रश्न 17: समतल दर्पण और उत्तल लेंस की सहायता से द्रव का अपवर्तनांक ज्ञात करने में किस द्रव का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर: आमतौर पर जल या ग्लिसरीन का प्रयोग समतल-अवतल (Plano-concave) द्रव लेंस बनाने के लिए किया जाता है।
3. अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं डायोड के प्रयोग (Semiconductor Experiments)
1. P-N जंक्शन डायोड (P-N Junction Diode)
प्रश्न 18: अग्र अभिनति (Forward Bias) और उत्क्रम अभिनति (Reverse Bias) में क्या अंतर है?
उत्तर:
- अग्र अभिनति: जब P-क्षेत्र को बैटरी के धन ध्रुव से और N-क्षेत्र को ऋण ध्रुव से जोड़ा जाता है। इसमें परिपथ में धारा सुगमता से प्रवाहित होती है।
- उत्क्रम अभिनति: जब P-क्षेत्र को ऋण ध्रुव से और N-क्षेत्र को धन ध्रुव से जोड़ा जाता है। इसमें बहुत सूक्ष्म (माइक्रो-एम्पियर) धारा प्रवाहित होती है।
प्रश्न 19: अवक्षय परत (Depletion Layer) और प्राचीर विभव (Barrier Potential) क्या हैं?
उत्तर:
- अवक्षय परत: P-N संधि के निकट का वह क्षेत्र जहाँ कोई स्वतंत्र आवेश वाहक (कोटर या इलेक्ट्रॉन) नहीं होते।
- प्राचीर विभव: अवक्षय परत के सिरों पर उत्पन्न आंतरिक विभवांतर जो आवेश वाहकों के पुनर्मिलन को रोकता है। सिलिकॉन के लिए यह 0.7 V तथा जर्मेनियम के लिए 0.3 V होता है।
2. जेनर डायोड (Zener Diode)
प्रश्न 20: जेनर डायोड क्या है और इसका मुख्य उपयोग क्या है?
उत्तर: जेनर डायोड अत्यधिक अपमिश्रित (heavily doped) P-N संधि डायोड है जो उत्क्रम अभिनति में भंजन वोल्टता (Breakdown Voltage) पर कार्य करता है। इसका मुख्य उपयोग वोल्टता नियंतक (Voltage Regulator) के रूप में किया जाता है।
प्रश्न 21: ओमीय प्रतिरोधक और डायोड में क्या मुख्य अंतर है?
उत्तर: प्रतिरोधक द्वि-दिशिक (Bidirectional) होता है और ओम के नियम का पालन करता है, जबकि डायोड एक-दिशिक (Unidirectional) होता है और अन-ओमीय व्यवहार प्रदर्शित करता है।
4. उपकरण, मापन एवं अल्पतमांक (Apparatus & Least Count)
1. अल्पतमांक (Least Count)
प्रश्न 22: अल्पतमांक (Least Count) किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी मापक यंत्र द्वारा मापी जा सकने वाली न्यूनतम और शुद्ध दूरी या मान को उस यंत्र का अल्पतमांक कहते हैं।
प्रश्न 23: स्क्रूगेज और वर्नियर कैलिपर्स का अल्पतमांक कितना होता है?
उत्तर:
- वर्नियर कैलिपर्स: 0.01 cm या 0.1 mm
- स्क्रूगेज (Screw Gauge): 0.001 cm या 0.01 mm
प्रश्न 24: शून्य त्रुटि (Zero Error) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: यदि मुख्य पैमाने का शून्य और सहायक/वृत्तीय पैमाने का शून्य आपस में सम्पाती (coincide) न हों, तो यंत्र में शून्य त्रुटि होती है। यह धनात्मक या ऋणात्मक हो सकती है।
2. धारामापी का रूपांतरण (Galvanometer Conversion)
प्रश्न 25: गैल्वेनोमीटर (धारामापी) को एमीटर में कैसे बदला जाता है?
उत्तर: धारामापी की कुंडली के समांतर क्रम (Parallel) में एक बहुत कम प्रतिरोध का तार (जिसे ‘शंट’ कहते हैं) जोड़कर।
प्रश्न 26: गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में कैसे बदला जाता है?
उत्तर: धारामापी की कुंडली के श्रेणीक्रम (Series) में एक उच्च प्रतिरोध जोड़कर।
प्रश्न 27: आदर्श एमीटर और आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध कितना होना चाहिए?
उत्तर: आदर्श एमीटर का प्रतिरोध शून्य (0) तथा आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनंत (∞) होना चाहिए।
5. चार्ट पेपर प्रोजेक्ट स्पेशल वायवा प्रश्न (Chart Paper Project Questions)
यदि आपने चार्ट पेपर पर निम्नलिखित में से कोई मॉडल बनाया है, तो परीक्षक द्वारा पूछे जाने वाले सम्भावित प्रश्न नीचे दिए गए हैं:
1. ट्रांसफॉर्मर (Transformer)
प्रश्न 28: ट्रांसफॉर्मर किस सिद्धान्त पर कार्य करता है? क्या यह DC पर कार्य कर सकता है?
उत्तर: ट्रांसफॉर्मर अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction) के सिद्धान्त पर कार्य करता है। यह केवल प्रत्यावर्ती धारा (AC) पर कार्य करता है, दिस्ट धारा (DC) पर नहीं।
प्रश्न 29: ट्रांसफॉर्मर की क्रोड (Core) पटलित (Laminated) क्यों बनाई जाती है?
उत्तर: भंवर धाराओं (Eddy Currents) के कारण होने वाली ऊर्जा हानि को कम करने के लिए क्रोड को पटलित बनाया जाता है। क्रोड के लिए नरम लोहे (Soft Iron) का प्रयोग होता है।
प्रश्न 30: ऊंचाई (Step-up) और अपचाई (Step-down) ट्रांसफॉर्मर में क्या अंतर है?
उत्तर:
- ऊंचाई ट्रांसफॉर्मर: निम्न AC वोल्टता को उच्च AC वोल्टता में बदलता है। (द्वितीयक कुंडली में फेरों की संख्या अधिक होती है: $N_s > N_p$)।
- अपचाई ट्रांसफॉर्मर: उच्च AC वोल्टता को निम्न AC वोल्टता में बदलता है। ($N_s < N_p$)।
2. पूर्ण तरंग दिष्टकारी (Full Wave Rectifier)
प्रश्न 31: दिष्टकारी (Rectifier) का कार्य क्या है?
उत्तर: दिष्टकारी प्रत्यावर्ती धारा (AC) को दिष्ट धारा (DC) में परिवर्तित करता है।
प्रश्न 32: पूर्ण तरंग दिष्टकारी में कितने P-N जंक्शन डायोड का प्रयोग होता है?
उत्तर: सेंटर-टैप (Center-tapped) दिष्टकारी में 2 डायोड तथा ब्रिज दिष्टकारी में 4 डायोड का प्रयोग होता है।
3. साइक्लोट्रॉन (Cyclotron)
प्रश्न 33: साइक्लोट्रॉन क्या है? इससे किन कणों को त्वरित किया जाता है?
उत्तर: यह एक ऐसा उपकरण है जो धनावेशित कणों (जैसे प्रोटॉन, अल्फा-कण, ड्यूट्रॉन) को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 34: साइक्लोट्रॉन से इलेक्ट्रॉन को त्वरित क्यों नहीं किया जा सकता?
उत्तर: इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान अत्यंत कम होने के कारण अत्यंत उच्च वेग पर इसका द्रव्यमान सापेक्षिकता (Relativity) के कारण तेजी से बदलता है, जिससे यह अनुनाद की स्थिति (Resonance Condition) खो देता है।
4. लॉजिक गेट्स (Logic Gates)
प्रश्न 35: मूल (Basic) लॉजिक गेट कौन-कौन से हैं?
उत्तर: OR, AND, और NOT गेट।
प्रश्न 36: सार्वत्रिक (Universal) गेट किसे कहते हैं और क्यों?
उत्तर: NAND और NOR गेट को सार्वत्रिक गेट कहते हैं क्योंकि इनके संयोजन से किसी भी अन्य मूल लॉजिक गेट का निर्माण किया जा सकता है।
5. सौर सेल (Solar Cell)
प्रश्न 37: सौर सेल का कार्य सिद्धान्त क्या है?
उत्तर: यह फोटोवोल्टाइक प्रभाव (Photovoltaic Effect) पर कार्य करता है और प्रकाश ऊर्जा (फोटॉन) को सीधे विद्युत ऊर्जा में बिना किसी बाह्य बायसिंग के परिवर्तित करता है।
6. 25 सबसे महत्वपूर्ण भौतिक राशियों के मात्रक और विमीय सूत्र (Quick Revision Table)
परीक्षक प्रायः बुनियादी राशियों के SI मात्रक और विमीय सूत्र पूछते हैं। इस तालिका को अच्छी तरह याद कर लें:
| क्र.सं. | भौतिक राशि (Physical Quantity) | SI मात्रक (SI Unit) | विमीय सूत्र (Dimensional Formula) |
|---|---|---|---|
| 1 | विद्युत धारा (Electric Current) | एम्पियर (Ampere / A) | [A] |
| 2 | विद्युत आवेश (Electric Charge) | कूलॉम (Coulomb / C) | [A T] |
| 3 | विद्युत विभव / विभवांतर (Potential) | वोल्ट (Volt / V) | [M L² T⁻³ A⁻¹] |
| 4 | विद्युत प्रतिरोध (Resistance) | ओम (Ω) | [M L² T⁻³ A⁻²] |
| 5 | विशिष्ट प्रतिरोध (Resistivity) | ओम-मीटर (Ω·m) | [M L³ T⁻³ A⁻²] |
| 6 | विद्युत धारिता (Capacitance) | फैराड (Farad / F) | [M⁻¹ L⁻² T⁴ A²] |
| 7 | विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (Electric Field) | न्यूटन/कूलॉम या वोल्ट/मीटर | [M L T⁻³ A⁻¹] |
| 8 | विद्युत फ्लक्स (Electric Flux) | न्यूटन-मीटर²/कूलॉम | [M L³ T⁻³ A⁻¹] |
| 9 | चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) | टेस्ला (T) या वेबर/मीटर² | [M T⁻² A⁻¹] |
| 10 | चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) | वेबर (Weber / Wb) | [M L² T⁻² A⁻¹] |
| 11 | स्वप्रेरकत्व / अन्योन्य प्रेरकत्व (Inductance) | हेनरी (Henry / H) | [M L² T⁻² A⁻²] |
| 12 | अपवर्तनांक (Refractive Index) | मात्रकहीन (Unitless) | [M⁰ L⁰ T⁰] (विमाहीन) |
| 13 | लेंस की क्षमता (Power of Lens) | डायोप्टर (Diopter / D) | [L⁻¹] |
| 14 | तरंगदैर्ध्य (Wavelength) | मीटर (m) या एंगस्ट्रॉम (Å) | [L] |
| 15 | आवृत्ति (Frequency) | हर्ट्ज (Hz) या सेकंड⁻¹ | [T⁻¹] |
| 16 | कार्य / ऊर्जा (Work / Energy) | जूल (Joule / J) | [M L² T⁻²] |
| 17 | शक्ति (Power) | वाट (Watt / W) | [M L² T⁻³] |
| 18 | बल (Force) | न्यूटन (Newton / N) | [M L T⁻²] |
| 19 | पृष्ठ तनाव (Surface Tension) | न्यूटन/मीटर | [M T⁻²] |
| 20 | श्यानता गुणांक (Viscosity Coefficient) | पॉइज़ या न्यूटन-सेकंड/मीटर² | [M L⁻¹ T⁻¹] |
| 21 | प्लांक नियतांक (Planck’s Constant) | जूल-सेकंड (J·s) | [M L² T⁻¹] |
| 22 | कार्य फलन (Work Function) | इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (eV) या जूल | [M L² T⁻²] |
| 23 | धारा घनत्व (Current Density) | एम्पियर/मीटर² | [L⁻² A] |
| 24 | विशिष्ट चालकता (Conductivity) | ओम⁻¹-मीटर⁻¹ (Ω⁻¹·m⁻¹) | [M⁻¹ L⁻³ T³ A²] |
| 25 | चुंबकन की तीव्रता (Intensity of Magnetization) | एम्पियर/मीटर | [L⁻¹ A] |
7. परीक्षक के सामने वायवा में 30 में से 30 अंक लाने की 5 गुप्त रणनीतियां
- लैब कोट और वेशभूषा (Proper Dress Code): प्रैक्टिकल के दिन साफ-सुथरी यूनिफॉर्म और लैब कोट पहनकर जाएं। अनुशासित व्यवहार परीक्षक पर पहला अच्छा प्रभाव (First Impression) डालता है।
- प्रैक्टिकल फाइल की स्वच्छता: आपकी प्रैक्टिकल फाइल पूर्ण, साफ-सुथरी और विषय अध्यापक द्वारा हस्ताक्षरित होनी चाहिए। इंडेक्स (Index) अधूरा न छोड़ें।
- गलत उत्तर देने से बचें: यदि आपको किसी प्रश्न का उत्तर नहीं आता, तो गलत अनुमान लगाने या परीक्षक को गुमराह करने के बजाय विनम्रता से कहें: “सर/मैडम, मुझे इस समय इसका सटीक उत्तर याद नहीं आ रहा है।”
- अपना पसंदीदा टॉपिक तैयार रखें: प्रायः परीक्षक पूछते हैं, “आपने कौन सा चैप्टर सबसे अच्छा तैयार किया है?” ऐसे में तुरंत अपने तैयार किए गए विषय (जैसे- प्रकाशिकी, अर्धचालक, या धारा विद्युत) का नाम बताएं।
- मात्रक (Units) कभी न भूलें: किसी भी भौतिक राशि का मान बताते समय उसका मात्रक अवश्य बोलें (जैसे केवल “5” कहने के बजाय “5 वोल्ट” या “5 एम्पियर” कहें)।
अन्य महत्वपूर्ण बोर्ड एवं प्रतियोगी परीक्षा गाइड्स
- UP Board Exam Centre List 2027
- MP TET Syllabus in Hindi
- Kalpana Chawla Biography in Hindi
- Essay on Election in Hindi
- RRB NTPC Syllabus in Hindi
⚠️ महत्वपूर्ण नोट एवं अध्ययन सलाह (Editorial Disclaimer)
अस्वीकरण (Disclaimer): यद्यपि इस अध्ययन सामग्री, भौतिक सूत्रों, मात्रकों और प्रयोगात्मक प्रश्नोत्तरों को तैयार करने में विषय विशेषज्ञों द्वारा पूर्ण सावधानी बरती गई है और इसे नवीनतम आधिकारिक बोर्ड पाठ्यक्रम के आधार पर संकलित किया गया है, फिर भी किसी भी अनजाने टंकण (Typo), मुद्रण त्रुटि या तथ्यात्मक विसंगति के निवारण हेतु छात्र अपने संबंधित शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित अधिकृत पाठ्यपुस्तकों (NCERT / राज्य बोर्ड पुस्तकें) तथा अपने विद्यालय के विषय अध्यापक के मार्गदर्शन से मिलान अवश्य करें। प्रयोगशाला में किसी भी उपकरण का उपयोग करने से पहले अपने लैब अनुदेशक (Lab Instructor) के दिशा-निर्देशों का पालन करें。
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