कारक के भेद, परिभाषा और विभक्ति चिह्न: 8 कारकों की पहचान, नियम और 50+ उदाहरण

कारक के भेद, परिभाषा और विभक्ति चिह्न: 8 कारकों की पहचान, नियम और 50+ उदाहरण

हिंदी व्याकरण में वाक्य संरचना को सुव्यवस्थित, अर्थपूर्ण और व्याकरणसम्मत बनाने में ‘कारक’ (Case) की भूमिका अत्यंत निर्णायक है। किसी भी वाक्य में केवल शब्दों का समूह रख देने से उसका पूर्ण भाव स्पष्ट नहीं होता, जब तक कि उन शब्दों (संज्ञा अथवा सर्वनाम) का क्रिया के साथ प्रत्यक्ष संबंध स्थापित न हो।

📢 शिक्षातक (Sikshatak) कम्युनिटी से जुड़ें

दैनिक शिक्षा समाचार, सरकारी नौकरी अपडेट्स, बोर्ड परीक्षा व फ़्री PDF नोट्स सबसे पहले पाने के लिए जॉइन करें:

संस्कृत व्याकरण में आचार्य पाणिनि ने कारक की अत्यंत वैज्ञानिक परिभाषा दी है:“क्रियाजनकत्वं कारकत्वम्।” अथवा “करोति निर्वर्तयति क्रियां यत् तत् कारकम्।”
(अर्थात: जो क्रिया को उत्पन्न करे अथवा जिसके द्वारा क्रिया सिद्ध हो, वही ‘कारक’ कहलाता है।)

हिंदी में संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध वाक्य की अन्य क्रियाओं अथवा पदों के साथ जाना जाता है, उसे ‘कारक’ कहते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UP Police Sub-Inspector/Constable, CTET, UPTET, REET, DSSSB, RO/ARO, BPSC तथा UPPSC में कारक की पहचान, विभक्ति चिह्न लोप (शून्य विभक्ति) तथा अपादान बनाम करण कारक के अंतर पर आधारित 3 से 4 प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। नीचे 8 कारकों की संपूर्ण संरचना, विभक्ति चिह्न तालिका, पहचान नियम, 50 से अधिक अमर उदाहरण और 10 बहुविकल्पीय अभ्यास प्रश्न प्रस्तुत हैं।

कारक: एक नज़र में (Executive Summary Table)

कारक का नामविभक्ति चिह्न (परसर्ग)व्याकरणिक अर्थ / कार्यपहचान हेतु प्रश्नवाचक शब्द
1. कर्ता कारकने (शून्य / प्रत्यक्ष)क्रिया को संपन्न करने वालाकिसने? कौन?
2. कर्म कारकको (शून्य / प्रत्यक्ष)जिस पर क्रिया का प्रभाव/फल पड़ेकिसको? क्या?
3. करण कारकसे, के द्वारा, के जरिएक्रिया को करने का साधन या माध्यमकिससे? किसके द्वारा?
4. संप्रदान कारकको, के लिए, के वास्तेजिसके लिए क्रिया की जाए या जिसे कुछ दिया जाएकिसको? किसके लिए?
5. अपादान कारकसे (अलग होना, भय, लज्जा, तुलना)एक वस्तु से दूसरी वस्तु का अलग होना या अलगावकहाँ से? किससे?
6. संबंध कारकका, के, की, रा, रे, री, ना, ने, नीदो संज्ञा/सर्वनाम पदों के बीच संबंधकिसका? किसकी? किसके?
7. अधिकरण कारकमें, पर, पे, के ऊपरक्रिया के घटित होने का स्थान, समय या आधारकहाँ? किसमें? किसपर?
8. संबोधन कारकहे!, अरे!, ओ!, रे!, अजी!किसी को पुकारना, सचेत करना या संबोधित करनाअरे!, हे!

1. कारक की परिभाषा एवं व्याकरणिक संकल्पना (Definition of Karak)

संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका सीधा संबंध वाक्य की ‘क्रिया’ (Verb) के साथ स्थापित होता है, उसे कारक कहते हैं।

  • सरल शब्दों में: वाक्य में उपस्थित संज्ञा या सर्वनाम शब्द जब तक किसी क्रिया से नहीं जुड़ते, तब तक वाक्य का अर्थ अधूरा रहता है। उदाहरण के लिए:
    • ‘राम रावण बाण मारा’ (यह वाक्य अधूरा और अर्थहीन है)।
    • ‘राम ने रावण को बाण से मारा।’
      (यहाँ ‘ने’, ‘को’ और ‘से’ चिन्हों ने ‘राम’, ‘रावण’ और ‘बाण’ का संबंध ‘मारा’ क्रिया से जोड़कर वाक्य को पूर्ण अर्थ प्रदान कर दिया। यही चिन्ह कारक की विभक्तियाँ हैं)।

विस्तृत सामासिक व्याकरण हेतु पढ़ें: समास के भेद, परिभाषा और 50+ उदाहरण: जानें समास विग्रह के 6 नियम

2. विभक्ति एवं परसर्ग क्या है? (Vibhakti & Parasarg)

कारकों के संबंधों को स्पष्ट करने के लिए संज्ञा अथवा सर्वनाम के आगे जो प्रत्यय या स्वतंत्र चिन्ह लगाए जाते हैं, उन्हें व्याकरण में ‘विभक्ति’ अथवा ‘परसर्ग’ (Postposition) कहा जाता है।

  • विभक्ति का स्वरूप: संस्कृत में विभक्तियां शब्दों के साथ जुड़ी (संश्लिष्ट) रहती हैं (जैसे: ‘रामेण’), जबकि हिंदी में संज्ञा शब्दों के साथ विभक्तियां अलग (विश्लिष्ट) लिखी जाती हैं (जैसे: ‘राम ने’) तथा सर्वनाम शब्दों के साथ मिलाकर (संश्लिष्ट) लिखी जाती हैं (जैसे: ‘उसने’, ‘मुझको’, ‘तुम्हारा’)।
  • शून्य विभक्ति (Zero Inflection): जब किसी वाक्य में कारक चिन्ह प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देता परन्तु कारक विद्यमान रहता है, तो उसे ‘शून्य विभक्ति’ या ‘अप्रत्यक्ष कारक’ कहते हैं (जैसे: ‘मोहन पुस्तक पढ़ता है’ — यहाँ ‘मोहन ने’ के स्थान पर ‘ने’ लुप्त है)।

कमल के 50+ पर्यायवाची शब्दों हेतु पढ़ें: कमल का पर्यायवाची शब्द: 50+ समानार्थी शब्द

3. कारक के 8 प्रमुख भेद एवं शास्त्रीय नियम

Table of Contents

(क) कर्ता कारक (Nominative Case):

वाक्य में जो संज्ञा या सर्वनाम शब्द क्रिया को करने वाला होता है, उसे ‘कर्ता कारक’ कहते हैं। इसका विभक्ति चिह्न ‘ने’ है।

  • नियम: सकर्मक क्रिया के भूतकाल में ‘ने’ चिह्न अनिवार्य रूप से लगता है। अकर्मक क्रिया तथा वर्तमान एवं भविष्य काल में ‘ने’ का प्रयोग नहीं होता (शून्य विभक्ति)।
  • उदाहरण:
    • राम ने रावण को मारा। (भूतकाल सकर्मक — ‘ने’ प्रत्यक्ष)
    • रोहन पत्र लिखता है। (वर्तमान काल — ‘ने’ लुप्त, शून्य विभक्ति)
    • सीता कल दिल्ली जाएगी। (भविष्यत काल — शून्य विभक्ति)

(ख) कर्म कारक (Accusative Case):

क्रिया के व्यापार (कार्य) का फल जिस संज्ञा अथवा सर्वनाम पर पड़ता है, उसे ‘कर्म कारक’ कहते हैं। इसका विभक्ति चिह्न ‘को’ है।

  • नियम: सजीव (प्राणीवाचक) कर्म के साथ प्रायः ‘को’ का प्रयोग होता है, जबकि निर्जीव (अप्राणीवाचक) कर्म के साथ ‘को’ का प्रयोग नहीं होता।
  • उदाहरण:
    • अध्यापक ने छात्र को दंड दिया। (सजीव कर्म — ‘को’ प्रत्यक्ष)
    • मोहन पुस्तक पढ़ता है। (निर्जीव कर्म — ‘को’ लुप्त, शून्य विभक्ति)
    • मजदूर ने पेड़ को काटा।

(ग) करण कारक (Instrumental Case):

कर्ता जिस साधन या माध्यम की सहायता से अपनी क्रिया को संपन्न करता है, उस साधन को ‘करण कारक’ कहते हैं। इसके विभक्ति चिह्न ‘से’ तथा ‘के द्वारा’ हैं।

  • पहचान: क्रिया से पहले ‘किससे’ या ‘किसके द्वारा’ प्रश्न पूछने पर जो उत्तर मिले।
  • उदाहरण:
    • बच्चा गेंद से खेल रहा है। (खेलने का साधन = गेंद)
    • सीता कलम से लिखती है।
    • गांधी जी ने अहिंसा के द्वारा देश को स्वतंत्र कराया।
    • वह बस से कानपुर गया।

(घ) संप्रदान कारक (Dative Case):

‘संप्रदान’ का शाब्दिक अर्थ है — ‘देना’। कर्ता जिसके लिए कोई कार्य करता है अथवा जिसे कुछ स्थायी रूप से प्रदान करता है, उसे ‘संप्रदान कारक’ कहते हैं। इसके विभक्ति चिह्न ‘को’, ‘के लिए’ तथा ‘के वास्ते’ हैं।

  • महत्वपूर्ण नियम: जब कोई वस्तु किसी को सदा के लिए (दान स्वरूप) दी जाए और वापस न ली जाए, तो वहाँ संप्रदान कारक (‘को’) होता है।
  • उदाहरण:
    • राजा ने निर्धनों को वस्त्र दिए। (दान का भाव — संप्रदान कारक)
    • माँ बेटे के लिए दूध लाई।
    • शिष्य गुरुजी के लिए दक्षिणा लाया।
    • भूखे को भोजन दो।

(ङ) अपादान कारक (Ablative Case):

संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से किसी वस्तु का दूसरी वस्तु से अलग होना (अलगाव), भय (डरना), तुलना (श्रेष्ठ/हीन बताना), लज्जा/शर्म अथवा दूरी प्रकट हो, उसे ‘अपादान कारक’ कहते हैं। इसका विभक्ति चिह्न ‘से’ है।

  • नियम: अलगाव के अतिरिक्त यदि वाक्य में डरने, सीखने या तुलना का भाव हो, तो भी अपादान कारक ही होता है।
  • उदाहरण:
    • पेड़ से पत्ता गिरा। (वृक्ष से पत्ते का भौतिक अलगाव)
    • गंगा हिमालय से निकलती है। (उद्गम व अलगाव)
    • चूहा बिल्ली से डरता है। (भय का भाव)
    • सीता गीता से अधिक सुंदर है। (तुलना का भाव)
    • बहू ससुर से लजाती है। (शर्म/लज्जा का भाव)

(च) संबंध कारक (Genitive Case):

संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से एक वस्तु या प्राणी का दूसरी वस्तु या प्राणी से आपसी संबंध प्रकट हो, उसे ‘संबंध कारक’ कहते हैं।

  • विभक्ति चिह्न: का, के, की (संज्ञा के साथ) तथा रा, रे, री / ना, ने, नी (सर्वनाम के साथ)।
  • उदाहरण:
    • यह दशरथ के पुत्र राम हैं।
    • रोहन की पुस्तक मेज पर रखी है।
    • यह मेरा घर है। (रा, री, रे)
    • उसने अपना कार्य कर लिया। (ना, नी, ने)

(छ) अधिकरण कारक (Locative Case):

संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से क्रिया के होने के स्थान (आधार), समय अथवा परिस्थितियों का बोध होता है, उसे ‘अधिकरण कारक’ कहते हैं।

  • विभक्ति चिह्न: में, पर, पे, के अंदर, के ऊपर।
  • उदाहरण:
    • मेज पर पुस्तक रखी है। (क्रिया का भौतिक आधार)
    • चिड़िया पेड़ की डाल पर बैठी है।
    • कमरे में छात्र अध्ययन कर रहे हैं।
    • परीक्षा मई के महीने में होगी। (समय का आधार)

(ज) संबोधन कारक (Vocative Case):

संज्ञा के जिस रूप से किसी को पुकारने, चेतावनी देने, बुलाने या सचेत करने का भाव व्यक्त हो, उसे ‘संबोधन कारक’ कहते हैं।

  • विभक्ति चिह्न: हे!, अरे!, ओ!, अजी!, रे! (इसके बाद विस्मयादिबोधक चिह्न ‘!’ अनिवार्य रूप से लगता है)।
  • उदाहरण:
    • हे ईश्वर! मेरी रक्षा करो।
    • अरे बालक! सड़क पर मत खेलो।
    • अजी! जरा सुनिए तो।

विलोम शब्दों के 200+ नियमों हेतु पढ़ें: Vilom Shabd in Hindi: 200+ महत्वपूर्ण विलोम शब्द

4. छात्रों के दो सबसे बड़े संशय एवं उनके अचूक समाधान

प्रतियोगी परीक्षाओं में सर्वाधिक भ्रम निम्नलिखित दो जोड़ों में होता है:

(1) करण कारक ‘से’ बनाम अपादान कारक ‘से’ में अंतर:

  • करण कारक (‘से’): यहाँ ‘से’ साधन, माध्यम या सहायता के रूप में प्रयुक्त होता है (जैसे: ‘वह चाकू से सेब काटता है’ — यहाँ चाकू काटने का साधन है)।
  • अपादान कारक (‘से’): यहाँ ‘से’ अलग होने, छूटने, दूरी, तुलना या डरने के अर्थ में आता है (जैसे: ‘हाथ से चाकू गिर गया’ — यहाँ चाकू हाथ से अलग हो गया)।

(2) कर्म कारक ‘को’ बनाम संप्रदान कारक ‘को’ में अंतर:

  • कर्म कारक (‘को’): यहाँ ‘को’ क्रिया का सीधा फल भोगने वाले पद के साथ आता है और वस्तु वापस ली जा सकती है (जैसे: ‘धोबी को कपड़े दिए’ — कपड़े धोने के बाद वापस आएंगे, अतः कर्म कारक है)।
  • संप्रदान कारक (‘को’): यहाँ ‘को’ किसी को हमेशा के लिए दान देने या उपकार करने के अर्थ में आता है (जैसे: ‘भिखारी को कम्बल दिए’ — कम्बल हमेशा के लिए दिए गए, वापस नहीं लिए जाएंगे, अतः संप्रदान कारक है)।

5. 50+ अमर वाक्यों में कारक की पहचान (Master Reference Table)

क्र. सं.परीक्षोपयोगी वाक्य (Sentence)प्रयुक्त कारकविभक्ति एवं निर्णायक कारण
1राम ने रावण को बाण से माराकर्ता, कर्म, करण‘ने’ (कर्ता), ‘को’ (कर्म), ‘से’ (करण साधन)
2पेड़ से फल गिराअपादान कारक‘से’ (पेड़ से फल का अलगाव)
3बालक गेंद से खेलता हैकरण कारक‘से’ (खेलने का साधन)
4राजा ने ब्राह्मण को गाय दीसंप्रदान कारक‘को’ (सदा के लिए दान का भाव)
5उसने धोबी को कपड़े दिएकर्म कारक‘को’ (कपड़े वापस लिए जाएंगे, दान नहीं)
6छत से बिल्ली कूद पड़ीअपादान कारक‘से’ (छत से बिल्ली का अलगाव)
7हिमालय से गंगा निकलती हैअपादान कारक‘से’ (उद्गम स्थल से अलगाव)
8राधा कुत्ते से डरती हैअपादान कारक‘से’ (भय के योग में अपादान)
9मोहन सोहन से अधिक चतुर हैअपादान कारक‘से’ (तुलना के योग में अपादान)
10शिष्य गुरुजी से संगीत सीखता हैअपादान कारक‘से’ (नियमपूर्वक विद्या सीखने में)
11मेज पर पुस्तक रखी हैअधिकरण कारक‘पर’ (क्रिया का स्थान व आधार)
12चिड़िया डाल पर बैठी हैअधिकरण कारक‘पर’ (स्थान का बोध)
13जल में कमल खिलते हैंअधिकरण कारक‘में’ (स्थान/आधार)
14वह गाड़ी से घर आयाकरण कारक‘से’ (यात्रा का साधन)
15माँ चाकू से सब्जी काटती हैकरण कारक‘से’ (काटने का औजार)
16मजदूर फावड़े से मिट्टी खोदता हैकरण कारक‘से’ (खुदाई का साधन)
17आँखों देखी घटना पर विश्वास करोकरण कारक‘देखी’ के साथ ‘से’ का लोप (आँखों से देखी)
18भूखे को अन्न दो, प्यासे को पानी दोसंप्रदान कारक‘को’ (दान व परोपकार का भाव)
19देश के लिए सैनिकों ने बलिदान दियासंप्रदान कारक‘के लिए’ (निस्वार्थ त्याग)
20राम का भाई लक्ष्मण वन गयासंबंध कारक‘का’ (पारिवारिक संबंध)
21यह मोहन का घर हैसंबंध कारक‘का’ (स्वामित्व का संबंध)
22सेना के जवान सीमा पर तैनात हैंसंबंध व अधिकरण‘के’ (संबंध), ‘पर’ (अधिकरण)
23हे प्रभु! आनंददाता ज्ञान हमको दीजिएसंबोधन कारक‘हे!’ (प्रार्थना व पुकारना)
24अरे भाई! तुम कब आए?संबोधन कारक‘अरे!’ (संबोधन)
25सूर्य पूर्व में उदय होता हैअधिकरण कारक‘में’ (दिशा/स्थान का आधार)
26परीक्षा अगले माह होगीअधिकरण कारक‘माह’ में ‘में’ लुप्त (शून्य विभक्ति)
27मोहन ने पत्र लिखाकर्ता कारक‘ने’ (सकर्मक भूतकाल)
28सोहन पतंग उड़ाता हैकर्ता व कर्मशून्य विभक्ति (सोहन कर्ता, पतंग कर्म)
29शिकारी ने शेर को गोली मारीकर्ता, कर्म, करणशिकारी (कर्ता), शेर (कर्म), गोली (करण)
30गंगा का जल पवित्र माना जाता हैसंबंध कारक‘का’ (जल का गंगा से संबंध)
31पेड़ पर घोंसला बना हैअधिकरण कारक‘पर’ (स्थान का आधार)
32नदी किनारे साधु की कुटिया हैअधिकरण व संबंधकिनारे (अधिकरण), साधु की (संबंध)
33सीता सखियों से लजाती हैअपादान कारक‘से’ (लज्जा के योग में)
34रेलगाड़ी प्लेटफार्म से छूट चुकी हैअपादान कारक‘से’ (स्थान से अलगाव)
35छात्र कक्षा में शांत बैठेंअधिकरण कारक‘में’ (स्थान)
36कृष्ण ने कंस को माराकर्ता व कर्मकृष्ण ने (कर्ता), कंस को (कर्म)
37गरीब को धन दोसंप्रदान कारक‘को’ (सहायता/दान)
38कलम से हस्ताक्षर करोकरण कारक‘से’ (माध्यम)
39मेरे सिर में दर्द हैअधिकरण कारक‘में’ (शारीरिक स्थान)
40पेड़ के पत्ते पीले पड़ गएसंबंध कारक‘के’ (पत्ते और पेड़ का संबंध)
41चोर पुलिस से डरकर भागाअपादान कारक‘से’ (डर का भाव)
42गुरु ने शिष्य को उपदेश दियाकर्ता व कर्मगुरु ने (कर्ता), शिष्य को (कर्म)
43स्वास्थ्य के लिए व्यायाम करोसंप्रदान कारक‘के लिए’ (उद्देश्य)
44हे भारत के वीरो! आगे बढ़ोसंबोधन कारक‘हे!’ (उद्बोधन)
45वह जन्म से अंधा हैकरण कारक‘से’ (अंग-विकार/लक्षण में करण)
46वह पैर से लंगड़ा हैकरण कारक‘से’ (अंग विकार – येनांगविकारः)
47पिताजी कार द्वारा कार्यालय गएकरण कारक‘द्वारा’ (साधन)
48कौआ डाल पर बैठा हैअधिकरण कारक‘पर’ (आधार)
49मेरा भाई सेना में कैप्टन हैसंबंध व अधिकरणमेरा (संबंध), सेना में (अधिकरण)
50अरे दुष्ट! यहाँ से भाग जासंबोधन व अपादानअरे (संबोधन), यहाँ से (अपादान)

6. विगत वर्षों की प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए 10 हल प्रश्न (Practice MCQs)

प्रश्न 1. “पेड़ से बंदर कूदा” वाक्य में कौन सा कारक है? (UP Police SI 2021)

(A) करण कारक
(B) कर्म कारक
(C) अपादान कारक
(D) संप्रदान कारक
उत्तर: (C) अपादान कारक
व्याख्या: यहाँ बंदर का पेड़ से अलग होने (अलगाव) का बोध हो रहा है। अलगाव के अर्थ में ‘से’ विभक्ति अपादान कारक की होती है।

प्रश्न 2. “राजा सेवक को कम्बल देता है” वाक्य में रेखांकित पद में कौन सा कारक है? (UPSC CSAT / RO-ARO)

(A) कर्म कारक
(B) संबंध कारक
(C) संप्रदान कारक
(D) कर्ता कारक
उत्तर: (C) संप्रदान कारक
व्याख्या: जब किसी को कोई वस्तु सदा के लिए (दान स्वरूप) दी जाती है, तो जिसे वस्तु दी जाए उसमें संप्रदान कारक होता है।

प्रश्न 3. “वह कुल्हाड़ी से वृक्ष काटता है” वाक्य में ‘कुल्हाड़ी से’ में कारक है: (UP Constable)

(A) अपादान कारक
(B) करण कारक
(C) कर्म कारक
(D) अधिकरण कारक
उत्तर: (B) करण कारक
व्याख्या: यहाँ कुल्हाड़ी वृक्ष काटने का औजार (साधन) है। क्रिया के साधन में करण कारक होता है।

प्रश्न 4. “हे राम! तुम कहाँ हो?” वाक्य में कौन सा कारक है? (CTET)

(A) संबंध
(B) अधिकरण
(C) संबोधन
(D) अपादान
उत्तर: (C) संबोधन
व्याख्या: यहाँ ‘हे राम!’ द्वारा पुकारने का भाव व्यक्त हो रहा है तथा विस्मयादिबोधक चिह्न लगा है, अतः संबोधन कारक है।

प्रश्न 5. “चिड़िया पेड़ की डाल पर बैठी है” वाक्य में कौन सा कारक है? (UP TGT Hindi)

(A) करण कारक
(B) अपादान कारक
(C) अधिकरण कारक
(D) कर्म कारक
उत्तर: (C) अधिकरण कारक
व्याख्या: ‘डाल पर’ क्रिया के बैठने के स्थान और आधार को दर्शाता है। आधार में अधिकरण कारक होता है।

प्रश्न 6. “सीता गीता से अधिक सुंदर है” वाक्य में कौन सा कारक है? (BPSC शिक्षक भर्ती)

(A) करण कारक
(B) अपादान कारक
(C) संबंध कारक
(D) कर्म कारक
उत्तर: (B) अपादान कारक
व्याख्या: संस्कृत और हिंदी व्याकरण के नियमानुसार जब दो व्यक्तियों या वस्तुओं के बीच तुलना की जाती है, तो जिससे तुलना की जाए उसमें अपादान कारक होता है।

प्रश्न 7. “उसने लड़के को पीटा” वाक्य में ‘लड़के को’ में कौन सा कारक है? (DSSSB PRT)

(A) कर्ता कारक
(B) संप्रदान कारक
(C) कर्म कारक
(D) करण कारक
उत्तर: (C) कर्म कारक
व्याख्या: पीटने की क्रिया का फल ‘लड़के’ पर पड़ रहा है। सजीव कर्म के साथ ‘को’ विभक्ति लगती है, अतः कर्म कारक है।

प्रश्न 8. “वह पैर से लंगड़ा है” वाक्य में ‘पैर से’ में कौन सा कारक है? (UPPSC Staff Nurse / RO)

(A) अपादान कारक
(B) करण कारक
(C) अधिकरण कारक
(D) कर्म कारक
उत्तर: (B) करण कारक
व्याख्या: संस्कृत सूत्र ‘येनांगविकारः’ के अनुसार शरीर के जिस अंग में विकार या दोष परिलक्षित होता है, उस अंगवाचक शब्द में तृतीया विभक्ति (करण कारक) होती है।

प्रश्न 9. कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए: (UPSC Pattern)

  • कथन (A): सकर्मक क्रिया के भूतकाल में कर्ता के साथ ‘ने’ विभक्ति का प्रयोग अनिवार्य होता है।
  • कारण (R): अकर्मक क्रियाओं में भूतकाल होने पर भी कर्ता के साथ ‘ने’ नहीं लगता।
    (A) (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
    (B) (A) और (R) दोनों सही हैं किन्तु (R), (A) सही व्याख्या नहीं है।
    (C) (A) सही है परन्तु (R) गलत है।
    (D) (A) गलत है परन्तु (R) सही है।
    उत्तर: (A) (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
    व्याख्या: जैसे ‘राम ने रोटी खाई’ (सकर्मक – ‘ने’ लगा), लेकिन ‘राम हँसा’ (अकर्मक – ‘ने’ नहीं लगा)।

प्रश्न 10. “रमेश कल दिल्ली से लौटा” वाक्य में कौन सा कारक है? (REET)

(A) करण कारक
(B) अपादान कारक
(C) अधिकरण कारक
(D) कर्म कारक
उत्तर: (B) अपादान कारक
व्याख्या: दिल्ली से लौटने पर दिल्ली के स्थान से पृथकता (अलगाव) का बोध हो रहा है, अतः अपादान कारक है।

7. सामान्य हिंदी व्याकरण हेतु अनुशंसित प्रामाणिक पुस्तकें (Recommended Books)

प्रतियोगी परीक्षाओं (UP Police, TGT/PGT, RO/ARO, BPSC, CTET) की संपूर्ण तैयारी हेतु अभ्यर्थी निम्नलिखित मानक प्रामाणिक पुस्तकों का अध्ययन कर सकते हैं:

पुस्तक का नाम (Book Title)लेखक / प्रकाशन (Author / Publication)परीक्षा उपयोगिता (Exam Relevance)आधिकारिक लिंक (Purchase Link)
आधुनिक हिंदी व्याकरण और रचनाडॉ. वासुदेवनंदन प्रसाद (भारती भवन)सिविल सेवा (UPSC/UPPSC) एवं टीजीटी/पीजीटी का मानक प्रामाणिक ग्रंथ👉 अमेज़न पर देखें (Check on Amazon)
सामान्य हिंदीडॉ. हरदेव बाहरी (वाणी प्रकाशन)शब्द सामर्थ्य, व्याकरण नियमों एवं प्रशासनिक शब्दावली का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ👉 अमेज़न पर देखें (Check on Amazon)
वस्तुनिष्ठ सामान्य हिंदीआदित्य पब्लिकेशन, प्रयागराजUP Police, RO/ARO एवं यूपीएसएससी के विगत वर्षों के हल प्रश्न👉 अमेज़न पर देखें (Check on Amazon)
ल्यूसेंट सामान्य हिंदीसंजीव कुमार (Lucent Publications)प्रतियोगी परीक्षाओं के त्वरित रिवीजन एवं 5000+ वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का संग्रह👉 अमेज़न पर देखें (Check on Amazon)

सांविधिक प्रकटीकरण (Statutory Affiliate Disclosure): शिक्षातक सहभागी विपणन (Affiliate Marketing) कार्यक्रमों का सदस्य है। ऊपर दिए गए अमेज़न लिंक्स के माध्यम से पुस्तकें क्रय करने पर हमें न्यूनतम कमीशन प्राप्त हो सकता है, जिससे हमारे पोर्टल पर विद्यार्थियों हेतु निःशुल्क शैक्षणिक अध्ययन सामग्री का संचालन निर्बाध रूप से संभव होता है। इससे पाठक के खरीद मूल्य पर कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ता है।

8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1. हिंदी में कुल कितने कारक होते हैं?

उत्तर: हिंदी व्याकरण में कुल 8 कारक माने गए हैं — कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण और संबोधन। (संस्कृत में संबोधन और संबंध को क्रिया से सीधा संबंध न होने के कारण मूल 6 कारक ही माना जाता है)।

प्रश्न 2. परसर्ग किसे कहते हैं?

उत्तर: कारक के संबंधों को दर्शाने वाले चिन्हों (जैसे ने, को, से, के लिए आदि) को हिंदी व्याकरण में ‘परसर्ग’ या ‘विभक्ति चिन्ह’ कहते हैं। ये संज्ञा शब्दों के बाद अलग और सर्वनाम शब्दों के साथ मिलाकर लिखे जाते हैं।

प्रश्न 3. करण और अपादान कारक में अंतर कैसे स्पष्ट करें?

उत्तर: दोनों का चिन्ह ‘से’ है, लेकिन करण कारक में ‘से’ साधन या सहायता के रूप में प्रयुक्त होता है (जैसे कलम से लिखना), जबकि अपादान कारक में ‘से’ अलग होने, डरने, लजाने या तुलना के भाव में प्रयुक्त होता है (जैसे पेड़ से गिरना, कुत्ते से डरना)।

📌 संपादकीय परामर्श एवं प्रामाणिक संदर्भ (Editorial Disclaimer):
शिक्षातक (sikshatak.com) की संपादकीय टीम द्वारा इस आलेख को तैयार करते समय आधिकारिक स्रोतों, सरकारी गजट, आयोग की मूल अधिसूचनाओं एवं मानक पाठ्यपुस्तकों के आधार पर पूर्णतः सटीक एवं त्रुटिरहित रखने की पूरी सावधानी बरती गई है। तथापि, किसी भी मानवीय भूल, तकनीकी विसंगति अथवा नीतिगत बदलाव की स्थिति में विद्यार्थियों व अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने संबंधित बोर्ड की अधिकृत पाठ्यपुस्तक (NCERT / राज्य बोर्ड), आयोग के आधिकारिक पोर्टल अथवा मूल दस्तावेज़ से विवरण का मिलान अवश्य कर लें। किसी भी संशय या प्रश्न के समाधान हेतु पाठक नीचे टिप्पणी (कमेंट) बॉक्स में अपना प्रश्न पूछ सकते हैं। शिक्षातक सदैव आपकी उज्ज्वल शैक्षणिक सफलता हेतु प्रतिबद्ध है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

    💬 सवाल, शंका या सुझाव?

    🔒 आपका ईमेल सुरक्षित रहेगा और प्रकाशित नहीं किया जाएगा।