हिंदी व्याकरण में ‘समास’ से जुड़े प्रश्न हर प्रतियोगी परीक्षा (जैसे UP TET, CTET, SSC GD, RO/ARO, Police Exams) में पूछे जाते हैं। छात्रों को सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन जिस शब्द में होता है, वह है— पीतांबर। अक्सर यह सवाल उठता है कि पीतांबर में कौन सा समास है (Pitambar Mein Kaun Sa Samas Hai)? इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि पीतांबर का सही समास क्या है, इसका समास विग्रह कैसे किया जाता है और परीक्षा में सही विकल्प कैसे चुनें।
पीतांबर में कौन सा समास है? (Pitambar Mein Samas)
हिंदी व्याकरण के नियमानुसार, ‘पीतांबर’ शब्द में ‘बहुव्रीहि समास’ (Bahuvrihi Samas) और ‘कर्मधारय समास’ (Karmadharay Samas) दोनों हो सकते हैं। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि वाक्य में इसका प्रयोग कैसे हुआ है और इसका समास विग्रह कैसे किया गया है।
आइए दोनों स्थितियों को विस्तार से समझते हैं:
स्थिति 1: बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas)
जब ‘पीतांबर’ का प्रयोग किसी विशेष व्यक्ति (भगवान) के लिए किया जाता है, तो वहाँ बहुव्रीहि समास होता है।
- समास विग्रह: पीत (पीला) है अंबर (वस्त्र) जिसका अर्थात् ‘भगवान विष्णु’ या ‘श्रीकृष्ण’।
- नियम: यहाँ दोनों पद प्रधान न होकर किसी तीसरे (विष्णु जी) की ओर संकेत कर रहे हैं।
स्थिति 2: कर्मधारय समास (Karmadharay Samas)
जब ‘पीतांबर’ का प्रयोग केवल ‘पीले वस्त्र’ की विशेषता बताने के लिए किया जाए, तो वहाँ कर्मधारय समास होता है।
- समास विग्रह: पीत (पीला) है जो अंबर (वस्त्र)।
- नियम: यहाँ ‘पीत’ विशेषण है और ‘अंबर’ विशेष्य है।
🔥 Exam Trick (परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण टिप्स): > यदि परीक्षा में प्रश्न आता है कि “पीतांबर में कौन सा समास है?” और विकल्पों में ‘बहुव्रीहि’ और ‘कर्मधारय’ दोनों दिए गए हों, तो आपको हमेशा ‘बहुव्रीहि समास’ पर ही टिक करना चाहिए। मानक हिंदी व्याकरण में इसे बहुव्रीहि का ही मुख्य उदाहरण माना जाता है।
बहुव्रीहि समास के अन्य महत्वपूर्ण उदाहरण (Table)
पीतांबर की तरह ही अन्य कई सामासिक शब्द हैं जो परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं:
| सामासिक शब्द (समस्त पद) | समास विग्रह | अर्थ (तीसरा पद) |
| नीलकंठ | नीला है कंठ जिसका | अर्थात् भगवान शिव |
| लंबोदर | लंबा है उदर (पेट) जिसका | अर्थात् भगवान गणेश |
| दशानन | दस हैं आनन (मुख) जिसके | अर्थात् रावण |
| चक्रपाणि | चक्र है पाणि (हाथ) में जिसके | अर्थात् भगवान विष्णु |
| गजानन | गज के समान आनन (मुख) है जिसका | अर्थात् भगवान गणेश |
| वीणापाणि | वीणा है पाणि (हाथ) में जिसके | अर्थात् माता सरस्वती |
समास के कितने भेद होते हैं? (Types of Samas)
हिंदी व्याकरण में समास के मुख्य 6 भेद माने गए हैं:
- अव्ययीभाव समास (Avyayibhav Samas)
- तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas)
- कर्मधारय समास (Karmadharay Samas)
- द्विगु समास (Dwigu Samas)
- द्वंद्व समास (Dwandwa Samas)
- बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: बहुव्रीहि के अनुसार ‘पीत है अंबर जिसका (विष्णु)’ और कर्मधारय के अनुसार ‘पीत है जो अंबर’।
उत्तर: यदि विकल्प में बहुव्रीहि समास नहीं दिया गया है, तब आपको ‘कर्मधारय समास’ को सही उत्तर मानना है।
उत्तर: नीलकंठ में भी पीतांबर की तरह मुख्य रूप से ‘बहुव्रीहि समास’ होता है (नीला है कंठ जिसका अर्थात् शिव)।
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आशा है कि इस लेख के माध्यम से आपका Pitambar Mein Kaun Sa Samas Hai से जुड़ा सारा कन्फ्यूजन दूर हो गया होगा। अपनी हिंदी व्याकरण की तैयारी को और अधिक मजबूत बनाने के लिए Sikshatak.com के अन्य व्याकरण संबंधित लेख अवश्य पढ़ें।

