APJ Abdul Kalam Essay in Hindi: डॉ. कलाम और विश्व छात्र दिवस पर निबंध (10 Lines, 250, 500 व 1000 शब्द)

APJ Abdul Kalam Essay in Hindi: डॉ. कलाम और विश्व छात्र दिवस पर निबंध (10 Lines, 250, 500 व 1000 शब्द)

क्या एक अखबार बेचने वाला बालक देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुँच सकता है? डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन इस असंभव प्रतीत होने वाले प्रश्न का सबसे जीवंत और प्रेरणादायी उत्तर है। 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्मे डॉ. अवुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम ने न केवल भारत को परमाणु और मिसाइल शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाया, बल्कि करोड़ों युवाओं की सोच को असीम उड़ान दी। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा उनकी जयंती को प्रतिवर्ष 15 अक्टूबर को ‘विश्व छात्र दिवस’ (World Students’ Day) के रूप में घोषित करना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वे केवल एक वैज्ञानिक या राष्ट्रपति नहीं, बल्कि शाश्वत शिक्षक थे।

शिक्षातक (sikshatak.com) के इस विशेष आलेख में कक्षा 1 से 5 के लिए 10 पंक्तियां, कक्षा 6 से 8 के लिए 250 शब्दों का लघु निबंध, माध्यमिक कक्षाओं के लिए 500 शब्दों का मानक निबंध तथा बोर्ड व निबंध प्रतियोगिताओं के लिए 1000 शब्दों का विस्तृत निबंध प्रस्तुत किया गया है।

Table of Contents

📌 डॉ. कलाम से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

विवरणमहत्वपूर्ण जानकारीपरीक्षा महत्व
पूरा नामडॉ. अवुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलामसामान्य ज्ञान एवं बोर्ड परीक्षा संदर्भ
जन्म तिथि एवं स्थान15 अक्टूबर 1931, धनुषकोडी (रामेश्वरम, तमिलनाडु)विश्व छात्र दिवस का आधार
लोकप्रिय उपाधियांमिसाइल मैन ऑफ इंडिया, पीपल्स प्रेसिडेंट (जनता के राष्ट्रपति)प्रेरणादायी राष्ट्रीय पहचान
मुख्य वैज्ञानिक योगदानSLV-3, अग्नि एवं पृथ्वी मिसाइलें, पोखरण-2 परमाणु परीक्षणरक्षा एवं अंतरिक्ष आत्मनिर्भरता
भारत के 11वें राष्ट्रपति25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तकसंवैधानिक गरिमा व सादगी का प्रतीक
सर्वोच्च नागरिक सम्मानभारत रत्न (1997), पद्म विभूषण (1990), पद्म भूषण (1981)राष्ट्रीय कृतज्ञता
पुण्यतिथि एवं स्थान27 जुलाई 2015, आईआईएम शिलांग (मेघालय)छात्रों को संबोधित करते हुए अंतिम सांस

📝 डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पर 10 पंक्तियां (10 Lines on APJ Abdul Kalam for Class 1 to 5)

प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 5) के छोटे बच्चों के लिए स्कूल की प्रार्थना सभा और कक्षा गतिविधियों हेतु 10 सरल पंक्तियां:

  1. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भारत के 11वें राष्ट्रपति और एक महान वैज्ञानिक थे।
  2. उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण परिवार में हुआ था।
  3. बचपन में वे अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए सुबह घर-घर अखबार बांटते थे।
  4. उन्होंने भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-3) के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाई।
  5. भारत के लिए ‘अग्नि’ और ‘पृथ्वी’ जैसी शक्तिशाली मिसाइलें बनाने के कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है।
  6. वे वर्ष 2002 से 2007 तक भारत के राष्ट्रपति रहे और अपनी सादगी के कारण ‘जनता के राष्ट्रपति’ कहलाए।
  7. उन्हें वर्ष 1997 में देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
  8. डॉ. कलाम को बच्चों और विद्यार्थियों से बात करना और उन्हें पढ़ाना सबसे अधिक प्रिय था।
  9. उनके जन्मदिन 15 अक्टूबर को पूरे विश्व में ‘विश्व छात्र दिवस’ (World Students’ Day) के रूप में मनाया जाता है।
  10. 27 जुलाई 2015 को आईआईएम शिलांग में छात्रों को पढ़ाते समय उनका देहांत हुआ; उनका जीवन हमें बड़े सपने देखने की सीख देता है।

📖 डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पर संक्षिप्त निबंध (250 Words – कक्षा 6 से 8 हेतु)

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भारत के उन विरले महापुरुषों में से हैं, जिन्होंने अभावों को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम में हुआ था। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया। भौतिकी और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे डीआरडीओ (DRDO) और फिर इसरो (ISRO) से जुड़े।

वैज्ञानिक के रूप में डॉ. कलाम ने भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान और रक्षा कार्यक्रम को विश्व स्तरीय पहचान दिलाई। उन्होंने देश के पहले उपग्रह प्रक्षेपण यान SLV-3 परियोजना का सफल नेतृत्व किया और रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया। इसके पश्चात उन्होंने स्वदेशी मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) के तहत अग्नि, पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश और नाग मिसाइलों का सफल निर्माण कर भारत को अभेद्य सुरक्षा कवच दिया। वर्ष 1998 में पोखरण-2 परमाणु परीक्षण के वे प्रमुख रणनीतिकार थे।

वर्ष 2002 में वे सर्वसम्मति से भारत के 11वें राष्ट्रपति चुने गए। राष्ट्रपति भवन में रहते हुए भी उनकी सादगी अडिग रही। उन्होंने कभी वीआईपी संस्कृति को बढ़ावा नहीं दिया और सदैव विद्यार्थियों से संवाद किया। उनका मानना था कि सपना वह नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, बल्कि सपना वह है जो हमें सोने नहीं देता। यदि आप परीक्षा में समय प्रबंधन सीखना चाहते हैं, तो Daily Study Timetable for Students की मदद ले सकते हैं। डॉ. कलाम का संपूर्ण जीवन अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और कठिन परिश्रम का अद्वितीय पाठ है।

🎓 डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पर मध्यम निबंध (500 Words – कक्षा 9 से 12 व बोर्ड परीक्षा)

प्रस्तावना

‘मिसाइल मैन’ और ‘पीपल्स प्रेसिडेंट’ के रूप में विख्यात डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आधुनिक भारत के सच्चे मार्गदर्शक रहे हैं। एक छोटे से द्वीप रामेश्वरम से राष्ट्रपति भवन तक की उनकी यात्रा इस बात का साक्षात प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और निष्ठा अटूट, तो परिस्थितियां कभी प्रगति की राह में बाधा नहीं बन सकतीं।

प्रारंभिक जीवन और कठोर संघर्ष

15 अक्टूबर 1931 को एक नाव मालिक के घर जन्मे कलाम का बचपन आर्थिक तंगियों से भरा था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौर में जब परिवार पर आर्थिक संकट गहराया, तो बालक कलाम ने सुबह रेलवे स्टेशन से अखबार लाकर रामेश्वरम की गलियों में बांटना शुरू किया ताकि अपनी स्कूल फीस भर सकें। श्वार्ट्ज हायर सेकेंडरी स्कूल, रामनाथपुरम से स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से भौतिकी में स्नातक और मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

वैज्ञानिक उपलब्धियां और मिसाइल मैन का गौरव

डीआरडीओ से अपने करियर की शुरुआत करने वाले डॉ. कलाम जल्द ही इसरो में शामिल हुए। वर्ष 1980 में उनके नेतृत्व में SLV-3 के सफल प्रक्षेपण ने भारत को अंतरिक्ष क्लब के चुनिंदा देशों में शामिल कर दिया। 1980 के दशक में उन्होंने समन्वित निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (IGMDP) की नींव रखी। अग्नि और पृथ्वी जैसी सामरिक मिसाइलों के निर्माण ने दुनिया को भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा का लोहा मनवाया। 11 और 13 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में हुए सफल परमाणु परीक्षणों (ऑपरेशन शक्ति) में उनकी वैज्ञानिक और रणनीतिक भूमिका अविस्मरणीय है।

राष्ट्रपति पद और जनता का स्नेह

25 जुलाई 2002 को जब उन्होंने भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली, तो राष्ट्रपति भवन जनसाधारण के लिए खुल गया। वे देश के पहले राष्ट्रपति थे, जिन्होंने लाखों स्कूली बच्चों और युवाओं से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनके विचार सुने। उन्होंने ‘इंडिया 2020: अ विजन फॉर द न्यू मिलेनियम’ के माध्यम से भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का रोडमैप प्रस्तुत किया।

विश्व छात्र दिवस और अमर संदेश

संयुक्त राष्ट्र ने उनके शिक्षा के प्रति समर्पण को सम्मानित करते हुए 15 अक्टूबर को ‘विश्व छात्र दिवस’ घोषित किया। 27 जुलाई 2015 को शिलांग में विद्यार्थियों को व्याख्यान देते समय दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ। डॉ. कलाम हमें सिखाते हैं कि कठिनाइयां मनुष्य को नष्ट करने नहीं आतीं, बल्कि उसके भीतर छिपे सामर्थ्य को जगाने आती हैं। उनके विस्तृत जीवन दर्शन के लिए APJ Abdul Kalam Biography in Hindi का अध्ययन करें।

🏛️ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पर विस्तृत निबंध (1000 Words – प्रतियोगी परीक्षा व कॉलेज स्पेशल)

1. पृष्ठभूमि और दार्शनिक आधार

इतिहास उन लोगों को याद नहीं रखता जो केवल सुविधाओं के बीच बड़े हुए, बल्कि उन्हें अमर बनाता है जिन्होंने अभावों की राख से उठकर राष्ट्र के भाग्य को नई दिशा दी। डॉ. अवुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम का जीवन दर्शन भारतीय मेधा, अदम्य साहस और आध्यात्मिक सहिष्णुता का जीवंत त्रिवेणी संगम है। दक्षिण भारत के रामेश्वरम के एक तमिल मुस्लिम परिवार में जन्मे कलाम ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि ज्ञान किसी जाति, धर्म या आर्थिक पृष्ठभूमि की मोहताज नहीं होती। उनके पिता जैनुलाब्दीन एक सीधे-सादे नाव चालक और स्थानीय मस्जिद के इमाम थे, जबकि उनकी माता अशिअम्मा एक स्नेहमयी गृहणी थीं। परिवार में साम्प्रदायिक सद्भाव का ऐसा माहौल था कि रामेश्वरम मंदिर के मुख्य पुजारी पक्षी लक्ष्मण शास्त्री उनके पिता के घनिष्ठ मित्र थे। इस परिवेश ने कलाम को सर्वधर्म समभाव और गहन मानवीय मूल्यों का संबल दिया।

2. प्रारंभिक संघर्ष: अभावों से अंतरिक्ष तक की उड़ान

कलाम की आरंभिक शिक्षा रामेश्वरम के प्राथमिक विद्यालय में हुई। बचपन में धनोपार्जन हेतु सुबह समाचार पत्र बांटना, शाम को दीये की रोशनी में पढ़ना और गणित के कठिन सूत्रों को हल करना उनकी दिनचर्या थी। मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में अध्ययन के दौरान जब एक प्रोजेक्ट डिजाइन समय पर पूरा न होने पर उनके प्रोफेसर ने उनकी छात्रवृत्ति रद्द करने की चेतावनी दी, तो कलाम ने लगातार 72 घंटे बिना सोए काम किया और अपने असाधारण डिजाइन से प्रोफेसर को चकित कर दिया।

इंजीनियरिंग के उपरांत वे भारतीय वायुसेना (IAF) में फाइटर पायलट बनना चाहते थे। वे साक्षात्कार में 9वें स्थान पर आए, जबकि चयन केवल 8 पदों पर होना था। इस असफलता से वे टूट गए और ऋषिकेश जाकर स्वामी शिवानंद से मिले। स्वामी जी ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा—”इस विफलता को नियति का संकेत समझो; ईश्वर तुम्हारे माध्यम से कुछ और बड़ा करवाना चाहता है।” कलाम ने इसे स्वीकार किया और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में एक वैज्ञानिक के रूप में कार्यभार संभाला।

3. इसरो और डीआरडीओ: भारत की सामरिक संप्रभुता के निर्माता

1969 में कलाम का स्थानांतरण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में हुआ। यहाँ उन्हें भारत के प्रथम स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-3) का परियोजना निदेशक (Project Director) नियुक्त किया गया। 1979 में SLV-3 का पहला परीक्षण विफल होकर बंगाल की खाड़ी में जा गिरा। तब इसरो के तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. सतीश धवन ने विफलता की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ली। एक वर्ष बाद, 18 जुलाई 1980 को जब SLV-3 ने रोहिणी उपग्रह को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया, तो सतीश धवन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का माइक कलाम के हाथों में सौंप दिया। इस घटना ने कलाम को नेतृत्व (Leadership) का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाया: विफलता की जिम्मेदारी खुद लेना और सफलता का श्रेय अपनी टीम को देना।

1982 में वे पुनः डीआरडीओ लौटे और इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) के मुख्य वास्तुकार बने। उनके नेतृत्व में पांच स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों का सफल विकास हुआ:

  1. पृथ्वी (Prithvi): सतह से सतह पर मार करने वाली कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल।
  2. अग्नि (Agni): रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता वाली मध्यम से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल।
  3. त्रिशूल (Trishul): त्वरित प्रतिक्रिया वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल।
  4. आकाश (Akash): मध्यम दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली।
  5. नाग (Nag): तीसरी पीढ़ी की ‘दागो और भूल जाओ’ (Fire and Forget) एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल।

1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री काल में पोखरण-2 परमाणु परीक्षणों में डॉ. कलाम और डॉ. आर. चिदंबरम की जोड़ी ने अमेरिकी जासूसी उपग्रहों को चकमा देकर भारत को परमाणु संपन्न राष्ट्र घोषित कराया। इसी योगदान के कारण उन्हें 1997 में राष्ट्र के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से विभूषित किया गया।

4. राष्ट्रपति काल: लोकतंत्र का मानवीय और नैतिक चेहरा

2002 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी दलों के अभूतपूर्व समर्थन से डॉ. कलाम देश के 11वें राष्ट्रपति चुने गए। उन्होंने राष्ट्रपति भवन को सत्ता के अभिजात्य केंद्र से बदलकर जनसंवाद का खुला मंच बना दिया।

  • सादगी का प्रतिमान: अपने 5 वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने राष्ट्रपति भवन में आने वाले अपने परिजनों के समस्त खर्चों का भुगतान अपने व्यक्तिगत बैंक खाते से किया। विदाई के समय उनके सामान में केवल दो सूटकेस, कुछ जोड़ी कपड़े, किताबें और एक वीणा थी।
  • अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह के साथ समन्वय: उन्होंने संवैधानिक दायरे में रहकर भी जनहित के मुद्दों पर स्वतंत्र परामर्श दिया। जब लाभ के पद (Office of Profit) का विधेयक संसद से आया, तो उन्होंने बिना संकोच पुनर्विचार हेतु लौटाया।
  • विजन 2020 और पूरा (PURA) मॉडल: उन्होंने ‘Provision of Urban Amenities to Rural Areas’ (PURA) की संकल्पना पेश की, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी स्तर की शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी पहुंचाना था।

5. विश्व छात्र दिवस (15 अक्टूबर) का वैश्विक महत्व

डॉ. कलाम का दृढ़ विश्वास था कि “राष्ट्र का सबसे बड़ा प्राकृतिक संसाधन उसकी युवा पीढ़ी है।” वे अक्सर कहते थे कि एक शिक्षक के रूप में याद किया जाना उनके लिए किसी भी पद से बड़ा सम्मान है। उनके इसी शाश्वत समर्पण को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 2010 में उनके जन्मदिन 15 अक्टूबर को ‘विश्व छात्र दिवस’ के रूप में मान्यता दी। विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में इस दिन विशेष भाषण और निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं। स्कूल प्रार्थना सभा में भाषण प्रस्तुति के लिए हमारे विशेष लेख World Students Day Speech in Hindi को अवश्य पढ़ें।

6. जीवन का अंतिम क्षण और शाश्वत प्रेरणा

27 जुलाई 2015 को मेघालय की राजधानी शिलांग में आईआईएम के छात्रों को ‘लिवेएबल प्लैनेट’ (रहने योग्य पृथ्वी) विषय पर व्याख्यान देते समय वे अचानक गिर पड़े और उनका देहावसान हो गया। कर्मयोगी की तरह वे अपने अंतिम क्षण तक शिक्षण कार्य में ही लीन रहे। उनका संपूर्ण जीवन हमें सिखाता है कि जब तक हमारे पास आत्मविश्वास, अटूट इच्छाशक्ति और राष्ट्रसेवा का भाव है, तब तक कोई भी बाधा हमारे कदम नहीं रोक सकती।

💡 निबंध लिखते समय इन बातों का ध्यान रखें

प्रतियोगी परीक्षा और बोर्ड निबंध में 100% अंक सुनिश्चित करने के लिए शिक्षातक (sikshatak.com) के संपादकीय सुझाव:

  • कोट्स से शुरुआत व अंत करें: निबंध की शुरुआत कलाम जी के प्रेरक विचार जैसे “सूरज की तरह चमकना है तो पहले सूरज की तरह जलना सीखो” से करें।
  • उपशीर्षकों (Sub-headings) का प्रयोग: निबंध को पैराग्राफ के बजाय स्पष्ट शीर्षकों में विभाजित करें।
  • मिसाइलों और उपग्रहों के सही नाम: SLV-3, रोहिणी, अग्नि और पृथ्वी के नामों को रेखांकित (Underline/Bold) करें।
  • शब्द सीमा का ध्यान रखें: जिस कक्षा के लिए निबंध लिख रहे हैं, उसी निर्धारित शब्द सीमा का पालन करें। अन्य राष्ट्रीय नायकों के जीवन दर्शन के लिए Kalpana Chawla Biography in Hindi और Bhagat Singh Biography in Hindi पढ़ें।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर: डॉ. कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम शहर में धनुषकोडी के निकट हुआ था।

Q2: 15 अक्टूबर को विश्व छात्र दिवस क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: डॉ. कलाम के विद्यार्थियों के प्रति अगाध प्रेम और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को सम्मानित करने हेतु संयुक्त राष्ट्र द्वारा 15 अक्टूबर को विश्व छात्र दिवस घोषित किया गया।

Q3: डॉ. कलाम को ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर: भारत के स्वदेशी मिसाइल कार्यक्रम (IGMDP) के तहत अग्नि, पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश और नाग जैसी शक्तिशाली मिसाइलों के सफल विकास का नेतृत्व करने के कारण उन्हें यह उपाधि दी गई।

Q4: डॉ. कलाम भारत के राष्ट्रपति कब बने थे?
उत्तर: वे 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे।

Q5: डॉ. कलाम को भारत रत्न किस वर्ष मिला था?
उत्तर: उन्हें विज्ञान, रक्षा और राष्ट्रसेवा में ऐतिहासिक योगदान के लिए वर्ष 1997 में ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था।

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📌 छात्र परामर्श एवं अस्वीकरण (Student Advisory)

यह निबंध संकलन भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल्स, राष्ट्रपति भवन अभिलेखागार और प्रामाणिक ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर तैयार किया गया है। विद्यालयी छात्र अपनी परीक्षा अथवा प्रतियोगिता की समय-सीमा एवं शब्द-सीमा के अनुरूप उपयुक्त खंड का चयन करें। शिक्षातक (sikshatak.com) छात्रों के सर्वांगीण बौद्धिक विकास के प्रति समर्पित है।

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