Lohri Essay in Hindi: भारत एक कृषि प्रधान देश है, और यहाँ फसलों की कटाई से जुड़े कई त्यौहार मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख त्यौहार है— लोहड़ी (Lohri)।
यह मुख्य रूप से पंजाब और उत्तर भारत का त्यौहार है, लेकिन अब इसे पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले, यानी 13 जनवरी की रात को लोहड़ी मनाई जाती है।
आज के इस लेख में हम छात्रों के लिए लोहड़ी पर निबंध (Lohri Par Nibandh) और इसका इतिहास सरल भाषा में बता रहे हैं।
लोहड़ी पर विस्तृत निबंध (Long Essay – 500 शब्द)
(यह निबंध कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए है)
प्रस्तावना (Introduction)
लोहड़ी खुशियों, उमंग और नई फसल का त्यौहार है। यह त्यौहार कड़ाके की सर्दी के जाने और बसंत ऋतु के आने का संकेत देता है। पंजाबियों के लिए लोहड़ी सिर्फ एक त्यौहार नहीं, बल्कि एक भावना है। इस दिन शाम को लोग आग (अलाव) जलाते हैं और उसके चारों ओर नाचते-गाते हैं।
लोहड़ी क्यों मनाई जाती है? (इतिहास और दुल्ला भट्टी)
लोहड़ी से जुड़ी कई कथाएं हैं, लेकिन सबसे प्रसिद्ध कहानी ‘दुल्ला भट्टी’ की है।
मुगल काल में दुल्ला भट्टी नाम का एक व्यक्ति था, जो पंजाब का ‘रोबिन हुड’ कहलाता था। वह अमीरों को लूटता था और गरीबों की मदद करता था। एक बार उसने दो गरीब अनाथ लड़कियों (सुंदरी और मुंदरी) को दुष्टों से बचाया और उनकी शादी करवाई। उसने खुद उन लड़कियों का कन्यादान किया और शगुन के तौर पर उनकी झोली में शक्कर (चीनी) डाली।
इसी याद में लोहड़ी पर गाया जाने वाला प्रसिद्ध लोकगीत है:
“सुंदर मुंदरिये… हो! तेरा कौन विचारा… हो! दुल्ला भट्टी वाला… हो!”
मनाने का तरीका (Celebration)
लोहड़ी की तैयारी कई दिन पहले से शुरू हो जाती है। बच्चे घर-घर जाकर लोहड़ी मांगते हैं और गाते हैं।
13 जनवरी की शाम को खुली जगह पर लकड़ियां इकठ्ठा करके ‘अलाव’ (Bonfire) जलाया जाता है। लोग आग के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और उसमें तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली और मक्का (Popcorn) डालते हैं। इसे ‘तिल-चौली’ कहा जाता है। आग को नमन करके लोग अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
किसानों के लिए महत्व
किसानों के लिए लोहड़ी का विशेष महत्व है। इस समय खेतों में रबी की फसल (जैसे गेहूँ और सरसों) लहलहाने लगती है। किसान ईश्वर को अच्छी फसल के लिए धन्यवाद देते हैं और अगली फसल की कटाई की तैयारी करते हैं।
नवविवाहित जोड़े और नवजात शिशु के लिए
जिस घर में नई शादी हुई हो या बच्चे का जन्म हुआ हो, वहां पहली लोहड़ी बहुत धूमधाम से मनाई जाती है। मेहमानों को दावत दी जाती है और ढोल-नगाड़ों पर भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
लोहड़ी भाईचारे और प्रेम का प्रतीक है। यह त्यौहार हमें सिखाता है कि जिस तरह आग सर्दी को दूर भगा देती है, उसी तरह हमें भी अपने मन से नफरत को निकालकर प्रेम की ज्योत जलानी चाहिए। तिल और गुड़ की तरह हमारे रिश्तों में भी मिठास बनी रहनी चाहिए।
लोहड़ी पर छोटा निबंध (Short Essay – 250 शब्द)
(यह निबंध कक्षा 4 से 8 तक के छात्रों के लिए है)
लोहड़ी: पंजाब का लोकपर्व
लोहड़ी उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब और हरियाणा का एक प्रमुख त्यौहार है। यह हर साल 13 जनवरी को, मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। यह त्यौहार सर्दी के मौसम के खत्म होने और बसंत के आगमन का प्रतीक है।
लोहड़ी का मुख्य आकर्षण रात के समय जलाया जाने वाला अलाव (Bonfire) है। शाम होते ही सभी लोग नए कपड़े पहनकर एक जगह इकट्ठे होते हैं। आग जलाई जाती है और लोग उसके चारों ओर घेरा बनाकर परिक्रमा करते हैं। इस पवित्र अग्नि में तिल, गुड़, गजक, मूंगफली और मक्का (फुल्ले) अर्पित किए जाते हैं।
मान्यता है कि अग्नि देव तक हमारी प्रार्थनाएं पहुंचाते हैं। लोग आग के पास बैठकर “आदर आए, दलिंदर जाए” (समृद्धि आए, गरीबी जाए) का गीत गाते हैं।
इस त्यौहार में दुल्ला भट्टी की कहानी भी सुनाई जाती है। लोग ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्दा करते हैं। खाने में सरसों का साग और मक्के की रोटी बनाई जाती है। यह त्यौहार सभी के जीवन में नई ऊर्जा और खुशियां लेकर आता है।
10 Lines on Lohri in Hindi
(यह कक्षा 1, 2 और 3 के बच्चों के लिए है)
- लोहड़ी भारत का एक प्रसिद्ध और खुशियों भरा त्यौहार है।
- यह मुख्य रूप से पंजाबियों का त्यौहार है।
- लोहड़ी हर साल 13 जनवरी को मनाई जाती है।
- यह त्यौहार अच्छी फसल होने की खुशी में मनाया जाता है।
- इस दिन शाम को लकड़ियां जलाकर अलाव (Bonfire) जलाया जाता है।
- लोग आग में मूंगफली, रेवड़ी और मक्का डालते हैं।
- इस दिन दुल्ला भट्टी के लोकगीत गाए जाते हैं।
- लोग ढोल बजाते हैं और भांगड़ा-गिद्दा करते हैं।
- प्रसाद के रूप में गुड़ और तिल बांटा जाता है।
- लोहड़ी हमें एकता और भाईचारे का संदेश देती है।
FAQ: Lohri Festival
Ans: यह रबी की फसलों की कटाई और कड़ाके की सर्दी के जाने की खुशी में मनाई जाती है।
Ans: आग को ऊर्जा और जीवन का प्रतीक माना जाता है। सर्दी में आग जलाकर सूर्य देवता और अग्नि देवता का आह्वान किया जाता है ताकि वे धरती पर गर्माहट लाएं।
Ans: लोहड़ी हमेशा मकर संक्रांति से एक रात पहले मनाई जाती है। लोहड़ी रात का उत्सव है, जबकि मकर संक्रांति अगले दिन सुबह का स्नान-दान पर्व है।
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