Vano Ka Mahatva Essay: “प्रकृति हमारी जरूरतों को पूरा कर सकती है, लेकिन हमारे लालच को नहीं।” — महात्मा गांधी।
वन (Forests) हमारी धरती की सबसे मूल्यवान संपदा हैं। मानव जीवन और वनों का रिश्ता सदियों पुराना है। जिस तरह हमें जीवित रहने के लिए सांस लेने की जरूरत होती है, उसी तरह पृथ्वी को जीवित रहने के लिए वनों की जरूरत है। आज के दौर में बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण वनों का महत्व और भी बढ़ गया है।
इस लेख में हम वनों के महत्व पर निबंध, उनसे होने वाले लाभ और भारत तथा विश्व के उन ऐतिहासिक आंदोलनों के बारे में जानेंगे जिन्होंने वनों को बचाने के लिए क्रांति ला दी।
1. वनों का महत्व (लघु निबंध – 250 शब्द)
प्रस्तावना
वन ईश्वर का दिया हुआ वह अनमोल वरदान है, जिसके बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है। वनों को ‘हरा सोना’ (Green Gold) भी कहा जाता है। ये न केवल हमें छाया और फल देते हैं, बल्कि हमारे जीवन के लिए सबसे जरूरी ‘ऑक्सीजन’ भी प्रदान करते हैं।
वनों की उपयोगिता
वनों का हमारे जीवन में बहुत गहरा प्रभाव है। सबसे पहले, पेड़-पौधे वातावरण से हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर हवा को शुद्ध करते हैं। इसे ‘पृथ्वी के फेफड़े’ कहा जाता है। दूसरा, वनों की वजह से ही समय पर बारिश होती है, जिससे किसानों को खेती में मदद मिलती है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को पकड़कर रखती हैं, जिससे बाढ़ और भूमि कटाव (Soil Erosion) का खतरा कम होता है।
इसके अलावा, वनों से हमें लकड़ी, कागज, गोंद, रबर और कई तरह की आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां मिलती हैं। शेर, हाथी, हिरण और मोर जैसे हजारों जीव-जंतु वनों में ही सुरक्षित रहते हैं।
निष्कर्ष
आज इंसान अपने लालच में जंगलों को काट रहा है। यदि पेड़ नहीं बचे, तो हम भी नहीं बचेंगे। इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम पेड़ों की रक्षा करें और अपने जन्मदिन पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं।
2. वनों का महत्व और संरक्षण आंदोलन (दीर्घ निबंध – 700 शब्द)
प्रस्तावना
वन हमारी पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का आधार स्तंभ हैं। आदि काल से लेकर आज के आधुनिक युग तक, मनुष्य भोजन, वस्त्र और आवास के लिए वनों पर ही निर्भर रहा है। वर्तमान समय में ‘ग्लोबल वार्मिंग’ (Global Warming) के संकट को देखते हुए वनों का महत्व और अधिक बढ़ गया है। वन धरती के तापमान को संतुलित रखते हैं और हमें विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से बचाते हैं।
वनों का पर्यावरणीय महत्व
वनों को ‘नेचुरल एयर प्यूरीफायर’ माना जाता है। प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया के दौरान पेड़ टनों कार्बन डाइऑक्साइड को सोख लेते हैं। वैज्ञानिक भाषा में वन ‘कार्बन सिंक’ (Carbon Sink) का काम करते हैं, जो जलवायु परिवर्तन रोकने में सहायक है। इसके अलावा, वन जल-चक्र को नियमित करते हैं और भूजल स्तर (Groundwater Level) को बढ़ाते हैं।
भारत में वनों की स्थिति (Facts)
भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR 2021) के अनुसार, भारत का कुल वन क्षेत्र देश के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 24.62% है। जबकि ‘राष्ट्रीय वन नीति, 1988’ के अनुसार, पर्यावरण संतुलन के लिए देश के कम से कम 33% भू-भाग पर वन होना अनिवार्य है।
भारत और विश्व के प्रमुख वन संरक्षण आंदोलन
वनों को बचाने के लिए इतिहास में कई बार जनता ने सत्ता के खिलाफ आवाज़ उठाई है। यहाँ चिपको आंदोलन जैसे अन्य प्रमुख आंदोलनों की सूची दी गई है:
(A) भारत के प्रमुख आंदोलन (Major Movements in India)
- बिश्नोई आंदोलन (1730): यह दुनिया का सबसे पहला वन संरक्षण आंदोलन माना जाता है। राजस्थान के खेजड़ली गाँव में अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने खेजड़ी के वृक्षों को बचाने के लिए अपना बलिदान दे दिया था। उनका नारा था- “सिर साँटे रूँख रहे तो भी सस्तो जाण” (अगर सिर कटने से भी पेड़ बच जाए, तो यह सौदा सस्ता है)।
- चिपको आंदोलन (1973): उत्तराखंड के चमोली जिले में शुरू हुए इस आंदोलन ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। सुंदरलाल बहुगुणा और गौरा देवी के नेतृत्व में महिलाएं पेड़ों से चिपक कर खड़ी हो जाती थीं ताकि ठेकेदार उन्हें काट न सकें।
- अप्पिको आंदोलन (1983): यह दक्षिण भारत का ‘चिपको आंदोलन’ था। कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में पांडुरंग हेगड़े के नेतृत्व में लोगों ने ‘कालेसे (बचाओ), बेलेसे (बढ़ाओ) और मट्टू बालेसे (काम में लाओ)’ का नारा दिया।
- सालेंट वैली आंदोलन (1978): केरल के शांत घाटी (Silent Valley) के वर्षा वनों को डूबने से बचाने के लिए यह आंदोलन चलाया गया था।
- जंगल बचाओ आंदोलन (1982): यह वर्तमान झारखंड और बिहार के सिंहभूम जिले में शुरू हुआ था। यहाँ आदिवासियों ने प्राकृतिक ‘साल’ के वनों को काटकर उनकी जगह कीमती ‘सागौन’ (Teak) के पेड़ लगाने की सरकारी योजना का विरोध किया था।
(B) विश्व के प्रमुख आंदोलन (Global Movements)
- ग्रीन बेल्ट मूवमेंट (केन्या, 1977): नोबेल शांति पुरस्कार विजेता वांगारी मथाई (Wangari Maathai) ने केन्या में वनों को बचाने और महिलाओं को सशक्त करने के लिए यह आंदोलन चलाया। उन्होंने लाखों पेड़ लगवाए।
- अमेज़न रक्षक आंदोलन (ब्राजील): रबर टैपर नेता चिकू मेंडेस (Chico Mendes) ने अमेज़न के वर्षा वनों को कटने से बचाने के लिए अपनी जान दे दी। उनके संघर्ष ने दुनिया को अमेज़न के महत्व का अहसास कराया।
वनों की कटाई के दुष्परिणाम
आधुनिक विकास और शहरीकरण की दौड़ में वनों की अंधाधुंध कटाई (Deforestation) हो रही है। इसके भयानक परिणाम हमारे सामने हैं— ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्र जलस्तर का बढ़ना, और मौसम चक्र में खतरनाक बदलाव।
उपसंहार
निष्कर्षतः, वन प्रकृति का श्रृंगार हैं। बिश्नोई समाज और चिपको आंदोलन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए कि पेड़ों की कीमत हमारी जान से भी ज्यादा है। यदि हम सुखी और स्वस्थ जीवन चाहते हैं, तो हमें “एक व्यक्ति, एक पेड़” के संकल्प को अपनाना होगा।नारा: “सांसें हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगायें हम।”
वनों पर 10 महत्वपूर्ण पंक्तियाँ (10 Lines on Forests)
- वन पृथ्वी के पर्यावरण को संतुलित रखते हैं।
- ये हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
- वनों से हमें फल, फूल, लकड़ी और औषधियां मिलती हैं।
- जंगली जानवरों का आवास वन ही होते हैं।
- पेड़ मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और बाढ़ से बचाते हैं।
- वनों के कारण ही अच्छी बारिश होती है।
- पेड़ वातावरण से हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड सोख लेते हैं।
- हमें पेड़ों को काटने से रोकना चाहिए।
- वनों की हरियाली हमारी आँखों को सुकून देती है।
- ‘विश्व वन दिवस’ हर साल 21 मार्च को मनाया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
उत्तर: अप्पिको आंदोलन का कन्नड़ नारा था- “उलिसू, बेलेसु, मट्टू बलेसु” (बचाओ, बढ़ाओ और उपयोग करो)।
उत्तर: वनों के 5 मुख्य उपयोग हैं: ऑक्सीजन और स्वच्छ हवा प्रदान करना, जलवायु को नियंत्रित करना, जल चक्र को बनाए रखना, मिट्टी का संरक्षण करना और प्राकृतिक संसाधनों का स्रोत होना।
उत्तर: वन मृदा तथा वातावरण की रक्षा करते हैं तथा गैसीय संतुलन को स्थापित करते हैं।
उत्तर: भारत का बिश्नोई आंदोलन (1730), जिसमें अमृता देवी ने बलिदान दिया था।
उत्तर: वन्य जंगली जीव हर उउत्तर: यह केन्या (अफ्रीका) से संबंधित है और इसकी प्रणेता वांगारी मथाई थीं।
उत्तर: प्रतिवर्ष जुलाई के पहले सप्ताह (1 से 7 जुलाई) में।
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