Mahatma Gandhi Movements in Hindi: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में महात्मा गांधी का आगमन एक नए युग की शुरुआत थी। उन्होंने न केवल भारत को आजादी दिलाई, बल्कि दुनिया को संघर्ष का एक नया हथियार दिया— ‘सत्याग्रह’ (सत्य के लिए आग्रह)।
1915 में दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद, गांधी जी ने भारतीय राजनीति की दशा और दिशा दोनों बदल दी। चंपारण के नील किसानों से लेकर नमक कानून तोड़ने तक, उनके हर आंदोलन ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी।
प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC) और स्कूल के छात्रों के लिए, गांधी जी के आंदोलनों का सही क्रम (Chronology) और उनके परिणाम जानना बहुत महत्वपूर्ण है। इस आर्टिकल में हम 1917 से 1942 तक के उनके सफर को विस्तार से समझेंगे।
एक नज़र में: गांधी जी के प्रमुख आंदोलन (Quick Timeline)
Mahatma Gandhi ke Andolan सबसे पहले इस टेबल को देखें जो आपको सभी आंदोलनों का सही क्रम याद रखने में मदद करेगी:
| वर्ष (Year) | आंदोलन (Movement) | स्थान (Place) | मुख्य कारण (Reason) | परिणाम (Result) |
| 1917 | चंपारण सत्याग्रह | बिहार | नील की खेती (Tin Kathia) | सफल: 25% अवैध वसूली वापस मिली। |
| 1918 | अहमदाबाद मिल हड़ताल | गुजरात | प्लेग बोनस | सफल: 35% बोनस मिला (पहली भूख हड़ताल)। |
| 1918 | खेड़ा सत्याग्रह | गुजरात | कर (Tax) माफ़ी | सफल: केवल सक्षम लोगों से टैक्स लिया गया। |
| 1920 | असहयोग आंदोलन | पूरे भारत में | जलियांवाला बाग/खिलाफत | स्थगित: चौरी-चौरा कांड के कारण वापस लिया। |
| 1930 | सविनय अवज्ञा (दांडी मार्च) | दांडी (गुजरात) | नमक कानून | सफल: नमक कानून टूटा, गांधी-इरविन समझौता। |
| 1942 | भारत छोड़ो आंदोलन | पूरे भारत में | पूर्ण स्वतंत्रता (Do or Die) | निर्णायक: अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया। |
Gandhi Ji’s Entry in Politics (भारतीय राजनीति में प्रवेश)
9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। अपने राजनीतिक गुरु ‘गोपाल कृष्ण गोखले’ की सलाह पर उन्होंने सीधे राजनीति में कूदने के बजाय एक साल तक पूरे भारत का भ्रमण किया ताकि वे देश की जमीनी हकीकत को समझ सकें। 1916 में उन्होंने साबरमती आश्रम की स्थापना की और 1917 में ‘चंपारण सत्याग्रह’ के साथ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना पहला सक्रिय कदम रखा।
1. Champaran Satyagraha 1917 (चंपारण सत्याग्रह)
यह गांधी जी का भारत में पहला सत्याग्रह था। इसे उनके राजनीतिक करियर का ‘लॉन्चपैड’ माना जाता है।
कारण (Reason):
बिहार के चंपारण जिले में अंग्रेज बागान मालिक किसानों को अपनी जमीन के 3/20 भाग पर नील (Indigo) की खेती करने के लिए मजबूर करते थे। इसे ‘तिनकठिया पद्धति’ (Tinkathia System) कहा जाता था। नील की खेती से जमीन बंजर हो जाती थी और किसानों को इसका उचित दाम भी नहीं मिलता था।
घटनाक्रम:
स्थानीय किसान नेता राजकुमार शुक्ल के बुलावे पर गांधी जी चंपारण पहुंचे। प्रशासन ने उन्हें जिला छोड़ने का आदेश दिया, लेकिन गांधी जी ने पहली बार ‘सविनय अवज्ञा’ (Civil Disobedience) का प्रयोग करते हुए आदेश मानने से इनकार कर दिया और जेल जाने को तैयार हो गए।
परिणाम (Result):
- अंग्रेज सरकार को झुकना पड़ा और एक जांच समिति गठित की गई, जिसके सदस्य गांधी जी भी थे।
- समिति ने तिनकठिया प्रणाली को खत्म कर दिया।
- बागान मालिकों को अवैध रूप से वसूले गए धन का 25% हिस्सा किसानों को वापस करना पड़ा।
- यह गांधी जी की पहली बड़ी जीत थी। इसी दौरान रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें ‘महात्मा’ की उपाधि दी।
2. Ahmedabad Mill Strike 1918 (अहमदाबाद मिल हड़ताल)
चंपारण के बाद गांधी जी ने गुजरात के औद्योगिक विवाद में हस्तक्षेप किया।
कारण (Reason):
अहमदाबाद के कॉटन मिल मजदूरों और मालिकों के बीच ‘प्लेग बोनस’ (Plague Bonus) को लेकर विवाद था। मालिक बोनस खत्म करना चाहते थे, जबकि मजदूर बढ़ती महंगाई के कारण 50% वेतन वृद्धि की मांग कर रहे थे।
महत्वपूर्ण तथ्य (Key Fact):
इस आंदोलन में गांधी जी ने भारत में पहली बार ‘भूख हड़ताल’ (Hunger Strike) का प्रयोग हथियार के रूप में किया।
परिणाम (Result):
- गांधी जी के अनशन के दबाव में मिल मालिक झुक गए।
- मामला ट्रिब्यूनल में गया और मजदूरों को 35% बोनस देने का फैसला हुआ।
3. Kheda Satyagraha 1918 (खेड़ा सत्याग्रह)
अहमदाबाद मिल हड़ताल के तुरंत बाद गांधी जी को खेड़ा के किसानों की समस्याओं से जूझना पड़ा।
कारण (Reason):
1918 में गुजरात के खेड़ा जिले में फसल बर्बाद हो गई थी। राजस्व संहिता (Revenue Code) के अनुसार, यदि फसल सामान्य से 25% कम हो, तो लगान (Tax) पूरी तरह माफ होना चाहिए। लेकिन अंग्रेज सरकार पूरा टैक्स वसूलने पर अड़ी थी।
घटनाक्रम:
गांधी जी ने किसानों को सलाह दी कि वे टैक्स न दें। इस आंदोलन में सरदार वल्लभभाई पटेल ने गांधी जी का साथ दिया और अपनी वकालत छोड़कर गांव-गांव जाकर किसानों को एकजुट किया।
परिणाम (Result):
सरकार ने चुपचाप एक आदेश जारी किया कि टैक्स केवल उन्हीं किसानों से वसूला जाएगा जो देने में सक्षम हैं। गरीबों का टैक्स माफ कर दिया गया।
4. Non-Cooperation Movement 1920 (असहयोग आंदोलन)
यह ब्रिटिश शासन के खिलाफ गांधी जी का पहला अखिल भारतीय (All India) जन-आंदोलन था।
कारण (Reason):
- रॉलेट एक्ट (1919): बिना दलील, बिना वकील, बिना अपील का काला कानून।
- जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919): जनरल डायर द्वारा निहत्थे लोगों पर गोलीबारी।
- खिलाफत आंदोलन: तुर्की के खलीफा के पद को बचाने के लिए मुसलमानों का आंदोलन, जिसे गांधी जी ने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए समर्थन दिया।
मुख्य गतिविधियां:
- लोगों ने सरकारी उपाधियाँ (Title) लौटा दीं।
- विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई और खादी का प्रचार हुआ।
- छात्रों ने सरकारी स्कूल-कॉलेज छोड़ दिए और वकीलों ने अदालतें।
आंदोलन की समाप्ति (Suspension):
5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में ‘चौरी-चौरा’ नामक स्थान पर उग्र भीड़ ने एक पुलिस थाने में आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मी जलकर मर गए।
गांधी जी अहिंसा के पुजारी थे। इस हिंसा से दुखी होकर उन्होंने 12 फरवरी 1922 को आंदोलन वापस ले लिया। (कई नेताओं ने इसकी आलोचना भी की थी)।
5. Civil Disobedience Movement 1930 (सविनय अवज्ञा आंदोलन)
1929 के लाहौर अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज’ की मांग के बाद गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया। इसका केंद्र बिंदु था— नमक (Salt)।
दांडी मार्च (Dandi March):
- शुरुआत: 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से।
- सहयोगी: गांधी जी अपने 78 चुने हुए अनुयायियों के साथ निकले।
- यात्रा: लगभग 385 किलोमीटर (240 मील) की पैदल यात्रा।
- समापन: 24 दिन बाद, 6 अप्रैल 1930 को वे दांडी (नवसारी जिला) पहुंचे और समुद्र तट पर एक मुट्ठी नमक उठाकर ब्रिटिश नमक कानून तोड़ा।
परिणाम (Result):
- पूरे देश में लोगों ने नमक बनाना शुरू कर दिया।
- महिलाओं ने शराब की दुकानों के सामने धरना दिया।
- अंततः 1931 में ‘गांधी-इरविन समझौता’ (Gandhi-Irwin Pact) हुआ और गांधी जी दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने लंदन गए।
6. Quit India Movement 1942 (भारत छोड़ो आंदोलन)
यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम और सबसे निर्णायक युद्ध था।
कारण (Reason):
- क्रिप्स मिशन की विफलता: अंग्रेजों ने पूर्ण आजादी देने से मना कर दिया था।
- द्वितीय विश्व युद्ध: जापान भारत की सीमाओं तक पहुँच गया था और गांधी जी का मानना था कि अंग्रेजों की उपस्थिति भारत को युद्ध का मैदान बना देगी।
नारा (Slogan):
8 अगस्त 1942 को मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान से गांधी जी ने ऐतिहासिक नारा दिया— “करो या मरो” (Do or Die)। उन्होंने कहा, “मैं आपको एक छोटा सा मंत्र देता हूँ… हम भारत को आजाद कराएंगे या इस कोशिश में अपनी जान दे देंगे।”
परिणाम (Result):
- 9 अगस्त की सुबह होते ही गांधी जी, नेहरू, पटेल और सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया (Operation Zero Hour)।
- नेतृत्वविहीन होने के बावजूद जनता ने खुद कमान संभाली।
- जगह-जगह समानांतर सरकारें (Parallel Governments) बनीं।
- इस आंदोलन ने अंग्रेजों को यह अहसास दिला दिया कि अब भारत पर राज करना असंभव है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Ans: भारत में उनका पहला सत्याग्रह चंपारण सत्याग्रह (1917) था। (नोट: उन्होंने सत्याग्रह का सबसे पहला प्रयोग दक्षिण अफ्रीका में 1906 में किया था)।
Ans: चौरी-चौरा कांड (1922) में हुई हिंसा के कारण। गांधी जी नहीं चाहते थे कि आंदोलन अहिंसा के मार्ग से भटके।
Ans: अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918) के दौरान।
Ans: यह यात्रा 24 दिनों तक चली थी (12 मार्च से 6 अप्रैल 1930 तक)।
Ans: 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान।
संबंधित अर्टिकल
महात्मा गांधी के आंदोलनों (Mahatma Gandhi Movements) की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने आम आदमी—किसान, मजदूर और महिलाओं—को आजादी की लड़ाई का सिपाही बना दिया। चंपारण से शुरू हुआ यह सफर 1947 में भारत की आजादी के साथ ही थमा।
इन आंदोलनों ने न केवल ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंका, बल्कि पूरी दुनिया को सिखाया कि सत्य और अहिंसा के सामने बड़ी से बड़ी ताकत को झुकना पड़ता है।

