Mahatma Gandhi’s Education in Hindi

Mahatma Gandhi Education in Hindi: बचपन से बैरिस्टर बनने तक का पूरा सफर

महात्मा गांधी को पूरी दुनिया एक महान नेता और ‘सत्याग्रही’ के रूप में जानती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक छात्र के रूप में उनका सफर कैसा था? क्या वे क्लास के टॉपर थे या एक औसत छात्र?

गांधीजी का शैक्षिक जीवन (Educational Life) बहुत उतार-चढ़ाव भरा रहा। पोरबंदर की धूल भरी गलियों से लेकर लंदन के ‘इनर टेम्पल’ तक का उनका सफर हर छात्र के लिए प्रेरणादायक है।

आइए, उनके बचपन से लेकर बैरिस्टर बनने तक की पूरी कहानी समय के क्रमानुसार (Timeline) जानते हैं।

एक नज़र में: महात्मा गांधी की शिक्षा (Education Table)

शिक्षा का स्तर (Level)संस्थान का नाम (Institute)स्थान (Location)वर्ष (Year)
प्राथमिक शिक्षापोरबंदर प्राइमरी स्कूलपोरबंदर, गुजरात1876-1879
हाई स्कूलअल्फ्रेड हाई स्कूल (काठियावाड़)राजकोट1880-1887
कॉलेज (छोड़ दिया)शामलदास आर्ट्स कॉलेजभावनगर1888
कानून की पढ़ाई (Law)इनर टेम्पल (Inner Temple)लंदन, इंग्लैंड1888-1891
डिग्रीबैरिस्टर (Barrister-at-Law)लंदन1891

महात्मा गांधी की शुरुआती शिक्षा (Primary Education)

महात्मा गांधी का जन्म पोरबंदर में हुआ था और उनका बचपन वहीं बीता। उनकी शुरुआती शिक्षा पोरबंदर के एक साधारण प्राइमरी स्कूल में हुई।

  • औसत छात्र: गांधीजी बचपन में पढ़ाई में बहुत होशियार नहीं थे। वे एक औसत (Average) दर्जे के छात्र थे। उन्हें पहाड़े (Multiplication Tables) याद करने में बहुत मुश्किल होती थी।
  • शर्मीला स्वभाव: वे स्वभाव से बहुत शर्मीले और संकोची थे। स्कूल की घंटी बजते ही वे सबसे पहले बस्ता उठाकर घर की तरफ दौड़ पड़ते थे। उन्हें डर लगता था कि कहीं रास्ते में कोई लड़का उनसे बात न कर ले या उनका मजाक न उड़ाए।
  • लिखावट की गलती: बचपन में गांधीजी को लगता था कि “पढ़ाई के लिए अच्छी लिखावट (Good Handwriting) का होना जरुरी नहीं है।” उनकी यह गलतफहमी लंबे समय तक बनी रही, जिसका पछतावा उन्हें बड़े होकर बहुत हुआ।

हाई स्कूल और राजकोट के दिन (High School Life)

जब गांधीजी लगभग 7 साल के थे, तब उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर से राजकोट आ गए। वहां 11 साल की उम्र में गांधीजी का दाखिला ‘अल्फ्रेड हाई स्कूल’ (Alfred High School) में कराया गया।

  • विवाह और पढ़ाई का नुकसान: उस समय बाल विवाह की प्रथा थी। मात्र 13 साल की उम्र में उनका विवाह कस्तूरबा गांधी से हो गया। इस कारण उनका एक साल खराब हो गया, जिसे कवर करने के लिए उन्होंने बाद में एक साल में दो कक्षाओं की पढ़ाई की।
  • विषयों में रुचि: गांधीजी को अंग्रेजी (English) विषय पसंद था, लेकिन वे गणित (Maths) और भूगोल (Geography) में कमजोर थे। फिर भी, अपनी मेहनत से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की।
  • नकल से नफरत: एक बार स्कूल इन्स्पेक्टर क्लास में आए और उन्होंने छात्रों को अंग्रेजी के 5 शब्द लिखने को दिए। गांधीजी ने ‘Kettle’ (केतली) शब्द की स्पेलिंग गलत लिखी। शिक्षक ने उन्हें इशारे से बगल वाले लड़के की कॉपी से नक़ल करने को कहा, लेकिन गांधीजी ने ऐसा नहीं किया। वे मानते थे कि शिक्षक नकल रोकने के लिए हैं, नक़ल कराने के लिए नहीं।

पढ़ें बापू की पूरी जीवन गाथा: [Mahatma Gandhi Essay/Biography in Hindi]


कॉलेज की पढ़ाई और समस्या (College Days)

1887 में मैट्रिक पास करने के बाद, उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने भावनगर के ‘शामलदास आर्ट्स कॉलेज’ (Samaldas College) में एडमिशन लिया। लेकिन यहाँ उन्हें एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा।

  • भाषा की दिक्कत: अब तक उनकी पढ़ाई गुजराती माध्यम में हुई थी, लेकिन कॉलेज में सारी पढ़ाई और लेक्चर अंग्रेजी (English) में होते थे।
  • कॉलेज छोड़ना: प्रोफेसर्स क्या पढ़ा रहे हैं, यह गांधीजी को समझ ही नहीं आ रहा था। उन्हें लगने लगा कि वे पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। अपनी कमजोरी और घर की याद के कारण, उन्होंने पहले सत्र (First Term) के बाद ही कॉलेज छोड़ दिया और वापस राजकोट आ गए।

इंग्लैंड में वकालत की पढ़ाई (Law Studies in London)

कॉलेज छोड़ने के बाद गांधीजी के परिवार को चिंता हुई। उनके परिवार के एक सलाहकार और मित्र, मावजी दवे, ने सलाह दी कि अगर गांधीजी को अपने पिता की तरह ‘दीवान’ बनना है, तो उन्हें लंदन जाकर बैरिस्टर बनना चाहिए।

  • लंदन की यात्रा (1888): मां पुतलीबाई को वचन देने के बाद (कि वे मांस, मदिरा और स्त्रियों से दूर रहेंगे), 18 साल की उम्र में गांधीजी 4 सितंबर 1888 को जहाज से लंदन रवाना हुए।
  • इनर टेम्पल (The Inner Temple): लंदन पहुंचकर उन्होंने वकालत की पढ़ाई के लिए प्रतिष्ठित ‘इनर टेम्पल’ (The Inner Temple) में दाखिला लिया। यह लंदन के चार प्रमुख ‘Inns of Court’ में से एक था।
  • पढ़ाई और संघर्ष: शुरुआत में उन्होंने अंग्रेजी तौर-तरीके सीखने (जैसे डांस और वायलिन) में समय बर्बाद किया, लेकिन जल्द ही उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई में लगाया। उन्होंने लैटिन भाषा सीखी और रोमन लॉ (Roman Law) व कॉमन लॉ की किताबें गहराई से पढ़ीं।

बैरिस्टर बनकर भारत वापसी (Return as Barrister)

कड़ी मेहनत के बाद, उन्होंने अपनी कानून की पढ़ाई पूरी की।

  • डिग्री: 10 जून 1891 को उन्हें ‘बैरिस्टर’ (Barrister-at-Law) की उपाधि मिली।
  • भारत वापसी: 1891 में वे पढ़ाई पूरी करके भारत लौटे। अब वे एक क्वालीफाइड वकील थे।
  • पहला अनुभव: भारत आकर उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। लेकिन जब उन्हें अपना पहला केस मिला, तो वे जज के सामने इतने घबरा गए कि उनके मुँह से आवाज़ ही नहीं निकली। उन्हें अपनी फीस लौटानी पड़ी। यह वही गांधी थे जो बाद में अंग्रेजों के सामने शेर की तरह दहाड़े।

गांधीजी की लिखावट पर उनके विचार (Education Quotes)

अपनी अधूरी सुलेखन कला (Handwriting) को लेकर गांधीजी को हमेशा मलाल रहा। दक्षिण अफ्रीका में जब उन्होंने वकीलों की सुंदर लिखावट देखी, तो उन्हें बहुत शर्म आई।

उन्होंने छात्रों के लिए कहा था:

“सुलेखन (Good Handwriting) शिक्षा का एक आवश्यक अंग है। खराब लिखावट अधूरी शिक्षा की निशानी मानी जानी चाहिए।”

वे मानते थे कि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी लिखावट सुधारने और शारीरिक व्यायाम (Physical Exercise) पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए।

शिक्षा पर गांधीजी के और विचार पढ़ें: [Mahatma Gandhi Quotes on Education]


Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1: महात्मा गांधी ने वकालत की पढ़ाई कहाँ से की थी?

Ans: उन्होंने लंदन (इंग्लैंड) के ‘इनर टेम्पल’ (The Inner Temple) से वकालत की पढ़ाई की थी।

Q2: गांधीजी पढ़ने में कैसे थे?

Ans: वे एक औसत (Average) लेकिन बहुत मेहनती और ईमानदार छात्र थे।

Q3: गांधीजी किस विषय में कमजोर थे?

Ans: उन्हें अंग्रेजी पसंद थी, लेकिन वे गणित (Maths) और भूगोल में कमजोर थे।

Q4: महात्मा गांधी की डिग्री क्या थी?

Ans: उनके पास कानून की डिग्री थी और वे एक ‘बैरिस्टर’ (Barrister) थे।

Q5: गांधीजी ने कौन सा कॉलेज छोड़ दिया था?

Ans: उन्होंने भावनगर का ‘शामलदास कॉलेज’ पहले सत्र के बाद ही छोड़ दिया था।

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महात्मा गांधी का शैक्षिक जीवन हमें सिखाता है कि मार्क्स (Marks) और डिग्री से ज्यादा इंसान का चरित्र और आत्मविश्वास मायने रखता है। एक औसत छात्र, जो कभी क्लास में बोलने से डरता था और कॉलेज छोड़कर भाग आया था, उसने अपनी इच्छाशक्ति से पूरी दुनिया को बदल दिया।

शिक्षा सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि सत्य को खोजने और खुद को सुधारने में है।

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