International Mother Language Day Speech in Hindi: आदरणीय प्रधानाचार्य जी, विद्वान शिक्षक गण और मेरे प्यारे साथियों…
आज मैं आपसे किसी ‘किताबी भाषा’ में नहीं, बल्कि उस भाषा में बात करूँगा जिसमें मैंने पहली बार ‘माँ’ कहा था। जी हाँ, आज हम एक ऐसे दिन के लिए जुटे हैं जो हमारे अस्तित्व, हमारी पहचान और हमारी आत्मा से जुड़ा है— अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (International Mother Language Day)।
अक्सर हम अंग्रेजी बोलने में ‘स्मार्ट’ महसूस करते हैं और अपनी भाषा बोलने में ‘झिझक’। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया के सबसे विकसित देश (जैसे जापान, जर्मनी, फ्रांस) अपनी ही भाषा में पढ़ाई और काम करते हैं?
आज के भाषण में हम जानेंगे कि आखिर 21 फरवरी को ही यह दिन क्यों मनाया जाता है और क्यों हमारी मातृभाषा (Mother Tongue) सिर्फ एक ‘सब्जेक्ट’ नहीं, बल्कि हमारी ‘ताकत’ है।
Short Speech for Kids (Class 1-5)
(यह भाषण छोटे बच्चों के लिए है, इसे याद करना बहुत आसान है)
शुरुआत:
“सुप्रभात! आदरणीय प्रिंसिपल सर और टीचर्स।
मेरा नाम [आपका नाम] है और मैं कक्षा [कक्षा] का छात्र/छात्रा हूँ।”
भाषण:
आज हम अपनी ‘मदर टंग’ यानी मातृभाषा का जश्न मना रहे हैं।
दोस्तों, जैसे माँ के हाथ का खाना दुनिया में सबसे टेस्टी होता है, वैसे ही अपनी मातृभाषा दुनिया में सबसे मीठी होती है।
जब हमें चोट लगती है, तो मुँह से ‘Ouch’ नहीं, बल्कि ‘माँ’ निकलता है। यही हमारी मातृभाषा का जादू है।
हमें स्कूल में अंग्रेजी और बाकी विषय जरूर सीखने चाहिए, ताकि हम दुनिया के साथ चल सकें। लेकिन घर पर, दोस्तों के साथ और अपने दिल की बात कहने के लिए हमें अपनी हिंदी, तमिल, पंजाबी या बंगाली को कभी नहीं भूलना चाहिए।
अपनी भाषा पर गर्व करो, क्योंकि यही हमारी असली पहचान है।
धन्यवाद। जय हिन्द!
Long Speech for Seniors (Class 6-12) – The Power Play
(यह भाषण बड़े छात्रों के लिए है, इसमें जोश और इतिहास दोनों हैं)
शुरुआत (The Hook):
“निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।”
— भारतेन्दु हरिश्चंद्र
आदरणीय मंच और मेरे युवा साथियों!
आज 21 फरवरी है। यह तारीख सिर्फ कैलेंडर का एक पन्ना नहीं है, बल्कि इतिहास का एक खूनी अध्याय है जिसे हम भूल चुके हैं।
(Historical Bloodshed – 1952 की कहानी)
क्या आप जानते हैं कि आज का दिन ‘मातृभाषा दिवस’ क्यों है?
क्योंकि 1952 में आज ही के दिन, हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) में ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने अपनी मातृभाषा ‘बांग्ला’ को बचाने के लिए पुलिस की गोलियां खाई थीं।
उन्होंने अपनी जान दे दी, लेकिन अपनी जुबान (भाषा) नहीं छोड़ी। दुनिया के इतिहास में ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं है जहाँ लोगों ने ‘शब्दों’ और ‘वर्णमाला’ के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी हो।
(The Reality Check – आज का सच)
लेकिन आज हम क्या कर रहे हैं?
हम अंग्रेजी बोलने में शान समझते हैं और अपनी मातृभाषा बोलने में शर्म। हम भूल जाते हैं कि एक पेड़ अपनी जड़ों (Roots) के दम पर ही तूफ़ान में खड़ा रहता है। अगर जड़ें काट दी जाएं, तो पेड़ गिर जाएगा। हमारी भाषा हमारी जड़ है।
यूनेस्को (UNESCO) भी कहता है कि एक बच्चा सबसे तेजी से और सबसे बेहतर अपनी मातृभाषा में सीखता है, किसी विदेशी भाषा में नहीं।
(The Conclusion – संकल्प)
तो आइए, आज कसम खाएं कि हम ‘ग्लोबल’ जरूर बनेंगे, अंग्रेजी भी सीखेंगे, लेकिन ‘लोकल’ को नहीं भूलेंगे। हम अपनी भाषा को अपना ‘पासवर्ड’ बनाकर रखेंगे, इसे कभी अपनी जिंदगी से ‘लॉग आउट’ नहीं करेंगे।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
जय हिन्द! जय भारत!
Quotes & Shayari for Speech
अपने भाषण को और दमदार बनाने के लिए बीच-बीच में ये पंक्तियाँ बोलें:
- भावुक: “माँ ने लोरी जिस जुबान में सुनाई थी, वो जुबान मेरी पहचान है। वो सिर्फ शब्द नहीं, वो मेरी आत्मा का सम्मान है।”
- प्रेरक: “भाषाएं अनेक हैं, पर भाव एक है। हम सब भारतीय हैं, यह हमारा गर्व एक है।”
- नेल्सन मंडेला: “अगर आप किसी व्यक्ति से उस भाषा में बात करते हैं जो वह समझता है, तो वह बात उसके दिमाग में जाती है। लेकिन अगर आप उसकी अपनी भाषा में बात करते हैं, तो वह बात उसके दिल में जाती है।”
Why is 21 February Chosen?
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (International Mother Language Day) हर साल 21 फरवरी को मनाया जाता है। इसकी घोषणा यूनेस्को (UNESCO) ने 17 नवंबर 1999 को की थी। इस तारीख को चुनने का मुख्य कारण 1952 का ‘बांग्लादेशी भाषा आंदोलन’ है, जब ढाका में छात्रों ने बांग्ला भाषा को आधिकारिक दर्जा दिलाने के लिए अपनी जान दी थी। इसका उद्देश्य दुनिया की विलुप्त होती भाषाओं और सांस्कृतिक विविधता को बचाना है।
Hosting Script (Anchoring Tips)
अगर आप मंच संचालन (Anchoring) कर रहे हैं, तो कार्यक्रम को ऐसे बांधें:
1. स्वागत (Start):
(माइक हाथ में लें और मुस्कुराएं)
“नमस्ते, आदाब, सत श्री अकाल!
विविधता में एकता, यही है भारत की विशेषता।
आज हम सब यहाँ अपनी-अपनी मातृभाषाओं के रंगों को एक साथ बिखेरने के लिए जमा हुए हैं। जोरदार तालियों से स्वागत कीजिये हमारे मुख्य अतिथि का!”
2. अगले वक्ता को बुलाना (Transition):
“भाषा वह डोर है जो दिलों को जोड़ती है।
इसी डोर को और मजबूत करने के लिए, मैं मंच पर आमंत्रित करना चाहूँगा हमारे अगले वक्ता [नाम] को, जो हमें बताएंगे कि मातृभाषा क्यों जरुरी है।”
3. समापन (End):
“जाते-जाते बस इतना कहूँगा—
अपनी भाषा को मान दो, हर भाषा को सम्मान दो।
यही है एक सच्चे भारतीय की पहचान।
आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। आपका दिन शुभ हो!”
साथियों, Matrubhasha Diwas साल में एक बार आता है, लेकिन हमारी मातृभाषा हमारे साथ हर पल रहती है। चाहे आप भविष्य में डॉक्टर बनें, इंजीनियर बनें या नेता—अपनी जड़ों से जुड़े रहें।
जब आप अपनी भाषा बोलते हैं, तो आप सिर्फ शब्द नहीं बोलते, बल्कि अपने पूर्वजों का सम्मान करते हैं।
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