Holi Par Nibandh Hindi Mein: भारत एक ऐसा देश है जिसे ‘त्योहारों की माला’ कहा जा सकता है। यहाँ हर दिन एक नया उत्सव, हर मौसम एक नई उमंग लेकर आता है। इन्हीं उत्सवों में ‘होली’ एक ऐसा पर्व है जो न केवल रंगों का खेल है, बल्कि भारतीय संस्कृति की समरसता और उल्लास का जीवंत प्रमाण है।
अक्सर स्कूल और बोर्ड परीक्षाओं में अलग-अलग शब्द सीमाओं (Word Limits) में निबंध लिखने को कहा जाता है। आपकी सुविधा के लिए, यहाँ 100 से लेकर 1000 शब्दों तक के चार अलग-अलग निबंध दिए गए हैं, जो आपकी कक्षा और परीक्षा की जरूरत के अनुसार तैयार किए गए हैं।
Part 1: Holi Anuched (100 Words) – अनुच्छेद लेखन
(यह संक्षिप्त लेख कक्षा 5 से 8 के छात्रों या ‘अनुच्छेद लेखन’ के लिए उपयुक्त है)
भारत त्योहारों का देश है और होली यहाँ का सबसे रंगीला पर्व है। यह प्रतिवर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली मुख्य रूप से दो दिनों का त्योहार है। पहले दिन सूर्यास्त के बाद ‘होलिका दहन’ किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत और भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का प्रतीक है। दूसरे दिन ‘धुलंडी’ मनाई जाती है, जिसमें लोग आपसी वैर-भाव भुलाकर एक-दूसरे को अबीर और गुलाल लगाते हैं। इस दिन घरों में गुझिया जैसे पकवान बनते हैं और वातावरण खुशियों से भर जाता है। होली हमें सिखाती है कि हमें अपने मन की कड़वाहट को जलाकर प्रेम और भाईचारे के रंग बिखेरने चाहिए।
Part 2: Holi Essay (250 Words) – लघु निबंध
(यह निबंध कक्षा 9 के छात्रों के लिए आदर्श है)
प्रस्तावना:
होली भारत का एक अत्यंत प्राचीन और लोकप्रिय त्योहार है। इसे ‘रंगों का त्योहार’ भी कहा जाता है। यह पर्व शीत ऋतु की विदाई और वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करने के लिए मनाया जाता है। फाल्गुन की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली यह होली पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है।
पौराणिक संदर्भ:
इस त्योहार के पीछे हिरण्यकश्यप और उसके पुत्र प्रह्लाद की कथा प्रचलित है। प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था, जबकि उसका पिता उसे मारना चाहता था। जब होलिका (जिसे आग में न जलने का वरदान था) प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठी, तो वह स्वयं जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित बच गया। तभी से होलिका दहन की परंपरा चली आ रही है।
मनाने का ढंग:
होली के दिन ऊंच-नीच और अमीर-गरीब का भेद मिट जाता है। बच्चे पिचकारी और गुब्बारों से खेलते हैं, वहीं बड़े एक-दूसरे को गले लगाकर गुलाल लगाते हैं। घरों में विशेष रूप से गुझिया, मठरी और ठंडाई बनाई जाती है। दोपहर तक रंग खेलने के बाद लोग नहा-धोकर नए कपड़े पहनते हैं और शाम को दोस्तों व रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं।
निष्कर्ष:
होली एकता और प्रेम का संदेश देती है। हालांकि, हमें इस दिन नशे और हुड़दंग से बचना चाहिए। साथ ही, जानवरों पर रंग न डालना और पानी की बचत करना भी हमारी जिम्मेदारी है। यदि हम प्राकृतिक रंगों (Natural Colors) का प्रयोग करें, तो यह त्योहार पर्यावरण और हमारी सेहत दोनों के लिए मंगलकारी होगा।
Part 3: Holi Essay (500 Words) – स्टैंडर्ड निबंध (Class 10 Board Exam)
(यह निबंध हेडिंग्स और मुहावरों के साथ कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार किया गया है)
“रंगों का त्योहार है होली, खुशी की बौछार है होली,
छोड़कर आपस की नफरत, प्रेम की फुहार है होली।”
1. प्रस्तावना
भारत की सांस्कृतिक पहचान यहाँ के त्योहारों से है। होली एक ऐसा ही सांस्कृतिक पर्व है जो न केवल भारत में बल्कि अब विदेशों में भी बड़े चाव से मनाया जाता है। यह वसंत का वह उत्सव है जहाँ प्रकृति भी नए रंगों में रंग जाती है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (पूरी पृथ्वी एक परिवार है) की भावना को चरितार्थ करता है।
2. ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि
होली का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। इसका वर्णन प्राचीन ग्रंथों और शिलालेखों में भी मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, यह भक्त प्रह्लाद की विजय का उत्सव है। हिरण्यकश्यप के अहंकार की हार और सत्य की जीत का यह पर्व हमें विश्वास दिलाता है कि ईश्वर हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। इसके अलावा, ब्रज की होली भगवान श्रीकृष्ण और राधा के अलौकिक प्रेम की याद दिलाती है, जहाँ आज भी ‘लठमार होली’ देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं।
3. परंपरा और उल्लास
होली का उत्सव दो चरणों में संपन्न होता है। पहले दिन ‘होलिका दहन’ होता है। लोग लकड़ियों और उपलों का ढेर बनाकर पूजा करते हैं और उसे अग्नि के हवाले करते हैं। यह प्रतीकात्मक रूप से हमारे अंदर की बुराइयों को जलाने का अवसर है। अगले दिन ‘धुलंडी’ पर रंगों की बौछार होती है। चारों ओर ढोल-नगाड़ों की गूँज और लोकगीतों (फाग) के स्वर सुनाई देते हैं। लोग एक-दूसरे को ‘अबीर’ लगाकर “बुरा न मानो होली है” के साथ गले मिलते हैं।
4. वैज्ञानिक एवं सामाजिक महत्व
वैज्ञानिक पहलू: वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो यह समय ‘ऋतु परिवर्तन’ (Season Change) का होता है। सर्दियों की विदाई और गर्मियों की आहट के कारण वातावरण में बैक्टीरिया पनपते हैं। होलिका दहन की अग्नि से निकलने वाला ताप वातावरण को शुद्ध करता है और शरीर के कीटाणुओं को नष्ट करने में सहायक होता है।
सामाजिक पहलू: यह पर्व सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस दिन शत्रु भी मित्र बन जाते हैं और समाज में व्याप्त द्वेष की भावना मिट जाती है।
5. उपसंहार
होली आनंद और तृप्ति का पर्व है। वर्तमान समय में इसमें कुछ विकृतियां जैसे—केमिकल रंगों का प्रयोग और नशा आ गया है, जिससे हमें बचना चाहिए। हमें ‘इको-फ्रेंडली होली’ (Eco-friendly Holi) को बढ़ावा देना चाहिए। यदि हम गरिमा के साथ इस पर्व को मनाएं, तो यह हमारे जीवन में खुशियों के इंद्रधनुष बिखेर देगा।
Part 4: Holi Essay (1000 Words) – दीर्घ निबंध (Class 11 & 12)
(यह विश्लेषणात्मक निबंध कक्षा 11 और 12 के छात्रों के लिए है, जो उच्च स्तरीय शब्दावली पर आधारित है Holi Par Nibandh Hindi Mein)
1. प्रस्तावना: संस्कृति का प्रतिबिंब
भारतीय संस्कृति ‘उत्सवधर्मी’ है। यहाँ का हर उत्सव मानव जीवन को नैतिकता और आध्यात्मिकता से जोड़ने का माध्यम है। ‘होली’ इसी शृंखला का वह स्वर्णिम अध्याय है, जो रंगों के माध्यम से जीवन के दर्शन को समझाता है। संस्कृत साहित्य में कालिदास के ‘ऋतुसंहार’ से लेकर आधुनिक हिंदी साहित्य तक, होली का वर्णन कवियों की कल्पनाओं में जीवंत रहा है। यह पर्व केवल बाह्य रंगों का मेल नहीं, बल्कि अंतर्मन के उल्लास का प्रकटीकरण है।
2. सांस्कृतिक विविधता: अनेकता में एकता
भारत के विशाल भौगोलिक विस्तार में होली के कई रंग देखने को मिलते हैं, जो इसकी सांस्कृतिक संपन्नता को दर्शाते हैं:
- ब्रज की होली: मथुरा और वृंदावन की होली विश्व विख्यात है। यहाँ की ‘लठमार होली’ और ‘फूलों की होली’ भक्ति और प्रेम का अद्भुत संगम है।
- पश्चिम बंगाल का बसंत उत्सव: शांतिनिकेतन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा शुरू किया गया ‘बसंता उत्सव’ बेहद सौम्य और कलात्मक होता है। यहाँ छात्र पीले वस्त्र पहनकर नृत्य और संगीत के साथ अबीर खेलते हैं।
- दक्षिण भारत का काम महोत्सब: दक्षिण में इसे कामदेव के बलिदान की याद में ‘काम दहन’ के रूप में मनाया जाता है।
- हरियाणा का धुलेंडी: यहाँ भाभी द्वारा देवर को मजाक में पीटने की परंपरा इसे एक अलग सामाजिक रंग देती है।
3. दार्शनिक और पौराणिक आख्यान
होली का दर्शन ‘अहंकार के विनाश’ और ‘समर्पण की विजय’ पर आधारित है। भक्त प्रह्लाद की कथा हमें यह संदेश देती है कि जब मनुष्य ईश्वर पर पूर्ण विश्वास करता है, तो प्रकृति के नियम (जैसे अग्नि का जलाना) भी उसके लिए बदल जाते हैं। वहीं, कामदेव के दहन की कथा यह संकेत देती है कि वसंत के उन्माद में जब मनुष्य वासनाओं के वशीभूत होता है, तो ज्ञान की ‘तीसरी आंख’ से उन विकारों को भस्म करना आवश्यक है। तभी जीवन में वास्तविक ‘रंग’ और ‘आनंद’ का प्रवेश होता है।
4. होली का अर्थशास्त्र (Socio-Economic Aspect)
होली केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा आधार भी है।
- लघु उद्योग: रंग, गुलाल, पिचकारी और मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों के लिए यह आय का मुख्य समय होता है।
- खाद्य उद्योग: मिठाई और पकवानों के बाजार में इस दौरान अरबों का कारोबार होता है।
- पर्यटन: ब्रज और बनारस की होली देखने के लिए हर साल हजारों विदेशी पर्यटक भारत आते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलता है।
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5. वर्तमान चुनौतियां: पर्यावरण और स्वास्थ्य
आज के आधुनिक दौर में होली के स्वरूप में कुछ चिंताजनक बदलाव आए हैं:
- सिंथेटिक रंगों का खतरा: कारखानों में बने रंगों में लेड, क्रोमियम और कांच के बुरादे जैसे जहरीले पदार्थ होते हैं, जो आंखों और त्वचा को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं।
- जल संकट: भारत के कई हिस्से भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में ‘वाटर गन’ और ‘होलिका’ के नाम पर हजारों गैलन पानी बहाना तर्कसंगत नहीं है।
- होलिका दहन और प्रदूषण: अंधाधुंध पेड़ों की कटाई के बजाय सूखे कचरे या गोबर के उपलों का प्रयोग करना समय की मांग है।
6. समाधान: सुरक्षित और सार्थक होली
हमें ‘तिलक होली’ या ‘सूखी होली’ की परंपरा को पुनः जीवित करना होगा। प्राकृतिक रंगों जैसे—हल्दी, टेसू के फूल और नीम की पत्तियों से बने रंगों का प्रयोग न केवल सुरक्षित है, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी है। हमें यह समझना होगा कि त्योहार आनंद के लिए हैं, किसी को असुविधा पहुँचाने के लिए नहीं।
7. उपसंहार
होली का संदेश सार्वभौमिक है— ‘विस्मृति’ (भूल जाना)। पुरानी कड़वाहट को भूलकर, भेदभाव की दीवारों को गिराकर और प्रेम के रंग में रंगकर ही हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन विविधता का नाम है और इन विविधताओं (रंगों) के साथ तालमेल बिठाकर ही संसार सुंदर बनता है।
अतः, इस होली पर हम संकल्प लें कि हम केवल चेहरों को नहीं, बल्कि दिलों को रंगेंगे और समाज में समरसता की सुगंध फैलाएंगे।
Bonus Section: Quotes for Students (निबंध में प्रयोग करें)
- “होली आई सतरंगी रंगों की बौछार लाई, आपसी प्रेम और भाईचारे की मीठी गुझिया लाई।”
- “ईर्ष्या, द्वेष और नफरत को होलिका में जलाएं, प्रेम और शांति के अबीर से पूरी दुनिया को सजाएं।”
- “रंगों के बिना जीवन बेरंग है, और अपनों के बिना होली फीकी।”
निष्कर्ष
- शब्द सीमा: अपनी परीक्षा की आवश्यकता के अनुसार निबंध का चयन करें।
- भाषा: कक्षा 10 और 12 के छात्रों को ‘समरसता’, ‘संक्रमण काल’, और ‘सांस्कृतिक धरोहर’ जैसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।
- प्रेजेंटेशन: निबंध की शुरुआत और अंत किसी सुविचार या कविता से करें।
Holi Essay in Hindi 10 Lines: बच्चों के लिए होली पर सबसे प्यारा निबंध
आशा है कि यह गाइड आपकी परीक्षा में ‘फुल मार्क्स’ दिलाने में सहायक होगी।

