Different Types of Holi in India in Hindi

Different Types of Holi in India: लठमार से लेकर फूलों तक, जानिए भारत में कितने प्रकार की होली खेली जाती है

Different Types of Holi in India in Hindi: भारत विविधताओं का देश है। यहाँ हर कुछ कोस पर पानी और बानी (भाषा) बदल जाती है, तो फिर त्योहार कैसे अछूते रह सकते हैं? होली पूरे भारत में मनाई जाती है, लेकिन इसका स्वाद और रंग हर राज्य में बिल्कुल अलग होता है।

कहीं यह प्रेम से लाठियां बरसाकर खेली जाती है, कहीं सुगंधित फूलों से, तो कहीं यह मार्शल आर्ट्स (Martial Arts) का अद्भुत प्रदर्शन बन जाती है। अगर आप जानना चाहते हैं कि भारत के विभिन्न कोनों में इस त्योहार को किन-किन नामों से और किस अनोखे अंदाज में मनाया जाता है, तो यह लेख आपके लिए है।

आइए जानते हैं भारत में मनाए जाने वाले होली के 7 सबसे प्रसिद्ध और अनोखे रूप (Different Types of Holi in India in Hindi), जो हमारी संस्कृति की समृद्धि को दर्शाते हैं।


1. लठमार होली (Lathmar Holi) – बरसाना और नंदगांव, उत्तर प्रदेश

भारत में होली का जिक्र हो और मथुरा-वृंदावन का नाम न आए, यह असंभव है। यहाँ की होली पूरी दुनिया में सबसे अलग और मशहूर है।

लठमार होली (Lathmar Holi) उत्तर प्रदेश के बरसाना और नंदगांव में खेली जाने वाली विश्व प्रसिद्ध होली है। इसमें नंदगांव के पुरुष (हुरियारे) बरसाना आते हैं और बरसाना की महिलाएं (हुरियारिनें) उन पर प्रेम से लाठियां बरसाती हैं, जबकि पुरुष खुद को चमड़े की ढाल से बचाते हैं।

लठमार होली के पीछे की कहानी (Lathmar Holi Barsana Story):

यह परंपरा भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम और छेड़छाड़ से जुड़ी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण अपने दोस्तों के साथ नंदगांव से बरसाना आकर राधा और उनकी सखियों को चिढ़ाया करते थे। उनसे तंग आकर राधा और उनकी सखियां उन्हें लाठियों से खदेड़ती थीं। आज भी बरसाना और नंदगांव के लोग उसी प्रेमपूर्ण परंपरा को एक उत्सव के रूप में जीवंत करते हैं। इस होली को देखने के लिए दुनियाभर से सैलानी आते हैं।


2. फूलों की होली (Phoolon Ki Holi) – वृंदावन, उत्तर प्रदेश

अगर आप केमिकल वाले पक्के रंगों और हुड़दंग से बचना चाहते हैं, तो वृंदावन की यह होली आपके लिए ही बनी है।

  • इको-फ्रेंडली और आध्यात्मिक: यह होली मुख्य रूप से वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में एकादशी के दिन (होली से कुछ दिन पहले) खेली जाती है।
  • क्या होता है?: इस होली में गुलाल या रंगीन पानी का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होता। मंदिर के पुजारी (गोस्वामी) भगवान कृष्ण और भक्तों पर ताजे और सुगंधित फूलों (गेंदा, गुलाब और चमेली) की पंखुड़ियों की बारिश करते हैं।
  • अनुभव: जब मंदिर के प्रांगण में मीलों दूर से आए भक्तों पर फूलों की बौछार होती है और भजनों की धुन बजती है, तो वह दृश्य असीम शांति और अध्यात्म (Spirituality) का प्रतीक बन जाता है।

3. होला मोहल्ला (Hola Mohalla) – आनंदपुर साहिब, पंजाब

पंजाब में होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह शौर्य, वीरता और निहंग सिखों के साहस का प्रतीक है।

  • इतिहास (Hola Mohalla Punjab History): होला मोहल्ला की शुरुआत सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1701 ईस्वी में की थी। यह आनंदपुर साहिब में होली के अगले दिन मनाया जाता है।
  • शौर्य का प्रदर्शन: गुरु गोबिंद सिंह जी चाहते थे कि उनके सिख योद्धा (खालसा) हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहें। इसलिए, ‘होला मोहल्ला’ के दिन निहंग सिख नीले बाने (पोशाक) में सजकर ‘गतका’ (Gatka – सिखों का पारंपरिक मार्शल आर्ट), नंगी तलवारबाजी, घुड़सवारी और तीरंदाजी के हैरतअंगेज करतब दिखाते हैं। यहाँ रंग भी उड़ते हैं, लेकिन हवा में गूंजता ‘बोले सो निहाल’ का जयकारा इसे वीरता का उत्सव बना देता है।

4. डोल जात्रा या डोल पूर्णिमा (Dol Jatra) – पश्चिम बंगाल और ओडिशा

पूर्व भारत में, विशेषकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा में, होली को एक बहुत ही सौम्य, कलात्मक और संगीतमय तरीके से मनाया जाता है।

  • सांस्कृतिक महत्व: यहाँ इसे ‘डोल जात्रा’ या ‘डोल उत्सव’ कहा जाता है। इस दिन राधा और कृष्ण की मूर्तियों को खूबसूरत कपड़ों और फूलों से सजाकर एक पालकी (Palanquin) में बैठाया जाता है। इस पालकी को पूरे शहर में घुमाया जाता है।
  • उत्सव का तरीका: जुलूस के दौरान महिलाएं पारंपरिक पीले या सफेद कपड़े पहनती हैं। लोग एक-दूसरे पर सूखा ‘अबीर’ (गुलाल) उड़ाते हैं और रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित ‘रवींद्र संगीत’ (Rabindra Sangeet) पर मधुर नृत्य करते हैं। यह होली का सबसे कलात्मक और शांतिपूर्ण रूप है।

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5. याओशांग महोत्सव (Yaosang Festival) – मणिपुर

पूर्वोत्तर भारत (North East) में होली का स्वरूप स्थानीय संस्कृति के साथ मिलकर एक अद्भुत फ्यूजन (Fusion) बन जाता है।

  • मणिपुर की होली: मणिपुर में हिंदू धर्म और स्थानीय मैतेई (Meitei) संस्कृति के संगम से यह त्योहार लगातार 5 दिनों तक चलता है। इसे ‘याओशांग’ के नाम से जाना जाता है।
  • थबल चोंगबा नृत्य: याओशांग का सबसे बड़ा आकर्षण ‘थबल चोंगबा’ (Thabal Chongba) नृत्य है। इसका अर्थ है ‘चांदनी रात का नृत्य’। इसमें लड़के और लड़कियां पारंपरिक मणिपुरी परिधान पहनकर एक बड़ा गोल घेरा बनाते हैं और रात भर लोकगीतों पर नृत्य करते हैं। यहाँ रंगों से ज्यादा खेल-कूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को महत्व दिया जाता है।

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6. रंग पंचमी (Rang Panchami) – महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश

मध्य और पश्चिम भारत में होली एक दिन में खत्म नहीं होती; इसका असली खुमार तो पांचवें दिन सिर चढ़कर बोलता है।

  • समय और उत्साह: महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश (विशेषकर इंदौर) में मुख्य होली (धुलंडी) से ज्यादा उत्साह होलिका दहन के पांच दिन बाद आने वाली ‘रंग पंचमी’ का होता है।
  • मराठा परंपरा: ऐसा माना जाता है कि यह त्योहार देवताओं (Panch Tattva) को आमंत्रित करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन सड़कों पर पानी, पक्के रंगों और गुलाल की जमकर बौछार होती है। मछुआरों के पारंपरिक लोक नृत्य होते हैं और मटकी फोड़ने की प्रतियोगिताएं (जैसे जन्माष्टमी में होती हैं) आयोजित की जाती हैं।

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7. शिगमो या शिगमोत्सव (Shigmo) – गोवा

अगर आप गोवा की होली देखना चाहते हैं, तो आपको वहाँ के ‘शिगमो’ उत्सव का हिस्सा बनना होगा, जो कोंकणी हिंदुओं का सबसे बड़ा वसंत उत्सव है।

  • परेड और झांकियां: शिगमो 14 दिनों तक चलने वाला एक रंगारंग त्योहार है। इसके अंतिम दिनों में गोवा की सड़कों पर भव्य परेड और झांकियां (Tableaux) निकाली जाती हैं, जो पौराणिक कथाओं पर आधारित होती हैं।
  • लोक नृत्य: पुरुष और महिलाएं चमकीले पारंपरिक कपड़े पहनकर ‘गोफ’ और ‘फुगड़ी’ जैसे गोवा के पारंपरिक लोक नृत्य (Folk dances) करते हुए पूरे शहर में घूमते हैं। यह उत्सव रंगों, संगीत और गोवा की मिट्टी की खुशबू का बेहतरीन मिश्रण है।

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Different Types of Holi in India in Hindi: अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, State PCS) की तैयारी कर रहे हैं, तो Regional names of Holi in India for GK के ये प्रश्न आपके बहुत काम आएंगे:

सवाल (Question)जवाब (Answer)
‘लठमार होली’ भारत के किस राज्य/शहर में खेली जाती है?बरसाना और नंदगांव (उत्तर प्रदेश)।
सिखों द्वारा मनाए जाने वाले ‘होला मोहल्ला’ की शुरुआत किसने की थी?सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने (1701 में)।
‘याओशांग’ (Yaosang) किस राज्य का प्रसिद्ध होली त्योहार है?मणिपुर।
‘डोल जात्रा’ (Dol Jatra) मुख्य रूप से किन राज्यों में मनाया जाता है?पश्चिम बंगाल और ओडिशा।
‘शिगमोत्सव’ (Shigmo) किस राज्य का पारंपरिक वसंत/होली उत्सव है?गोवा।
‘थबल चोंगबा’ (Thabal Chongba) लोक नृत्य किस त्योहार का मुख्य आकर्षण है?याओशांग महोत्सव (मणिपुर)।

अलग-अलग रंग, एक ही संदेश

भारत के एक कोने से दूसरे कोने तक यात्रा करने पर हमने देखा कि Different Types of Holi in India in Hindi कितने अद्भुत और विविध हैं।

चाहे वह बरसाना की प्रेम से सराबोर लाठी हो, पंजाब की वीरता दिखाती तलवार हो, वृंदावन के शांत फूल हों या बंगाल का सुरीला अबीर—पूरे भारत में होली का मूल संदेश एक ही है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि बुराई पर हमेशा अच्छाई की ही जीत होती है। भले ही हमारे रंग खेलने के तरीके अलग हों, लेकिन जिस भावना से हम एक-दूसरे को गले लगाते हैं, वह पूरे हिंदुस्तान को एक ही प्रेम के रंग में रंग देती है।

आप इनमें से किस तरह की होली खेलना सबसे ज्यादा पसंद करेंगे?

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