प्रकाश के महापर्व दीपावली पर विद्यालयों, महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में विशेष प्रार्थना सभाओं (Morning Assemblies), वाद-विवाद प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। एक प्रभावी और ओजस्वी भाषण न केवल श्रोताओं में नई ऊर्जा का संचार करता है, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास, पर्यावरण चेतना और सामाजिक समरसता का सजीव संदेश भी देता है। इस आलेख में विद्यार्थियों, शिक्षकों और मंच संचालकों के लिए 1 मिनट, 2 मिनट और 5 मिनट के तीन अलग-अलग स्तरों के भाषण, संपूर्ण मंच संचालन (Anchoring) स्क्रिप्ट, प्रेरक शायरी और अभ्यास प्रश्न संकलित किए गए हैं।
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📌 दीपावली भाषण एवं मंच संचालन गाइड 2026: मुख्य बिंदु एक नज़र में
| भाषण प्रारूप (Speech Format) | लक्षित वर्ग (Target Group) | समय सीमा व शब्द संख्या (Duration) | मुख्य विषय बिंदु (Key Focus Areas) |
|---|---|---|---|
| प्रारूप 1 (संक्षिप्त भाषण) | प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) | 1 मिनट (100–120 शब्द) | श्रीराम का आगमन, दीपों की रोशनी, बड़ों का सम्मान व खुशी |
| प्रारूप 2 (असेंबली भाषण) | माध्यमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) | 2 मिनट (200–250 शब्द) | अंधकार से प्रकाश की यात्रा, स्वच्छता, 3 प्रमुख विद्यार्थी संकल्प |
| प्रारूप 3 (ओजस्वी भाषण) | सीनियर स्तर व प्रतियोगिताएं (कक्षा 9 से 12) | 5 मिनट (450–500 शब्द) | उपनिषद् दर्शन, बहु-धार्मिक समरसता, ग्रीन दिवाली व वैज्ञानिक दृष्टिकोण |
| मंच संचालन (Anchoring) | सांस्कृतिक प्रभारी व छात्र एंकर | 10–15 मिनट का कार्यक्रम | दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना, अतिथि स्वागत, प्रस्तुति परिचय, धन्यवाद |
🎤 1. प्राथमिक कक्षाओं हेतु 1 मिनट का सरल भाषण (Short Speech for Class 1 to 5)
आदरणीय प्रधानाचार्य जी, आदरणीय शिक्षकगण और मेरे प्यारे दोस्तों! आप सभी को दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
आज हम सब दीपों का पावन त्योहार दीपावली मनाने के लिए यहां एकत्र हुए हैं। कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे। उनके आने की खुशी में पूरी अयोध्या नगरी को घी के दीयों से सजाया गया था।
दीपावली हमें सिखाती है कि अच्छाई हमेशा बुराई को हरा देती है। हमें इस दिन घर की सफाई करनी चाहिए, नए कपड़े पहनने चाहिए और स्वादिष्ट मिठाइयां आपस में बांटनी चाहिए। हमें पटाखे फोड़कर प्रदूषण नहीं फैलाना चाहिए, बल्कि मिट्टी के दीये जलाकर अपने माता-पिता और गुरुजनों का आदर करना चाहिए।
दीयों की रोशनी से हर कोना जगमगाए,
यह दिवाली आपके जीवन में ढेर सारी खुशियां लाए।
धन्यवाद! जय हिन्द!
🎙️ 2. माध्यमिक कक्षाओं हेतु 2 मिनट का स्कूल असेंबली भाषण (2-Minute Speech for Class 6 to 8)
सभा में उपस्थित आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, ज्ञान के प्रकाश स्तंभ समस्त शिक्षकवृंद और मेरे प्रिय सहपाठियों! आप सभी को प्रकाश पर्व दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
दीपावली केवल दीये जलाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारे अंतःकरण से अज्ञान और आलस्य के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने का आह्वान है। हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति का अमर संदेश रहा है: “तमसो मा ज्योतिर्गमय”—अर्थात हे प्रभु, हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो।
एक जागरूक विद्यार्थी के रूप में इस पावन अवसर पर हमें तीन व्यावहारिक संकल्प लेने चाहिए:
- स्वच्छता और ग्रीन दिवाली का संकल्प: हम अपने घर और विद्यालय परिसर को स्वच्छ रखेंगे। अत्यधिक धुएं वाले पटाखों का त्याग कर पारंपरिक मिट्टी के दीयों से प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करेंगे।
- सामाजिक समरसता व वंचितों की मदद: अपनी खुशियों को जरूरतमंद बच्चों के साथ साझा करेंगे। किसी भूखे को भोजन कराकर और किसी निर्धन बच्चे को उपहार देकर वास्तविक प्रकाश फैलाएंगे।
- अध्ययन और चरित्र निर्माण: आलस्य को त्यागकर विद्या अर्जन में पूर्ण निष्ठा लगाएंगे, ताकि हमारा ज्ञान समाज और राष्ट्र के काम आ सके।
आइए, इस दीपावली पर हम अपने भीतर के सद्गुणों को प्रज्वलित करें।
अंधकार को चीरकर जो नई किरण जगाता है,
सच्चा विद्यार्थी वही जो समाज को राह दिखाता है।
ज्ञान का दीप जलाएं, आओ मिलकर दिवाली मनाएं।
धन्यवाद! जय हिन्द!
🌟 3. सीनियर विद्यार्थियों व प्रतियोगिताओं हेतु 5 मिनट का ओजस्वी भाषण (5-Minute Comprehensive Speech for Class 9 to 12)
मंच पर विराजमान परम आदरणीय प्रधानाचार्य जी, विद्वान निर्णायक मंडल, पूज्य गुरुजन और राष्ट्र निर्माण में तत्पर मेरे ओजस्वी सहपाठियों!
1. प्रस्तावना व भारतीय दर्शन (उपनिषदों का अमर घोष)
कार्तिक मास की गहनतम अमावस्या की रात्रि जब अखिल ब्रह्मांड पर अंधकार का आवरण ओढ़ा देती है, तब माटी का एक छोटा सा दीपक उठकर अंधकार की सत्ता को चुनौती देता है। यही भाव हमारे बृहदारण्यक उपनिषद् का मूल स्वर है—”असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्माऽमृतं गमय।” दीपावली केवल एक बाह्य उत्सव नहीं, बल्कि चेतना की उस अनंत यात्रा का प्रतीक है जो अज्ञानता, जड़ता और संकीर्णता से मानवता को प्रज्ञा, विवेक और परम सत्य की ओर ले जाती है।
2. ऐतिहासिक एवं बहु-धार्मिक समरसता
दीपावली भारत की साझी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का अनुपम संगम है। त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जब अधर्म के प्रतीक रावण का संहार कर अयोध्या लौटे, तो यह केवल एक राजा की वापसी नहीं, अपितु राजधर्म, सत्य और न्याय की प्रतिष्ठा थी।
इसी पावन तिथि पर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने पावापुरी में निर्वाण प्राप्त कर विश्व को ‘अहिंसा परमो धर्म:’ का सार्वभौमिक संदेश दिया।
सिक्ख इतिहास में यह दिन ‘बंदी छोड़ दिवस’ के रूप में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है, जब छठे पातशाह गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ग्वालियर के दुर्ग से 52 निर्दोष राजाओं को मुक्त कराकर मानवाधिकारों की रक्षा की थी।
आधुनिक काल में इसी दिन महर्षि दयानंद सरस्वती ने अपने नश्वर शरीर का त्याग कर भारतीय समाज को वेदों की ओर लौटने और कुरीतियों से मुक्त नवजागरण का मार्ग दिखाया था।
3. आधुनिक युग की चुनौती: पर्यावरण प्रदूषण एवं ‘ग्रीन दिवाली’ का संकल्प
किंतु साथियों, आज हमें आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। क्या हमारा यह पर्व केवल ध्वनि और वायु प्रदूषण तक सिमट कर रह गया है? आज जब हमारे महानगरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खतरनाक स्तर को पार कर जाता है, तो हमारा दायित्व कई गुना बढ़ जाता है।
पर्यावरण संरक्षण एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाते हुए हमें वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR-NEERI) द्वारा विकसित ‘ग्रीन पटाखे’—जैसे SWAS (Safe Water Releaser), STAR (Safe Thermite Cracker) और SAFAL (Safe Minimal Aluminium)—का ही सीमित उपयोग करना चाहिए। साथ ही, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 का पालन करते हुए रात्रि 10 बजे के बाद ध्वनि विस्तारक यंत्रों और पटाखों पर पूर्ण संयम बरतना होगा।
सबसे बढ़कर, हमें वोकल फॉर लोकल के तहत मिट्टी के पारंपरिक दीये खरीदकर अपने स्थानीय कुम्हारों और दस्तकारों के घरों में आर्थिक संबल और मुस्कान लानी होगी।
4. विद्यार्थियों का राष्ट्रीय दायित्व एवं उपसंहार
युवा ही राष्ट्र की धड़कन हैं। जब तक देश में अशिक्षा, गरीबी, असमानता और कुपोषण का अंधकार विद्यमान है, तब तक रोशनी का उत्सव अधूरा है। भगवान बुद्ध ने कहा था—”अत्त दीपो भव” अर्थात अपने दीपक स्वयं बनो। हमें अपने भीतर के दुर्गुणों, ईर्ष्या और नकारात्मकता का दहन कर राष्ट्रोत्थान के लिए समर्पित होना होगा।
जलाओ दीप पर रहे ध्यान इतना,
अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।
नई ज्योति से हर हृदय मुस्कुराए,
सपूतों का पौरुष नया युग बनाए।
वंदे मातरम्! जय हिन्द!
🎭 4. दीपावली सांस्कृतिक कार्यक्रम हेतु मंच संचालन (Anchoring Script in Hindi)
1. मंच पर प्रवेश व प्रारंभिक शायरी (Opening Couplet)
एंकर 1:
दीपों की कतारें, अपनों का प्यार,
खुशियों की सौगात लाया यह त्योहार।
अंधेरे को चीरकर प्रकाश की जीत हुई,
सत्य के पथ पर फिर से प्रीत हुई।
एंकर 2: सभा में उपस्थित समस्त प्रबुद्ध जनों, परम श्रद्धेय प्रधानाचार्य महोदय, आदरणीय शिक्षकगण और हमारे ऊर्जावान साथियों! इस गरिमामयी सांस्कृतिक संध्या और दीपावली उत्सव ‘दीपोत्सव 2026’ में आप सभी का हार्दिक अभिनंदन और स्वागत है।
2. दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना आमंत्रण (Lamp Lighting & Saraswati Vandana Cues)
एंकर 1: किसी भी शुभ कार्य का शुभारंभ भारतीय परंपरा में ज्ञान और विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना और दीप प्रज्वलन से होता है। दीप की लौ ऊपर की ओर उठकर हमें निरंतर उच्च आदर्शों की ओर बढ़ने की प्रेरणा देती है।
एंकर 2: मैं अत्यंत आदर के साथ हमारे विद्यालय के प्रधानाचार्य महोदय और आज के मुख्य अतिथि महोदय से विनम्र निवेदन करता हूं कि वे मंच पर पधारें और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ करें। साथ ही संगीत विभाग की छात्राओं से अनुरोध है कि वे मां वीणावादिनी की पावन वंदना प्रस्तुत करें।
(दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना संपन्न होने के पश्चात)
एंकर 1: बहुत-बहुत धन्यवाद! मां शारदे के आशीष से हमारा यह प्रांगण ज्ञान की पावन आभा से आलोकित हो उठा है।
3. मुख्य अतिथि एवं प्रधानाचार्य महोदय का स्वागत संबोधन (Welcome Address Cues)
एंकर 2: अतिथियों का सत्कार हमारी संस्कृति का प्राण है—”अतिथि देवो भव:”। हमारे मध्य उपस्थित आज के मुख्य अतिथि महोदय का सान्निध्य पाकर हम अत्यंत गौरवान्वित हैं। मैं आदरणीय प्रधानाचार्य जी से निवेदन करता हूं कि वे हरित पादप (Eco-friendly Plant) और उत्तरीय भेंट कर हमारे मुख्य अतिथि महोदय का स्वागत करें।
एंकर 1: करतल ध्वनियों के साथ स्वागत करें इस पावन क्षण का!
4. सांस्कृतिक कार्यक्रमों व भाषण प्रतियोगिता का संचालन (Introducing Dance / Drama / Speech items)
एंकर 2: अब समय है कला, संगीत और वक्तृत्व के उस महाकुंभ का जिसका आप सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
एंकर 1:
रंगमंच पर उतरेगी जब सुरों की सरगम,
थिरकेंगे कदम और झूमेगा यह मौसम।
आइए, सबसे पहले मंच पर आमंत्रित करते हैं कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों को, जो श्रीराम के अयोध्या आगमन और ‘राम राज’ की अवधारणा पर आधारित एक भावपूर्ण नृत्य नाटिका प्रस्तुत करने जा रहे हैं। जोरदार तालियों से स्वागत कीजिए!
(प्रस्तुति के बाद)
एंकर 2: क्या अद्भुत मंचन था! मर्यादा और शौर्य का ऐसा सजीव चित्रण सचमुच हृदय को छू गया। अब हम आगे बढ़ते हैं हमारी अंतर-सदन दीपावली भाषण प्रतियोगिता की ओर, जहां विभिन्न सदनों के प्रखर वक्ता ‘पर्यावरण अनुकूल दीपावली और आधुनिक युवा’ विषय पर अपने ओजस्वी विचार रखेंगे।
5. ‘ग्रीन दिवाली’ शपथ एवं धन्यवाद ज्ञापन (Eco Pledge & Vote of Thanks)
एंकर 1: आज के इस उत्सव का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है—हमारा संकल्प। मैं आप सभी से अनुरोध करूंगा कि अपने स्थान पर खड़े होकर हमारे साथ ‘हरित एवं सुरक्षित दीपावली’ का संकल्प लें।
(शपथ: “हम शपथ लेते हैं कि हम मिट्टी के दीयों का प्रयोग करेंगे, अत्यधिक पटाखों से दूरी बनाकर पर्यावरण की रक्षा करेंगे और वंचितों के जीवन में खुशियां बांटेंगे।”)
एंकर 2: अंत में, आभार की मधुर बेला। हम हृदय की गहराइयों से आभारी हैं हमारे मुख्य अतिथि महोदय, प्रधानाचार्य जी, समस्त शिक्षकगण और आप सभी प्यारे दर्शकों के, जिनके सहयोग और उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बनाया। आप सभी को सुरक्षित, समृद्ध और मंगलमय दीपावली की अनंत शुभकामनाएं।
संयुक्त रूप से: शुभ दीपावली! धन्यवाद, जय हिन्द!
📜 5. दीपावली भाषण व पोस्टर्स हेतु 15+ ओजस्वी नारे व शायरी (Diwali Slogans & Couplets)
प्रकाश और ज्ञान पर प्रेरक शायरी
- “तमसो मा ज्योतिर्गमय का गूंजे अमर गान, दीप जलाकर देश का बढ़ाएं हम सम्मान।”
- “दीपक की लौ सिखाती है झुकना नहीं कभी, अंधकार के सामने रुकना नहीं कभी।”
- “ज्ञान का एक दीप जब दिल में जलता है, हर निराशा का अंधकार खुद-ब-खुद ढलता है।”
- “रोशनी की यह बयार सबके घर में आए, कोई भी झोपड़ी आज अंधेरे में न रह जाए।”
पर्यावरण व ग्रीन दिवाली पर ओजस्वी नारे
- “पटाखों का धुआं नहीं, दीयों की रोशनी फैलाएंगे; इस वर्ष हम सब मिलकर ‘ग्रीन दिवाली’ मनाएंगे।”
- “प्रकृति का मत करो संहार, मिट्टी के दीयों से सजाओ त्योहार।”
- “CSIR-NEERI के ग्रीन पटाखे अपनाएं, सांसों को शुद्ध और पर्यावरण को बचाएं।”
- “शोर-शराबे और धुएं को कहें ना, रोशनी और मुस्कान से जीवन को सजना।”
सामाजिक समरसता व भाईचारे पर प्रेरक विचार
- “असली दिवाली वही मनाता है, जो किसी बेसहारा के चेहरे पर मुस्कान लाता है।”
- “मिट्टी के दीये खरीदकर कुम्हार का घर सजाएं, स्वदेशी को अपनाकर आत्मनिर्भर भारत बनाएं।”
- “जाति-धर्म की दीवारें तोड़कर हाथ मिलाएं, प्रेम और सद्भाव के दीप पूरे वतन में जलाएं।”
- “बांटें अपनी खुशियां उन बच्चों के संग, जिनके जीवन में फीके पड़े हैं हर रंग।”
विद्यार्थी जीवन व संकल्प पर ओजस्वी पंक्तियां
- “आलस्य का तम मिटाकर ज्ञान की ज्योति जलाएंगे, अपने उत्तम चरित्र से नया भारत बनाएंगे।”
- “पुस्तक, कलम और परिश्रम का दीप निरंतर जलाना है, हर विद्यार्थी को अपने लक्ष्य तक जाना है।”
- “आत्मदीपो भव का संकल्प लेकर आगे बढ़ेंगे, सत्य और निष्ठा की सीढ़ियों पर रोज चढ़ेंगे।”
🧠 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी (High-Yield Practice MCQs)
प्रश्न 1: ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ मूलतः किस प्राचीन भारतीय उपनिषद् का अमर मंत्र है?
A) छांदोग्य उपनिषद्
B) मुण्डक उपनिषद्
C) बृहदारण्यक उपनिषद्
D) कठोपनिषद्
उत्तर: C) बृहदारण्यक उपनिषद्
व्याख्या: ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ बृहदारण्यक उपनिषद् (1.3.28) का पावन मंत्र है, जिसका अर्थ है “अंधकार से मुझे प्रकाश की ओर ले चलो।”
प्रश्न 2: सार्वजनिक सभाओं में भाषण के दौरान ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियम 2000 के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में रात्रि में लाउडस्पीकर की अधिकतम अनुमेय सीमा क्या है?
A) 55 dB(A)
B) 45 dB(A)
C) 65 dB(A)
D) 75 dB(A)
उत्तर: B) 45 dB(A)
व्याख्या: ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत आवासीय क्षेत्रों के लिए दिन के समय अधिकतम सीमा 55 dB(A) और रात्रि के समय (10:00 PM से 6:00 AM) 45 dB(A) निर्धारित है।
प्रश्न 3: सिक्ख इतिहास में ‘बंदी छोड़ दिवस’ पर गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने किस किले से 52 राजाओं को रिहा कराया था?
A) लाल किला, दिल्ली
B) आगरा का किला
C) ग्वालियर का किला
D) रोहतासगढ़ का किला
उत्तर: C) ग्वालियर का किला
व्याख्या: सिक्ख धर्म के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने जहांगीर की कैद से ग्वालियर के किले में बंद 52 हिंदू राजाओं को अपनी सूझबूझ और पवित्र चोले की कलियों के माध्यम से रिहा कराया था।
प्रश्न 4: पर्यावरण अनुकूल ‘ग्रीन पटाखे’ किस प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान द्वारा विकसित किए गए हैं?
A) ISRO
B) DRDO
C) CSIR-NEERI
D) BARC
उत्तर: C) CSIR-NEERI
व्याख्या: वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CSIR-NEERI) ने वायु और ध्वनि प्रदूषण को 30% तक कम करने वाले SWAS, STAR और SAFAL नामक ग्रीन पटाखे विकसित किए हैं।
प्रश्न 5: ‘दीपावली’ शब्द में कौन सी संधि है?
A) गुण स्वर संधि
B) दीर्घ स्वर संधि
C) वृद्धि स्वर संधि
D) यण् स्वर संधि
उत्तर: B) दीर्घ स्वर संधि
व्याख्या: ‘दीपावली’ का संधि विच्छेद ‘दीप + आवली’ होता है। यहां प्रथम पद के अंत में ‘अ’ और द्वितीय पद के आरंभ में ‘आ’ के मिलने से ‘आ’ बन जाता है (अ + आ = आ), अतः यह दीर्घ स्वर संधि का उदाहरण है।
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