8 March History in Hindi पढ़ते वक्त एक बात हमेशा ज़ेहन में आती है—कुछ तारीखें सिर्फ कैलेंडर में नहीं, इतिहास के सीने में दर्ज होती हैं। 8 मार्च ऐसी ही एक तारीख है। इस दिन एक औरत ने रोटी माँगी और क्रांति हो गई। एक रानी ने जौहर किया और राजपूती शान अमर हो गई। एक विमान आसमान में उड़ा और फिर कभी नहीं मिला।
ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह साल का 67वाँ दिन है। UPSC, SSC, Railway और State PCS की परीक्षाओं में “आज का इतिहास” (Aaj Ka Itihas) से सवाल ज़रूर आते हैं—इसलिए इस पूरे लेख को ध्यान से पढ़ें और अपने महत्वपूर्ण नोट्स बनाने के लिए अंत में दिए गए ‘Exam Corner’ तक ज़रूर पहुँचें।
8 मार्च 1911: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत
आज पूरी दुनिया में महिला सशक्तिकरण का पर्व मनाया जा रहा है, लेकिन इसकी जड़ें बहुत गहरे संघर्षों में छिपी हैं। 8 March international women’s day history in Hindi की शुरुआत किसी एक घटना से नहीं हुई थी।
8 मार्च 1911 को पहली बार ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ मनाया गया था। इस दिन ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड में लाखों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर एक विशाल मार्च किया था। उनकी मांगें बहुत स्पष्ट थीं—समान अधिकार, वोट देने का हक़ (Voting Rights) और काम की बेहतर परिस्थितियां। दरअसल, यह 1908 में न्यूयॉर्क में 15,000 महिला मज़दूरों द्वारा की गई ऐतिहासिक हड़ताल का ही परिणाम था। इसके बाद 1910 में कोपेनहेगन के एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रसिद्ध कार्यकर्ता क्लारा ज़ेटकिन (Clara Zetkin) ने इस दिन को आधिकारिक बनाने का प्रस्ताव रखा—और 1911 में महिलाओं का यह सपना हकीकत में बदल गया।
📌 UPSC/SSC Fact: संयुक्त राष्ट्र (UN) ने वर्ष 1975 में 8 मार्च को आधिकारिक तौर पर ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ घोषित किया। हर साल महिलाओं के मुद्दों को विश्व पटल पर रखने के लिए इसकी एक अलग थीम तय होती है।
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8 मार्च 1917: रूसी क्रांति की पहली चिंगारी
रूस का इतिहास खून और क्रांतियों से लिखा गया है। Russian revolution 1917 notes तैयार करने वाले छात्र जानते हैं कि इस क्रांति की नींव किसी सेना ने नहीं, बल्कि महिलाओं ने रखी थी।
8 मार्च 1917 को रूस के पेत्रोग्राद (जिसे अब सेंट पीटर्सबर्ग कहा जाता है) में भयंकर ठंड और भुखमरी के बीच महिला मज़दूरों ने “रोटी और शांति” (Bread and Peace) की माँग को लेकर एक विशाल हड़ताल कर दी। प्रथम विश्व युद्ध की विभीषिका से त्रस्त इन महिलाओं का यह कदम कोई साधारण हड़ताल नहीं थी। यही वो पहली चिंगारी थी जिसने ज़ारशाही के खिलाफ ‘रूसी क्रांति’ को जन्म दिया। इस विद्रोह की आग इतनी तेज़ फैली कि मज़बूर होकर रूस के निरंकुश शासक ज़ार निकोलस II (Tsar Nicholas II) को अपनी सत्ता छोड़नी पड़ी और रूस का नक्शा हमेशा के लिए बदल गया।
📌 UPSC/SSC Fact: रूसी क्रांति 1917 में मुख्य रूप से दो चरणों में हुई थी—फरवरी क्रांति (नए ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह मार्च में हुई थी) और अक्टूबर क्रांति (बोल्शेविक क्रांति)। 8 मार्च की इस ऐतिहासिक हड़ताल को ‘फरवरी क्रांति’ का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
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8 मार्च 1535: रानी कर्णावती का जौहर (चित्तौड़गढ़ का दूसरा साका)
जब भी Rani Karnavati Johar Chittorgarh का ज़िक्र आता है, तो भारतीय इतिहास का सीना गर्व और पीड़ा से भर उठता है। राजपूती स्वाभिमान की यह कहानी 1535 की है।
वर्ष 1535 में गुजरात के क्रूर सुल्तान बहादुर शाह ने विशाल सेना के साथ चित्तौड़गढ़ पर हमला कर दिया। उस समय मेवाड़ की स्थिति कमज़ोर थी। राणा सांगा की विधवा और मेवाड़ की राजमाता रानी कर्णावती ने दिल्ली के मुग़ल बादशाह हुमायूं को राखी भेजकर एक भाई के रूप में मदद माँगी। हुमायूं अपनी सेना लेकर चित्तौड़ के लिए निकला ज़रूर, लेकिन वह समय पर नहीं पहुँच सका। जब किले के पतन और राजपूती शान पर आंच आने का संकट तय हो गया, तो रानी कर्णावती ने हार मानने के बजाय 8 मार्च 1535 को किले की हज़ारों वीरांगनाओं के साथ धधकती आग में कूदकर ऐतिहासिक जौहर (Jauhar) कर लिया।
📌 UPSC/SSC Fact: रानी कर्णावती (इन्हें रानी कर्मावती भी कहा जाता है) राणा सांगा की पत्नी थीं और महान शूरवीर महाराणा प्रताप की दादी थीं। चित्तौड़गढ़ के गौरवशाली इतिहास में कुल तीन साके हुए हैं—पहला 1303 में (रानी पद्मिनी), दूसरा 1535 में (रानी कर्णावती) और तीसरा 1568 में (अकबर के हमले के समय)।
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8 मार्च 1930: गांधीजी का सविनय अवज्ञा आंदोलन
भारत के स्वतंत्रता संग्राम (Indian Freedom Struggle) को अहिंसा के हथियार से धार देने वाले महात्मा गांधी ने 8 मार्च के दिन एक ऐसा फैसला लिया, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ें हिला दीं।
8 मार्च 1930 को महात्मा गांधी ने अहमदाबाद में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ (Civil Disobedience Movement) की औपचारिक शुरुआत का ऐलान किया था। नमक, जो हर गरीब और अमीर की बुनियादी ज़रूरत है, उसी पर अंग्रेज़ों ने भारी टैक्स लगा दिया था। गांधीजी ने इसी नमक कर (Salt Tax) को पूरी ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ अपना सबसे बड़ा हथियार बना दिया। इसी आंदोलन के ब्लूप्रिंट के तहत उन्होंने दांडी मार्च की रूपरेखा तैयार की थी।
📌 UPSC/SSC Fact: सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत प्रसिद्ध ‘दांडी मार्च’ (Dandi March) 12 मार्च से 6 अप्रैल 1930 तक चला था। साबरमती आश्रम से दांडी तक की इस 241 मील की ऐतिहासिक पदयात्रा में गांधीजी के साथ उनके 78 निष्ठावान अनुयायी शामिल थे।
8 मार्च 2014: MH370 विमान का अनसुलझा रहस्य
विज्ञान और रडार तकनीक के इस आधुनिक युग में कोई विशालकाय विमान हवा में कैसे गायब हो सकता है? Malaysia airlines flight 370 mystery UPSC के छात्रों के लिए करंट अफेयर्स और टेक्नोलॉजी का एक बड़ा विषय है।
8 मार्च 2014 को मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH370 ने मलेशिया के कुआलालंपुर से चीन के बीजिंग के लिए अपनी नियमित उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के महज़ 40 मिनट बाद, दक्षिण चीन सागर के ऊपर यह विमान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के रडार से अचानक गायब हो गया। 239 यात्रियों और चालक दल सहित यह विमान कहाँ गया, यह आज तक कोई नहीं जान पाया है। यह सिविल एविएशन (विमानन) इतिहास का सबसे डरावना और अनसुलझा रहस्य बना हुआ है।
📌 UPSC/SSC Fact: यह लापता विमान एक बोइंग 777 (Boeing 777) था। इस विमान की खोज दुनिया के इतिहास की सबसे महंगी और लंबी समुद्री खोज अभियानों (Search Operations) में से एक है। 2015 में रीयूनियन द्वीप (Réunion Island) के पास मिला एक छोटा सा मलबा इसी MH370 का हिस्सा पाया गया था, लेकिन मुख्य ढांचा आज तक नहीं मिला।
8 मार्च को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति (Famous Birthdays)
इतिहास केवल घटनाओं से नहीं, बल्कि उन चेहरों से भी बनता है जो 8 मार्च को इस दुनिया में आए। Sahir Ludhianvi biography in Hindi पढ़ने वाले छात्र जानते हैं कि साहिर की कलम में कितनी बगावत थी।
| नाम | जन्म वर्ष | पहचान / ऐतिहासिक योगदान |
| विश्वनाथ नारायण मंडलिक | 1833 | प्रसिद्ध वकील, समाज सुधारक और हिंदू कानून के विशेषज्ञ। |
| हरि नारायण आप्टे | 1864 | मराठी साहित्य के प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यासकार। |
| साहिर लुधियानवी | 1921 | भारत के प्रसिद्ध उर्दू/हिंदी गीतकार और कवि (पद्मश्री और फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित)। ‘कभी-कभी’ और ‘मैं पल दो पल का शायर हूँ’ जैसे कालजयी गीतों के रचयिता। |
| वसुंधरा राजे सिंधिया | 1953 | राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री बनने वाली वरिष्ठ राजनेता (BJP) और कद्दावर नेता। |
| हरमनप्रीत कौर | 1989 | भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वर्तमान कप्तान, अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए मशहूर और अर्जुन अवॉर्डी खिलाड़ी। |
8 मार्च को हुए प्रमुख निधन (Famous Deaths)
वक्त के पहिए ने आज ही के दिन कुछ ऐसे महान लोगों को भी हमसे छीना, जिनका जाना देश के लिए एक बड़ी क्षति था:
| नाम | निधन वर्ष | पहचान / ऐतिहासिक योगदान |
| रानी कर्णावती | 1535 | मेवाड़ (चित्तौड़गढ़) की वीर राजमाता, जिन्होंने गुजरात के शासक बहादुर शाह के हमले के समय स्वाभिमान की रक्षा के लिए जौहर किया था। |
| बी. जी. खेर (B.G. Kher) | 1957 | आज़ादी के बाद बॉम्बे प्रांत (Bombay State – जिसमें आज का महाराष्ट्र और गुजरात शामिल था) के प्रथम मुख्यमंत्री और एक महान समाज सुधारक। |
| विनोद मेहता | 2015 | भारत के सबसे मशहूर और बेबाक पत्रकारों में से एक। वे लोकप्रिय ‘Outlook’ पत्रिका के संस्थापक संपादक (Founding Editor) थे। |
Exam Corner — 8 March History in Hindi से परीक्षा प्रश्न
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को और धारदार बनाने के लिए, 8 मार्च के इतिहास से जुड़े कुछ सीधे और अति-महत्वपूर्ण प्रश्न:
👉 1975 में
👉 1535 में
👉 8 मार्च 1917 (महिलाओं द्वारा “रोटी और शांति” की मांग)
👉 फ्लाइट MH370 (8 मार्च 2014 को गायब)
👉 12 मार्च 1930 को (सविनय अवज्ञा आंदोलन की औपचारिक घोषणा 8 मार्च को हुई थी)।
आज के दिन की सीख
8 March History in Hindi पढ़ते-पढ़ते एक बात बिल्कुल साफ हो जाती है—यह तारीख हमेशा बड़े और क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई है। कभी अधिकारों की मांग करती महिलाओं की आवाज़ के रूप में, कभी एक रानी के सर्वोच्च बलिदान के रूप में, तो कभी गांधीजी के अहिंसक लेकिन बेहद मज़बूत कदमों के रूप में।
इतिहास पढ़ना सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए नहीं है, बल्कि यह जानने के लिए है कि जो लोग अपने अतीत के इतिहास को गहराई से समझते हैं, वही आने वाले भविष्य का निर्माण करते हैं।
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