21 February History in Hindi: 21 फरवरी का दिन इतिहास में शब्दों, विचारों और उन विचारों से पैदा होने वाली क्रांति का दिन माना जाता है। आज का इतिहास (Aaj Ka Itihas) हमें सिखाता है कि जब इंसान अपनी ज़ुबान और अपनी कलम की ताकत पहचान लेता है, तो बड़ी से बड़ी सत्ता को भी झुकना पड़ता है।
यह वह दिन है जब 1952 में ढाका के छात्रों ने अपनी ‘मातृभाषा’ (बंगाली) को बचाने के लिए हँसते-हँसते सीने पर गोलियां खाई थीं। वहीं दूसरी तरफ, 1848 में आज ही के दिन लंदन में एक ऐसी पतली सी किताब छपी थी, जिसने पूरी दुनिया में पूंजीवाद (Capitalism) के खिलाफ मजदूरों को खड़ा कर दिया था। और भारत के लिए यह दिन इसलिए भी खास है क्योंकि आज ही के दिन हिंदी साहित्य के उस सूर्य ने जन्म लिया था, जिसे दुनिया ‘निराला’ के नाम से जानती है।
चलिए, 21 फरवरी के इन ऐतिहासिक पन्नों को पलटते हैं और जानते हैं कि आज के दिन इतिहास ने क्या-क्या नया लिखा था।
21 फरवरी: ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ (International Mother Language Day)
आज पूरी दुनिया में जो ‘मातृभाषा दिवस’ मनाया जाता है, वह सिर्फ भाषाओं का उत्सव नहीं है, बल्कि यह एक खूनी और भावुक इतिहास की याद दिलाता है।
21 फरवरी को पूरी दुनिया में ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ (International Mother Language Day) मनाया जाता है। 21 फरवरी 1952 को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) की राजधानी ढाका में बंगाली भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने की मांग कर रहे छात्रों पर पुलिस ने गोलियां चला दी थीं। इन्हीं भाषाई शहीदों की याद में 1999 में यूनेस्को (UNESCO) ने इस दिन को ‘मातृभाषा दिवस’ घोषित किया।
भाषा आंदोलन का सच:
जब 1947 में भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, तो पाकिस्तान दो हिस्सों में बंटा—पश्चिमी पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान (बंगाली भाषी)। पाकिस्तानी सरकार ने उर्दू को एकमात्र राष्ट्रभाषा थोपने का फरमान जारी किया। इसके विरोध में 21 फरवरी 1952 को ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
- शहादत: इस प्रदर्शन पर पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें सलाम, बरकत, रफीक, जब्बार और शफीउर जैसे कई युवा शहीद हो गए।
- दुनिया भर में मान्यता: इतिहास में अपनी भाषा के लिए जान देने की यह पहली और सबसे बड़ी घटना थी। इसी शहादत के सम्मान में आज International Mother Language Day 2026 theme in Hindi के तहत पूरी दुनिया में बहुभाषी शिक्षा (Multilingual Education) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
1848: ‘द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ का प्रकाशन (Communist Manifesto UPSC Notes)
सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) के छात्रों के लिए ‘विश्व इतिहास’ (World History) का यह सबसे अहम अध्याय है।
21 फरवरी 1848 को लंदन में जर्मन दार्शनिक कार्ल मार्क्स (Karl Marx) और फ्रेडरिक एंगेल्स (Friedrich Engels) ने ‘द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ (The Communist Manifesto) नाम की ऐतिहासिक पुस्तक प्रकाशित की थी। इस किताब ने पूरी दुनिया में कम्युनिस्ट (साम्यवादी) आंदोलन की नींव रखी और मजदूरों के अधिकारों की वकालत की।
दुनिया बदलने वाला नारा:
इस किताब का मकसद समाज में मौजूद वर्ग-संघर्ष (Class Struggle) को समझाना था, जहाँ अमीर उद्योगपति (पूंजीपति) गरीब मजदूरों का शोषण करते थे।
- किताब का सबसे मशहूर नारा: इस किताब के अंत में मार्क्स ने वो ऐतिहासिक नारा दिया था जिसने आधी दुनिया की राजनीति बदल दी— “दुनिया के मज़दूरो एक हो जाओ, तुम्हारे पास खोने के लिए अपनी जंजीरों के सिवा कुछ नहीं है और पाने के लिए पूरी दुनिया है!” * प्रभाव: इसी किताब की विचारधारा पर चलकर आगे रूस में बोल्शेविक क्रांति (1917) हुई और सोवियत संघ (USSR) का निर्माण हुआ।
21 February: प्रमुख व्यक्तियों का जन्म (Famous Birthdays)
भारत के लिए 21 फरवरी का दिन साहित्य और विज्ञान के दो सबसे बड़े सितारों के जन्म का दिन है:
| वर्ष | नाम | पहचान और महत्व |
| 1896 | सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ (Suryakant Tripathi ‘Nirala’) | हिंदी कविता के ‘छायावादी युग’ के चार प्रमुख स्तंभों में से एक (Suryakant Tripathi Nirala biography in Hindi)। उन्हें मुक्त छंद (Free Verse) का प्रवर्तक माना जाता है। उनकी ‘राम की शक्ति पूजा’, ‘सरोज स्मृति’ और ‘कुकुरमुत्ता’ जैसी रचनाएं हिंदी साहित्य की अमर धरोहर हैं। (इनका जन्म वसंत पंचमी के दिन हुआ था, जो 1896 में 21 फरवरी को थी)। |
| 1894 | डॉ. शांति स्वरूप भटनागर (Shanti Swaroop Bhatnagar) | भारत के महान वैज्ञानिक और ‘वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद’ (CSIR) के पहले महानिदेशक। भारत में ‘विज्ञान प्रयोगशालाओं का जनक’ इन्हें ही कहा जाता है। विज्ञान के क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार’ (Shanti Swaroop Bhatnagar Award) इन्हीं के नाम पर दिया जाता है। |
| 1878 | मीरा अल्फासा (The Mother) | श्री अरबिंदो की आध्यात्मिक सहयोगी और पुदुच्चेरी (Pondicherry) में ‘अरबिंदो आश्रम’ और ‘ऑरोविले’ (Auroville) शहर की संस्थापिका। |
21 February: प्रमुख व्यक्तियों का निधन (Famous Deaths)
आज ही के दिन हमने सिनेमा और मानवाधिकार (Human Rights) से जुड़े कुछ महान लोगों को खोया था:
- 1991 – नूतन (Nutan): बॉलीवुड के इतिहास की सबसे महान, सुंदर और प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों में से एक। ‘बंदिनी’, ‘सुजाता’, और ‘सीमा’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आज भी एक्टिंग स्कूल में पढ़ाया जाता है। उन्हें 6 बार फिल्मफेयर (सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री) का अवार्ड मिला था, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
- 1965 – मैल्कम एक्स (Malcolm X): अमेरिका में अश्वेतों (Black people) के अधिकारों और नागरिक अधिकारों (Civil Rights) के लिए लड़ने वाले महान मानवाधिकार कार्यकर्ता। 21 फरवरी 1965 को न्यूयॉर्क में एक भाषण के दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी। उनका जीवन अश्वेतों के आत्म-सम्मान की लड़ाई का प्रतीक है।
Exam Corner: ज्ञान की बात (GK Questions For Students)
प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, State PCS) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए आज के इतिहास से जुड़े कुछ सीधे और महत्वपूर्ण प्रश्न:
Q: ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ (International Mother Language Day) कब और क्यों मनाया जाता है?
Ans: 21 फरवरी को मनाया जाता है। यह 1952 में ढाका में अपनी मातृभाषा ‘बंगाली’ के लिए शहीद हुए छात्रों की याद में यूनेस्को (UNESCO) द्वारा शुरू किया गया।
Q: ऐतिहासिक पुस्तक ‘द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ (1848) के लेखक कौन हैं?
Ans: कार्ल मार्क्स (Karl Marx) और फ्रेडरिक एंगेल्स।
Q: “दुनिया के मज़दूरो एक हो जाओ” (Workers of the world, unite!) का नारा किस किताब में दिया गया था?
Ans: द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो (The Communist Manifesto) में।
Q: विज्ञान के क्षेत्र में दिया जाने वाला भारत का सबसे बड़ा पुरस्कार ‘शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार’ किसके नाम पर है?
Ans: महान वैज्ञानिक और CSIR के संस्थापक डॉ. शांति स्वरूप भटनागर (जिनका जन्म 21 फरवरी 1894 को हुआ था)।
Q: हिंदी साहित्य में ‘छायावाद’ के प्रमुख स्तंभ ‘निराला’ जी का पूरा नाम क्या था?
Ans: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’।
भाषा और विचार की ताकत
21 February History का यह सफर हमें सिखाता है कि दुनिया में कोई भी हथियार, मनुष्य की मातृभाषा और उसके क्रांतिकारी विचारों (Ideas) को नहीं मार सकता।
चाहे वह 1952 में ढाका के छात्रों का अपनी भाषा (बंगाली) के लिए दी गई शहादत हो, कार्ल मार्क्स की वह पतली सी किताब हो जिसने दुनिया के मजदूरों को जगा दिया, या फिर ‘निराला’ जी की वह कलम हो जिसने हिंदी कविता को पुराने बंधनों से आज़ाद कर ‘मुक्त छंद’ दिया—21 फरवरी का इतिहास हमें यही याद दिलाता है कि अपनी भाषा का सम्मान करें, अपने अधिकारों के लिए लड़ें और अपने विचारों को धार दें।

