17 February History in Hindi: 17 फरवरी का दिन इतिहास की डायरी में तकनीक, खेल और क्रांति का एक अद्भुत संगम है। आज का इतिहास (Aaj Ka Itihas) हमें बताता है कि कैसे एक बार नौकरी से रिजेक्ट हुए इंसान ने दुनिया की सबसे बड़ी टेक डील क्रैक करके इतिहास रच दिया।
एक तरफ आज ही के दिन 2014 में मार्क जकरबर्ग (Mark Zuckerberg) ने वाट्सऐप को खरीदकर सिलिकॉन वैली को चौंका दिया था, तो दूसरी तरफ 1883 में भारत की आजादी के लिए लड़ने वाले पहले सशस्त्र क्रांतिकारी ने वतन के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। यही नहीं, आज क्रिकेट की दुनिया के उस दिग्गज का भी जन्मदिन है जो मैदान के हर कोने में गेंद को बाउंड्री पार भेजने का हुनर रखता है।
चलिए, 17 फरवरी के इन ऐतिहासिक पन्नों को पलटते हैं और तकनीक से लेकर आज़ादी के संघर्ष तक की कहानी को गहराई से समझते हैं।
2014: इतिहास की सबसे बड़ी टेक डील (Facebook acquires WhatsApp)
अगर आप बिज़नेस या टेक्नोलॉजी में थोड़ी भी दिलचस्पी रखते हैं, तो आज का दिन आपके लिए किसी केस स्टडी से कम नहीं है।
17 फरवरी 2014 (आधिकारिक घोषणा 19 फरवरी के आस-पास) को फेसबुक (अब Meta) ने मैसेजिंग ऐप ‘WhatsApp’ को 19 अरब डॉलर (उस समय के करीब 1.18 लाख करोड़ रुपये) में खरीदने का ऐतिहासिक ऐलान किया था। यह टेक्नोलॉजी के इतिहास की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली डील्स (Tech Acquisitions) में से एक थी।
रिजेक्शन से अरबपति बनने तक का सफर:
इस डील के पीछे की कहानी किसी भी हॉलीवुड फिल्म से ज्यादा प्रेरणादायक है। वाट्सऐप के को-फाउंडर ब्रायन एक्टन (Brian Acton) और जैन कौम (Jan Koum) दोनों ही याहू (Yahoo) के पूर्व कर्मचारी थे।
- फेसबुक का रिजेक्शन: 2009 में ब्रायन एक्टन ने फेसबुक में नौकरी के लिए अप्लाई किया था, लेकिन कंपनी ने उन्हें यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि वे उनके काम के नहीं हैं। निराश होने के बजाय, उन्होंने जैन कौम के साथ मिलकर WhatsApp बनाया।
- वक्त का पहिया: ठीक 5 साल बाद, उसी फेसबुक ने उनकी कंपनी को 19 बिलियन डॉलर जैसी विशाल रकम देकर खरीदा।
- इमोशनल फैक्ट: जैन कौम का बचपन बेहद गरीबी में बीता था। जिस दिन फेसबुक के साथ यह डील साइन होनी थी, जैन कौम ने उसी ‘वेलफेयर ऑफिस’ (Welfare Office) के बाहर जाकर कागजातों पर दस्तखत किए, जहां वे कभी अपनी मां के साथ मुफ्त खाने के कूपन (Food Stamps) लेने के लिए लाइन में लगा करते थे।
यह घटना सिखाती है कि अगर दुनिया आपको रिजेक्ट कर दे, तो अपना खुद का एक ऐसा साम्राज्य खड़ा करो कि दुनिया आपको सलाम करने पर मजबूर हो जाए।
1883: भारत के ‘आद्य क्रांतिकारी’ का बलिदान (Vasudeo Balwant Phadke Biography in Hindi)
तकनीक की दुनिया से निकलकर अब बात करते हैं भारत की मिट्टी के उस लाल की, जिसे देश के इतिहास में ‘सशस्त्र क्रांति का जनक’ कहा जाता है।
17 फरवरी 1883 को भारत के ‘आद्य क्रांतिकारी’ (Father of Indian Armed Rebellion) वासुदेव बलवंत फड़के का अदन (यमन) की जेल में निधन हुआ था। जब कांग्रेस पार्टी की स्थापना भी नहीं हुई थी, तब इन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ किसानों और आदिवासियों की पहली सशस्त्र सेना बनाई थी।
एक क्लर्क से विद्रोही बनने की कहानी:
वासुदेव बलवंत फड़के पुणे में एक क्लर्क की नौकरी करते थे। 1876-77 में दक्कन (Deccan) में भयंकर अकाल पड़ा था, जिसमें लाखों लोग भूखे मर रहे थे, लेकिन ब्रिटिश सरकार कोई मदद नहीं कर रही थी।
- वो दर्दनाक पल: जब फड़के की अपनी मां मृत्यु शय्या पर थीं, तो उन्होंने अपनी बीमार मां से मिलने के लिए छुट्टी मांगी, लेकिन अंग्रेजों ने छुट्टी देने से मना कर दिया। जब तक वे पहुंचे, उनकी मां का निधन हो चुका था।
- सेना का निर्माण: इस घटना और किसानों की दुर्दशा ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। उन्होंने नौकरी लात मार दी और महाराष्ट्र के रामोसी, भील और कोली समाज के युवाओं को इकट्ठा करके ‘रामोसी सेना’ खड़ी कर दी। उन्होंने अमीरों और ब्रिटिश खजानों को लूटकर गरीबों में बांटना शुरू कर दिया।
- काला पानी और शहादत: 1879 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और आजीवन कारावास (काला पानी) की सजा सुनाकर यमन के ‘अदन’ (Aden) जेल भेज दिया गया। वहां अंग्रेजों के अमानवीय अत्याचारों का विरोध करते हुए उन्होंने भूख हड़ताल कर दी और 17 फरवरी 1883 को भारत मां का यह वीर सपूत हमेशा के लिए सो गया। यूपीएससी (UPSC) और इतिहास के छात्रों के लिए उनका जीवन एक बहुत बड़ा अध्याय है।
17 February: प्रमुख व्यक्तियों का जन्म (Famous Birthdays)
आज का दिन खेल और राजनीति के दिग्गजों का भी दिन है। आज के दिन जन्मे प्रमुख चेहरे इस प्रकार हैं:
| वर्ष | नाम | पहचान और महत्व |
| 1984 | एबी डिविलियर्स (AB de Villiers) | दक्षिण अफ्रीका के महान क्रिकेटर, जिन्हें क्रिकेट जगत में प्यार से ‘मिस्टर 360 डिग्री’ (Mr. 360) कहा जाता है। आज (AB de Villiers birthday 2026) क्रिकेट फैंस उनके 360-डिग्री शॉट्स को याद करते हैं। वे न केवल एक शानदार क्रिकेटर हैं, बल्कि रग्बी, टेनिस और हॉकी के भी बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं। |
| 1954 | के. चंद्रशेखर राव (KCR) | तेलंगाना राज्य के पहले मुख्यमंत्री और भारत के प्रमुख राजनेता। उन्होंने तेलंगाना राज्य के गठन के आंदोलन में सबसे प्रमुख भूमिका निभाई थी। |
| 1899 | जीवनानंद दास (Jibanananda Das) | रवींद्रनाथ टैगोर के बाद बंगाली भाषा के सबसे महान और प्रभावशाली कवि और लेखक। उनकी कविता “बोनोलता सेन” बंगाली साहित्य की अमर रचना मानी जाती है। |
17 February: प्रमुख व्यक्तियों का निधन (Famous Deaths)
आज के दिन देश ने कुछ महान विचारकों और शूरवीरों को खोया, जिनके विचार आज भी जीवित हैं:
- 1883 – वासुदेव बलवंत फड़के (Vasudeo Balwant Phadke): भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले सशस्त्र नायक (जिनकी अदम्य साहस की कहानी हमने ऊपर विस्तार से जानी)।
- 1986 – जिद्दू कृष्णमूर्ति (Jiddu Krishnamurti death anniversary): भारत के महान दार्शनिक (Philosopher), लेखक और आध्यात्मिक गुरु। 17 फरवरी 1986 को अमेरिका के कैलिफोर्निया में उनका निधन हुआ था। उनकी किताबें और विचार पूरी दुनिया में पढ़े जाते हैं। उनका सबसे बड़ा दर्शन यह था कि “सत्य एक पथहीन भूमि है” (Truth is a pathless land)। उन्होंने हमेशा लोगों को किसी भी धर्म, संगठन या गुरु पर अंधभक्त होकर निर्भर रहने के बजाय “खुद की खोज” (Self-discovery) करने के लिए प्रेरित किया।
Exam Corner: ज्ञान की बात (GK Questions)
प्रतियोगी परीक्षाओं (Banking, SSC, UPSC) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए आज के इतिहास से जुड़े कुछ सीधे और महत्वपूर्ण प्रश्न:
Q: फेसबुक (अब Meta) ने वाट्सऐप (WhatsApp) को किस वर्ष और कितने में खरीदा था?
Ans: साल 2014 में, 19 अरब डॉलर (Billion Dollars) की भारी-भरकम कीमत पर।
Q: ‘भारत के सशस्त्र विद्रोह का पिता’ (Father of Indian Armed Rebellion) किसे कहा जाता है?
Ans: क्रांतिकारी वासुदेव बलवंत फड़के को।
Q: क्रिकेट की दुनिया में ‘मिस्टर 360’ के नाम से किस खिलाड़ी को जाना जाता है?
Ans: दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डिविलियर्स (AB de Villiers) को।
Q: प्रसिद्ध दार्शनिक जिद्दू कृष्णमूर्ति का निधन किस वर्ष हुआ था?
Ans: 17 फरवरी 1986 को।
सफलता और संघर्ष का सबक
17 February History का यह सफर हमें सिखाता है कि बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जिद्दी होना पड़ता है।
चाहे वाट्सऐप के फाउंडर ब्रायन एक्टन का फेसबुक से रिजेक्शन के बाद निराश होने के बजाय खुद की बिलियन-डॉलर कंपनी बनाना हो, या फिर वासुदेव बलवंत फड़के का अंग्रेजों की विशाल सत्ता के सामने अपनी छोटी सी सेना लेकर निडर होकर खड़ा हो जाना हो—17 फरवरी हमें यही याद दिलाता है कि हार न मानना ही इतिहास रचने की पहली और सबसे ज़रूरी शर्त है।
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