09 February History

9 February History: जब भारत ने पहली बार खुद को ‘गिना’ और दुनिया के सबसे बड़े ‘घुमक्कड़’ का जन्म

इतिहास में आज का दिन दो बिल्कुल अलग-अलग छोरों को जोड़ता है। एक तरफ 1951 में आज ही के दिन सरकार लोगों को एक जगह रोककर ‘गिन’ रही थी, और दूसरी तरफ 1893 में एक ऐसा शख्स पैदा हुआ जिसने दुनिया से कहा कि ‘रुकना मना है, बस चलते रहो’।

जी हाँ, 9 फरवरी ठहराव (गिनती) और गति (Speed) दोनों का दिन है। एक ओर जहाँ आज के दिन स्वतंत्र भारत ने पहली बार अपनी ताकत का अंदाजा लगाने के लिए जनगणना (Census) शुरू की थी, वहीं दूसरी ओर हिंदी साहित्य को ‘अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा’ का महामंत्र देने वाले महापंडित राहुल सांकृत्यायन का जन्म भी आज ही हुआ था।

चलिए, आज के इतिहास के इन सुनहरे और रोमांचक पन्नों को एक-एक करके पलटते हैं।


1951: आजाद भारत की पहली ‘गिनती’ (First Census)

9 फरवरी 1951 को आजाद भारत की पहली आधिकारिक जनगणना (Census) का कार्य शुरू हुआ था। विभाजन (Partition) की विभीषिका के बाद देश के लिए यह जानना सबसे बड़ी चुनौती थी कि हमारे पास कितने संसाधन हैं और हमारी कुल आबादी कितनी है। उस समय भारत की कुल जनसंख्या लगभग 36 करोड़ दर्ज की गई थी।

चुनौती (The Challenge):

जरा उस दौर की कल्पना कीजिए। 1951 का भारत—जहाँ न कंप्यूटर थे, न इंटरनेट, न स्मार्टफोन और न ही पक्की सड़कें। देश अभी-अभी विभाजन के दर्द से उबरा था। लाखों शरणार्थी इधर से उधर हुए थे। ऐसे में हर एक घर तक पहुँचना, हर सिर को गिनना किसी असंभव मिशन से कम नहीं था।

लाखों कर्मचारियों की मेहनत:

भारत सरकार ने इस विशाल काम के लिए लाखों प्रगणकों (Enumerators) की फौज उतारी। ये लोग हाथ में रजिस्टर और पेन लेकर गांव-गांव, गली-गली गए। उन्होंने सिर्फ लोगों को नहीं गिना, बल्कि साक्षरता, रोजगार और जीवन स्तर का भी डेटा जमा किया।

फैक्ट चेक: 1951 में हम 36 करोड़ थे, और आज 2026 में हमारी आबादी 140 करोड़ को पार कर चुकी है। 9 फरवरी का दिन हमें याद दिलाता है कि एक राष्ट्र के रूप में हमने कहाँ से शुरुआत की थी।


Rahul Sankrityayan (1893): ‘अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा’

अगर आपको घूमने का शौक है, तो आज का दिन आपके लिए किसी पर्व से कम नहीं है।

9 फरवरी 1893 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में केदारनाथ पांडेय का जन्म हुआ था, जिन्हें दुनिया ‘राहुल सांकृत्यायन’ (Rahul Sankrityayan) के नाम से जानती है। उन्हें हिंदी यात्रा साहित्य का पितामह (Father of Hindi Travelogue) कहा जाता है। उन्होंने ‘वोल्गा से गंगा’ और ‘घुमक्कड़ शास्त्र’ जैसी अमर रचनाएं लिखीं।

The Legend:

“सैर कर दुनिया की गाफिल, जिंदगानी फिर कहाँ… जिंदगानी गर कुछ रही तो, नौजवानी फिर कहाँ।”

ये पंक्तियां राहुल सांकृत्यायन के जीवन का मूल मंत्र थीं। वे सिर्फ एक लेखक नहीं थे, वे एक चलते-फिरते विश्वविद्यालय थे। उन्होंने तिब्बत, श्रीलंका, रूस से लेकर यूरोप तक की यात्राएं कीं।

सबसे रोमांचक बात यह है कि जब वे तिब्बत गए, तो वहां से बौद्ध धर्म की दुर्लभ पांडुलिपियां (Manuscripts) खच्चरों पर लादकर भारत लाए। अगर वे ऐसा न करते, तो हमारा बहुत सारा प्राचीन ज्ञान हमेशा के लिए नष्ट हो जाता। उनका साफ मानना था—”भागो नहीं, दुनिया को बदलो।” उनका ‘घुमक्कड़ शास्त्र’ आज भी हर ट्रैवलर की गीता है।


1971: चाँद से पृथ्वी पर वापसी (Apollo 14 Returns)

आपको याद होगा कि हमने 5 फरवरी के इतिहास में बात की थी कि कैसे नासा (NASA) के अपोलो 14 मिशन के कमांडर एलन शेपर्ड ने चाँद पर गोल्फ खेला था। आज उस कहानी का ‘क्लाइमेक्स’ है।

  • The Splashdown: अंतरिक्ष में गोल्फ खेलने और चाँद की सैर करने के बाद, 9 फरवरी 1971 को अपोलो 14 के अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर सुरक्षित लौट आए।
  • लैंडिंग: उनका कमांड मॉड्यूल ‘Kitty Hawk’ प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में सफलता पूर्वक गिरा (Splashdown)।
  • क्या लाए साथ? वे अपने साथ चाँद से लगभग 42 किलो मिट्टी और पत्थर (Moon Rocks) लेकर आए थे। इन पत्थरों ने वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के कई गहरे रहस्य सुलझाने में मदद की।

9 February: प्रमुख व्यक्तियों का जन्म (Famous Birthdays)

आज के दिन कई ऐसी शख्सियतों ने जन्म लिया जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में झंडे गाड़े।

  • 1893 – राहुल सांकृत्यायन: (जैसा कि ऊपर बताया गया) महान साहित्यकार और घुमक्कड़।
  • 1958 – अमृता सिंह (Amrita Singh): 80 और 90 के दशक की मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री। ‘बेताब’, ‘मर्द’ और ‘आईना’ जैसी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय के लिए वे आज भी याद की जाती हैं।
  • 1981 – टॉम हिडलेस्टन (Tom Hiddleston): अगर आप मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स (MCU) के फैन हैं, तो आप ‘लौकी’ (Loki) को जरूर जानते होंगे। इस मशहूर और चुलबुले विलेन (God of Mischief) का किरदार निभाने वाले हॉलीवुड स्टार टॉम हिडलेस्टन का आज जन्मदिन है।
  • 1922 – सी.पी. कृष्णन नायर: ‘द लीला’ (The Leela Palaces, Hotels and Resorts) के संस्थापक। इनकी कहानी बहुत प्रेरणादायक है क्योंकि इन्होंने 65 साल की उम्र में लक्जरी होटल बिजनेस शुरू किया था। यह साबित करता है कि सपने पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती।

9 February: प्रमुख व्यक्तियों का निधन 

इतिहास के पन्नों में आज का दिन कुछ महान हस्तियों की विदाई का भी गवाह है।

  • 2008 – बाबा आम्टे (Baba Amte):
    भारत के महान समाज सुधारक मुरलीधर देवीदास आम्टे का आज ही के दिन निधन हुआ था। जब समाज कुष्ठ रोगियों (Leprosy patients) से छुआछूत करता था, तब बाबा आम्टे ने उनके लिए ‘आनंदवन’ आश्रम की स्थापना की और अपना पूरा जीवन उनकी सेवा में लगा दिया। उन्हें रेमन मैग्सेसे और गांधी शांति पुरस्कार से नवाजा गया था।
  • 1881 – फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की (Fyodor Dostoevsky):
    दुनिया के सबसे महान साहित्यकारों में से एक, इस रूसी लेखक का आज निधन हुआ था। अगर आप मनोविज्ञान और मानवीय संवेदनाओं को समझना चाहते हैं, तो उनकी किताब ‘Crime and Punishment’ (अपराध और दंड) और ‘The Brothers Karamazov’ दुनिया के सबसे बेहतरीन उपन्यासों में गिनी जाती है।
  • 2006 – नादिरा (Nadira):
    बॉलीवुड के गोल्डन एरा की मशहूर अदाकारा। फिल्म ‘श्री 420’ का वह मशहूर गाना “मुड़-मुड़ के न देख मुड़-मुड़ के…” आपको याद होगा? उस गाने में अपनी कातिलाना अदाएं बिखेरने वाली नादिरा ने आज ही के दिन दुनिया को अलविदा कहा था।

Exam Corner: ज्ञान की बात 

कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स (SSC/UPSC/Railways) के नजरिए से 9 फरवरी का दिन बहुत अहम है। यहाँ कुछ डायरेक्ट सवाल-जवाब हैं:

सवाल (Question)जवाब (Answer)
आजाद भारत की पहली जनगणना (Census) किस वर्ष शुरू हुई थी?9 फरवरी 1951
1951 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी कितनी थी?लगभग 36 करोड़
‘वोल्गा से गंगा’ और ‘घुमक्कड़ शास्त्र’ के लेखक कौन हैं?राहुल सांकृत्यायन
अपोलो 14 मिशन चाँद से पृथ्वी पर कब लौटा?9 फरवरी 1971
प्रसिद्ध रूसी उपन्यास ‘Crime and Punishment’ के लेखक कौन हैं?फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की (Fyodor Dostoevsky)
कुष्ठ रोगियों की सेवा के लिए ‘आनंदवन’ की स्थापना किसने की थी?बाबा आम्टे

गिनना और चलना

9 फरवरी का इतिहास (9 February History) हमें जिंदगी के दो बहुत ही खूबसूरत और गहरे फलसफे (Philosophies) सिखाता है।

पहली सीख 1951 की जनगणना से मिलती है— “अपनी ताकत और संसाधनों का अंदाजा होना बहुत जरूरी है।” जब तक आपको पता नहीं होगा कि आप कहाँ खड़े हैं, आप आगे की प्लानिंग नहीं कर सकते।

और दूसरी सीख राहुल सांकृत्यायन जी से मिलती है— “एक जगह रुकना नहीं चाहिए।” ज्ञान किताबों से ज्यादा यात्राओं में मिलता है। जीवन चलने का नाम है, इसलिए अपनी जिज्ञासा को कभी मरने न दें।

तो आज के दिन अपनी उपलब्धियों को ‘गिनिए’ और फिर एक नए सफर की ओर ‘निकल पड़िए’!

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