क्या आप जानते हैं कि भारत का राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) दुनिया के किसी भी राष्ट्राध्यक्ष (Head of State) के आवास से बड़ा है? यह अमेरिका के ‘व्हाइट हाउस’ (White House) से भी कई गुना विशाल है।
लेकिन 2024-25 में यहाँ बहुत कुछ बदल गया है। अब यहाँ कोई ‘दरबार’ नहीं लगता, बल्कि ‘गणतंत्र’ गूंजता है। आज के इस आर्टिकल में हम Rashtrapati Bhavan Facts in Hindi के जरिए रायसीना हिल्स पर बने इस भव्य महल के उन रहस्यों को जानेंगे जो शायद ही आपको पता हों।
अब ‘दरबार हॉल’ नहीं रहा (Renaming of Halls)
यह सबसे ताज़ा और बड़ा अपडेट है जो हर छात्र और पर्यटक को पता होना चाहिए।
- Fact: जुलाई 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भवन के दो सबसे महत्वपूर्ण हॉलों के नाम बदल दिए।
- जिसे पहले ‘दरबार हॉल’ (Durbar Hall) कहा जाता था, जहाँ बड़े-बड़े शपथ ग्रहण समारोह होते थे, उसका नाम अब ‘गणतंत्र मंडप’ (Ganatantra Mandap) कर दिया गया है।
- इसी तरह, मशहूर ‘अशोक हॉल’ (Ashok Hall) का नाम बदलकर ‘अशोक मंडप’ (Ashok Mandap) कर दिया गया है। यह बदलाव गुलामी के प्रतीकों को हटाने के लिए किया गया।
17 साल और 29,000 मजदूर (Construction History)
इस इमारत को बनाना कोई आसान काम नहीं था।
- Fact: राष्ट्रपति भवन का निर्माण साल 1912 में शुरू हुआ था और इसे पूरा होने में 17 साल लग गए (1929 में पूरा हुआ)।
- इसे बनाने में करीब 29,000 मजदूरों ने दिन-रात पसीना बहाया।
- इसमें लोहे (Steel) का इस्तेमाल ना के बराबर हुआ है। यह पूरा भवन 700 मिलियन (70 करोड़) ईंटों और 30 लाख घन फीट पत्थरों से बना है।
दुनिया का सबसे बड़ा रसोइया? (Staff Secrets)
इतने बड़े महल को चलाने के लिए एक पूरी फौज की जरूरत होती है।
- Fact: राष्ट्रपति भवन में 750 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं।
- यहाँ का किचन (Kitchen) इतना बड़ा है कि यहाँ का राशन किसी होटल जैसा आता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यहाँ सिर्फ राष्ट्रपति के कपड़े धोने के लिए 19 धोबी और अलग-अलग कामों के लिए दर्जनों रसोइये नियुक्त होते हैं।
बैंक्वेट हॉल का गुप्त इशारा (The Secret Lights)
राष्ट्रपति भवन का Banquet Hall (भोज कक्ष) जहाँ विदेशी मेहमान खाना खाते हैं, वहां एक अनोखा सिस्टम लगा है।
- Fact: यहाँ 104 मेहमान एक साथ बैठ सकते हैं।
- वेटर (Butlers) को यह कैसे पता चलता है कि कब प्लेट उठानी है? इसके लिए हॉल में लगी पेंटिंग्स के ऊपर “गुप्त लाइटें” (Secret Lights) लगी हैं।
- जैसे ही मुख्य बटलर बटन दबाता है, लाइट जलती है और सभी वेटर एक साथ (बिल्कुल एक सेकंड में) प्लेट हटा लेते हैं। यह अनुशासन देखने लायक होता है।
मुगल गार्डन अब ‘अमृत उद्यान’ है (Amrit Udyan)
अगर आप फरवरी-मार्च 2026 में दिल्ली घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह आपके लिए है।
- Fact: राष्ट्रपति भवन के पीछे स्थित विश्व प्रसिद्ध ‘मुगल गार्डन’ का नाम बदलकर अब ‘अमृत उद्यान’ कर दिया गया है।
- यह साल में सिर्फ एक बार (फरवरी से मार्च तक) आम जनता के लिए खुलता है। यहाँ 150 से ज्यादा किस्म के गुलाब और 10,000 से ज्यादा ट्यूलिप (Tulip) के फूल खिलते हैं।
भगवान बुद्ध की 1000 साल पुरानी मूर्ति
- Fact: ‘गणतंत्र मंडप’ (पुराना दरबार हॉल) के ठीक पीछे भगवान बुद्ध की एक मूर्ति रखी है जो चौथी या पांचवीं शताब्दी (Gupta Period) की है।
- यह मूर्ति कला और इतिहास का एक बेमिसाल नमूना है, जो राष्ट्रपति भवन की शोभा बढ़ाती है।
चांदी की कुर्सी का वजन
- Fact: यहाँ एक म्यूजियम है जहाँ किंग जॉर्ज पंचम (King George V) की वह कुर्सी रखी है जिस पर वे 1911 के दिल्ली दरबार में बैठे थे।
- यह कुर्सी पूरी तरह चांदी (Silver) की बनी है और इसका वजन 640 किलोग्राम है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Ans: राष्ट्रपति भवन में कुल 340 कमरे हैं। यह 4 मंजिला इमारत है और इसमें 2.5 किलोमीटर लंबा गलियारा (Corridor) है।
Ans: आमतौर पर अमृत उद्यान (Amrit Udyan) फरवरी के पहले सप्ताह से लेकर मार्च के अंत तक जनता के लिए खुलता है। इसकी बुकिंग ऑनलाइन होती है।
Ans: इसका डिजाइन ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस (Sir Edwin Lutyens) ने तैयार किया था। इसीलिए नई दिल्ली के इस इलाके को अक्सर ‘लुटियंस दिल्ली’ कहा जाता है।
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राष्ट्रपति भवन सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र (Democracy) का सबसे बड़ा प्रतीक है। चाहे वह ‘गणतंत्र मंडप’ का नया नाम हो या ‘अमृत उद्यान’ के फूल, यह जगह हर भारतीय को गर्व महसूस कराती है।क्या आप कभी राष्ट्रपति भवन के अंदर गए हैं? अगर नहीं, तो 2026 में अपनी टिकट जरूर बुक करें!

