Essay on World Statistics Day in Hindi: विश्व सांख्यिकी दिवस 20 अक्टूबर को दुनिया भर में मनाया जाता है। विश्व के आर्थिक और सामाजिक आंकड़ों के योगदान का अवसर मनाने के तौर पर विश्व सांख्यिकी दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह दिवस पहली बार 20 अक्टूबर 2010 में संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग के मार्गदर्शन में मनाने का फैसला लिया गया। विश्व सांख्यिकी दिवस हर पांच साल में मनाया जाता है।
इसके अलावा भारत में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस 29 जून को मनाया जाता है। भारत में सांख्यिकी का जनक प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस को माना जाता हैं और उन्हीं की जयंती के उपलक्ष्य में भारत में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया जाता है। सांख्यिकी के क्षेत्र में महालनोबिस ने कई क्रांतिकारी योगदान दिए, जिसमें “महालनोबिस दूरी सूत्र” और देश की दूसरी पंचवर्षीय योजना में “महालनोबिस मॉडल” उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
Essay on World Statistics Day in 100 Words (विश्व सांख्यिकी दिवस पर 100 शब्दों में निबंध)
हर पांच साल में एक बार विश्व सांख्यिकी दिवस 20 अक्टूबर को वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है। यह हमारी दुनिया और जीवन को आकर देने में आधिकारिक सांख्यिकी के महत्व को दर्शाता है। वर्ष 2010 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित कर पहला विश्व सांख्यिकी दिवस 20 अक्टूबर 2010 को मनाने की घोषणा की। इसको मनाने का निर्णय संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग के मार्गदर्शन में लिया गया था। विश्व सांख्यिकी दिवस मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय विकास के लिए ऑफिशियली आंकड़ों को वैश्विक स्तर पर स्वीकारने और उसका जश्न मानने का दिन है। यह दिवस दुनिया भर में डेटा उत्पादकों और सांख्यिकीविदों के योगदान को मान्यता देता है।
Essay on World Statistics Day in 500 Words (विश्व सांख्यिकी दिवस पर 500 शब्दों में निबंध)
संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग के मार्गदर्शन में मनाया जाने वाला यह अवसर प्रत्येक पांच वर्ष में 20 अक्टूबर को मनाया जाता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं –
प्रस्तावना
हर पांच साल में एक बार मनाया जाने वाला यह दिवस 20 अक्टूबर को विश्व भर में मनाया जाता है। 20 अक्टूबर 2025 को यह चौथी बार मनाया गया है। विश्वशनीय सांख्यिकी राष्ट्र की प्रगति, पारदर्शिता और लोकतंत्र की नींव मानी जाती है। जिससे अर्थव्यवस्था और पर्यावरण की सटीक जानकारी प्राप्त होती है। इस वर्ष यानि 2025 की थीम “सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण आंकड़े और डेटा” रखी गई है, जो प्रत्येक नागरिक तक विश्वशनीय डेटा को पहुंचाने का अधिकार बताती है।
विश्व सांख्यिकी दिवस का महत्व और भूमिका
सांख्यिकी न केवल जटिल संख्याएं है बल्कि किसी भी देश के विकास को निर्धारित करने वाले प्रमाण होते हैं। यह गरीबी, बेरोजगारी और स्वास्थ्य इत्यादि से संबंधित आंकड़ों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं।
- सूचित नीति निर्माण: सांख्यिकी के माध्यम से सरकारों को बेरोजगारी, गरीबी, शिक्षा का स्तर और स्वास्थ्य संबंधित जरूरतों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सटीक जानकारी मिलती है। यह प्रभावी नीतियां और मजबूत डेटा बनाने में मदद करता है, जिससे संसाधनों के कुशल आवंटन को सुनिश्चित किया का सके।
- सतत विकास लक्ष्यों पर निगरानी: संयुक्त राष्ट्र की 2030 नीति के तहत सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) के विकास को ट्रैक करने के लिए सांख्यिकी बेहद आवश्यक है। सांख्यिकी से प्राप्त डेटा के आधार पर ही यह अनुमान लगाया जाता है कि कौन से क्षेत्र में लक्ष्यों की पूर्ति हो रही है और कौन से क्षेत्रों में तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
- जवाबदेही और पारदर्शिता: सांख्यिकी के माध्यम से शासन में पारदर्शिता आती है। सांख्यिकी देश की जनता तक विश्वशनीय डेटा पहुंचती है, जिससे वे अपने देश की सरकारों से उनके कार्यों के लिए जवाब मांग सकते हैं, इससे लोकतंत्र में मजबूती आती है।
- सांख्यिकी में डेटा क्रांति का योगदान: आज के तकनीकी युग में सांख्यिकी विज्ञान बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकियों के साथ कार्य कर रहा है। सांख्यिकी दिवस आधुनिक बनने और नवविचारों को अपनाने के लिए भी सांख्यिकी प्रणाली को प्रोत्साहित करता है।
भारत में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस
भारत में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस हर साल 29 जून को मनाया जाता है। इस दिन को हर साल भारतीय सांख्यिकीविद और अनुप्रयुक्त वैज्ञानिक प्रोफेसर प्रशांता चंद्र महालनोबिस की जयंती के रूप में मनाया जाता है। सांख्यिकी हमारे जीवन के विभिन्न हिस्सों में जैसे- स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, अर्थव्यवस्था और जनसंख्या के आंकड़ों को विश्लेषित और एकट्ठा करने में मदद करता है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का इतिहास
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस की शुरुआत 29 जून 2007 को की गई थी, क्योंकि इस दिन देश के प्रसिद्ध सांख्यिकीविद प्रो. प्रशांत चंद्र महालनोबिस का जन्म दिवस होता है। क्योंकि वह भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute- ISI) के प्रथम प्रमुख सचिव और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के अध्यक्ष भी थे। भारतीय राष्ट्रीय सांख्यिकी के छेत्र में उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण माना जाना है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का उद्देश्य
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस भारत के महत्वपूर्ण दिवसों में से एक है, क्योंकि इससे सरकारी विभागों और आम लोगों में सांख्यिकी की समझ को बढ़ावा दिया जाता है और साथ ही इसे सही और विश्वसनीय डेटा को राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक के सामने सटीक रूप में प्रस्तुत करता है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस को मनाने का उद्देश्य युवाओं में सांख्यिकी के प्रति जागरूकता पैदा करना हैं, जिससे वे सांख्यिकी के छेत्र में अध्ययन और अनुसंधान के लिए प्रेरित हो सकें।
निष्कर्ष
विश्व सांख्यिकी दिवस विश्वसनीय डेटा को समय पर और उच्च गुणवत्ता वाले आंकड़ों के महत्व को दुनिया भर के सामने लाता है, जो किसी भी राष्ट्र के सतत विकास और सार्वजनिक भलाई के लिए बेहद जरूरी है। यह विश्व भर में सांख्यिकी के महत्व को उजागर करता है, इसके साथ ही आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देता है।
FAQs
उत्तर: विश्व सांख्यिकी के जनक रोनाल्ड फिशर और गॉटफ्रायड एकेनवाल थे।
उत्तर: विश्व सांख्यिकी वैश्विक स्तर पर डेटा के संग्रह और विश्लेषण से है, जो कुल योग, तिथियां, समय और उपयोग सांख्यिकी जैसे विभिन्न आंकड़ों की रिपोर्टिंग की अनुमति देता है।
उत्तर: विश्व सांख्यिकी दिवस 2025 का विषय “सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी और डेटा” है।
उत्तर: भारत में सांख्यिकी के जनक प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस हैं।
उत्तर: राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन का मुख्यालय नई दिल्ली में है।
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