18 February History in Hindi

18 February History: जब भारत के आसमान में उड़ी पहली ‘चिट्ठी’ और सौरमंडल को मिला नया ग्रह

18 February History in Hindi: 18 फरवरी का दिन इतिहास की डायरी में ज़मीन से लेकर आसमान और अंतरिक्ष तक की कामयाबियों के लिए जाना जाता है। आज का इतिहास (Aaj Ka Itihas) हमें बताता है कि इंसानी सोच और विज्ञान की सीमाएं अनंत हैं।

आज ही के दिन 1911 में भारत के इलाहाबाद में दुनिया ने पहली बार किसी ‘चिट्ठी’ को आसमान में उड़ते देखा था। वहीं अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में, आज ही के दिन 1930 में इंसानों ने सौरमंडल के आखिरी छोर पर बैठे ‘प्लूटो’ (Pluto) को पहली बार खोजा था।

चलिए, 18 फरवरी के इन रोमांचक ऐतिहासिक पन्नों को पलटते हैं और जानते हैं कि आज के दिन दुनिया में क्या-क्या बदला था।


1911: दुनिया की पहली आधिकारिक ‘हवाई डाक’ (First Airmail in India)

अगर आप किसी भी प्रतियोगी परीक्षा (UPSC/SSC) की तैयारी कर रहे हैं, तो 18 फरवरी 1911 की यह घटना आपके लिए एक बहुत बड़ा ‘सामान्य ज्ञान’ (GK) फैक्ट है।

18 फरवरी 1911 को भारत के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) से नैनी के बीच दुनिया की पहली आधिकारिक ‘हवाई डाक’ (Airmail) सेवा शुरू हुई थी। एक फ्रांसीसी पायलट हेनरी पेक्वेट (Henri Pequet) ने एक छोटे से विमान (Humber biplane) में करीब 6500 चिट्ठियां लेकर यह ऐतिहासिक उड़ान भरी थी।

उड़ान के रोचक तथ्य:

  • दूरी और समय: इस विमान ने इलाहाबाद (कुंभ मेला मैदान) से नैनी रेलवे स्टेशन तक का सफर तय किया था। यह दूरी लगभग 10 किलोमीटर थी, जिसे तय करने में विमान को मात्र 13 मिनट का समय लगा था।
  • चिट्ठियों का वजन: विमान में रखे डाक के थैले का वजन लगभग 15 किलोग्राम था।
  • ग्लोबल इम्पैक्ट: यह न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के इतिहास की पहली आधिकारिक और कमर्शियल एयरमेल उड़ान थी। इसने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया कि हवाई जहाज का इस्तेमाल सिर्फ युद्ध या मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि संचार (Communication) के लिए भी किया जा सकता है।

1930: जब दुनिया के सामने आया ‘प्लूटो’ (Discovery of Pluto)

ज़मीन से निकलकर अब बात करते हैं ब्रह्मांड की, जहां 18 फरवरी 1930 को एक बहुत बड़ी खगोलीय खोज हुई थी।

18 फरवरी 1930 को अमेरिका के एक 24 वर्षीय युवा खगोलविद (Astronomer) क्लाइड टॉमबॉघ (Clyde Tombaugh) ने ‘प्लूटो’ (Pluto) ग्रह की खोज की थी। उन्होंने एरिज़ोना की लोवेल वेधशाला (Lowell Observatory) में तारों की तस्वीरें देखकर इस नए खगोलीय पिंड का पता लगाया था।

ग्रह से ‘बौना ग्रह’ बनने की कहानी:

प्लूटो की खोज विज्ञान जगत में एक जश्न की तरह थी। इसे तुरंत हमारे सौरमंडल (Solar System) का 9वां ग्रह घोषित कर दिया गया।

  • नामकरण: इस ग्रह का नाम ‘प्लूटो’ एक 11 साल की ब्रिटिश बच्ची ‘वेनेशिया बर्नी’ ने सुझाया था, जो रोमन माइथोलॉजी में पाताल लोक के देवता का नाम था।
  • क्यों छिना ग्रह का दर्जा?: पूरे 76 सालों तक प्लूटो ने एक ‘ग्रह’ का रुतबा एन्जॉय किया। लेकिन 2006 में ‘अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ’ (IAU) ने ग्रहों की एक नई परिभाषा तय की। प्लूटो आकार में बहुत छोटा था और अपनी कक्षा (Orbit) को पूरी तरह साफ नहीं कर पाता था (इसकी कक्षा में अन्य छोटे पिंड भी थे)। इस कारण 2006 में इससे ‘ग्रह’ का दर्जा छीनकर इसे एक ‘बौना ग्रह’ (Dwarf Planet) घोषित कर दिया गया।

1836: महान संत ‘रामकृष्ण परमहंस’ का जन्म (Ramakrishna Paramahamsa)

18 फरवरी का दिन भारत के आध्यात्मिक इतिहास में भी एक सुनहरे अक्षरों में दर्ज दिन है।

18 फरवरी 1836 को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के कामारपुकुर गांव में भारत के महान रहस्यवादी (Mystic) और संत रामकृष्ण परमहंस (Ramakrishna Paramahamsa) का जन्म हुआ था। उनका बचपन का नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था। वे कलकत्ता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर के मुख्य पुजारी बने।

विवेकानंद के गुरु:

रामकृष्ण परमहंस केवल एक संत नहीं थे, बल्कि वे उस महान वृक्ष की जड़ थे जिसने पूरी दुनिया को ‘स्वामी विवेकानंद’ जैसा फल दिया।

  • सर्वधर्म समभाव: उनका सबसे बड़ा संदेश यह था कि “सभी धर्म एक ही ईश्वर तक पहुँचने के अलग-अलग रास्ते हैं।” (जतो मोत ततो पोथ – As many faiths, so many paths)।
  • आधुनिक प्रभाव: 1886 में उनके निधन के बाद, उनके परम शिष्य स्वामी विवेकानंद ने उनके विचारों को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए 1897 में ‘रामकृष्ण मिशन’ (Ramakrishna Mission) की स्थापना की, जो आज भी शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में दुनिया भर में काम कर रहा है।

18 February History in Hindi: प्रमुख व्यक्तियों का जन्म (Famous Birthdays)

इतिहास के पन्नों में आज कुछ और भी महान चेहरों ने जन्म लिया था, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में दुनिया को बदला:

वर्षनामपहचान और महत्व
1486चैतन्य महाप्रभु (Chaitanya Mahaprabhu)भारत के महान वैष्णव संत और समाज सुधारक। उन्होंने बंगाल और ओडिशा में ‘भक्ति आंदोलन’ (Bhakti Movement) को चरम पर पहुँचाया और ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र का प्रचार किया।
1836रामकृष्ण परमहंसमहान भारतीय संत (जिनका जीवन हमने ऊपर विस्तार से जाना)।
1927अब्दुल हलीम जाफर खानभारत के मशहूर सितार वादक। वे ‘जाफरखानी बाज’ शैली के जनक थे। कला के क्षेत्र में उन्हें भारत सरकार द्वारा ‘पद्म भूषण’ और ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया था।

18 February History in Hindi: प्रमुख व्यक्तियों का निधन (Famous Deaths)

आज के दिन दुनिया ने कुछ ऐसे दिमाग खोए, जिन्होंने इतिहास की धारा ही मोड़ दी थी:

  • 1967 – जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर (J. Robert Oppenheimer): अमेरिकी सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी, जिन्हें पूरी दुनिया ‘परमाणु बम का जनक’ (Father of the Atomic Bomb) कहती है। उन्होंने ‘मैनहट्टन प्रोजेक्ट’ (Manhattan Project) का नेतृत्व किया था, जिसके तहत दुनिया के पहले परमाणु हथियार बनाए गए। (हाल ही में हॉलीवुड डायरेक्टर क्रिस्टोफर नोलन की ऑस्कर-विजेता फिल्म ‘Oppenheimer’ इन्हीं के जीवन पर आधारित थी)।
  • 1546 – मार्टिन लूथर (Martin Luther): जर्मनी के महान धार्मिक सुधारक। उन्होंने कैथोलिक चर्च की कुरीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाई थी, जिसके कारण ईसाई धर्म में ‘प्रोटेस्टेंट’ (Protestant) सुधार आंदोलन की शुरुआत हुई थी।

Exam Corner: ज्ञान की बात (GK Questions)

प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, State PCS) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए आज के इतिहास से जुड़े कुछ सीधे और महत्वपूर्ण प्रश्न:

Q: भारत (और दुनिया) में पहली आधिकारिक हवाई डाक (Airmail) सेवा कब और कहाँ शुरू हुई थी?

Ans: 18 फरवरी 1911 को, इलाहाबाद से नैनी के बीच (दूरी: 10 किमी)।

Q: सौरमंडल के ‘प्लूटो’ (Pluto) ग्रह की खोज किसने और कब की थी?

Ans: अमेरिकी खगोलशास्त्री क्लाइड टॉमबॉघ (Clyde Tombaugh) ने 1930 में।

Q: प्लूटो को ‘ग्रह’ की श्रेणी से हटाकर ‘बौना ग्रह’ (Dwarf Planet) कब घोषित किया गया?

Ans: साल 2006 में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) द्वारा।

Q: स्वामी विवेकानंद के आध्यात्मिक गुरु कौन थे?

Ans: संत रामकृष्ण परमहंस।

Q: ‘परमाणु बम का जनक’ किसे कहा जाता है, जिनका आज ही के दिन (1967) निधन हुआ था?

Ans: जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर (J. Robert Oppenheimer)।


ज्ञान का असीम विस्तार

18 February History का यह सफर हमें सिखाता है कि इंसान की खोज कभी खत्म नहीं होती।

चाहे वह हेनरी पेक्वेट का आसमान की ऊंचाइयों को छूकर पहली बार ‘हवाई डाक’ पहुंचाना हो, क्लाइड टॉमबॉघ का ब्रह्मांड के अंधेरे में झांककर एक नए ग्रह (प्लूटो) को खोजना हो, या फिर संत रामकृष्ण परमहंस का अपने भीतर झांककर खुद को जानना हो—18 फरवरी का इतिहास यह साबित करता है कि जब इंसान ज़मीन, आसमान और अपने मन की सीमाओं को पार करने की ठान लेता है, तो वह इतिहास रच देता है।

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