16 February History in Hindi

16 February History: जब सिनेमा ने अपना ‘पिता’ खोया और दुनिया ने ‘पर्यावरण’ को चुना

16 February History in Hindi: 16 फरवरी का दिन इतिहास की किताब में दो बिल्कुल अलग और बेहद महत्वपूर्ण पन्नों को जोड़ता है। एक तरफ 1944 में आज ही के दिन भारतीय सिनेमा की नींव रखने वाले ‘दादा साहब फाल्के’ ने दुनिया को अलविदा कहा था। उनके बिना आज के इस चमकते हुए बॉलीवुड की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

वहीं दूसरी तरफ, 2005 में आज ही के दिन दुनिया ने पहली बार अपनी धरती को बचाने के लिए एक कड़ा कानून—’क्योटो प्रोटोकॉल’ (Kyoto Protocol)—लागू किया था। इसके अलावा राजनीति के पन्नों में आज का दिन क्यूबा में फिदेल कास्त्रो के उदय का गवाह है।

आज का दिन कला, प्रकृति और क्रांति तीनों को समर्पित है। चलिए, इतिहास की इन गहरी और रोचक परतों को खोलते हैं।


1944: भारतीय सिनेमा के ‘जनक’ की विदाई (Dadasaheb Phalke)

आज हम जो 3D और VFX वाली भव्य फिल्में देखते हैं, उसकी पहली ईंट एक ऐसे इंसान ने रखी थी जिसने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था।

16 फरवरी 1944 को धुंडीराज गोविंद फाल्के (जिन्हें दुनिया दादा साहब फाल्के के नाम से जानती है) का नासिक में 73 वर्ष की आयु में निधन हुआ था। उन्हें ‘भारतीय सिनेमा का पितामह’ (Father of Indian Cinema) कहा जाता है। उन्होंने 1913 में ‘राजा हरिश्चंद्र’ (Raja Harishchandra) बनाई थी, जो भारत की पहली फुल-लेंथ फीचर फिल्म थी। यह एक मूक (Silent) फिल्म थी जिसने भारत में मनोरंजन के एक नए युग की शुरुआत की।

एक फिल्म बनाने का ऐतिहासिक संघर्ष:

दादा साहब फाल्के की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। जब उन्होंने भारत में फिल्म बनाने का सपना देखा, तो उनके पास पैसे नहीं थे।

  • पत्नी का बलिदान: अपनी पहली फिल्म बनाने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी सरस्वतीबाई के गहने तक बेच दिए थे। उनकी पत्नी ने न केवल गहने दिए, बल्कि फिल्म के क्रू (Crew) के लिए खाना बनाया और शूटिंग के दौरान रिफ्लेक्टर के रूप में सफेद चादरें भी पकड़कर खड़ी रहीं।
  • पुरुषों ने पहनी साड़ियां: उस दौर में फिल्मों या नाटकों में महिलाओं का काम करना बहुत बुरा माना जाता था। फाल्के ने रेड-लाइट एरिया तक में जाकर महिलाओं से फिल्म में काम करने की गुजारिश की, लेकिन किसी ने हां नहीं की। मजबूरन, ‘राजा हरिश्चंद्र’ में रानी तारामती का किरदार एक पुरुष रसोइए (Cook) अन्ना सालुंके ने साड़ी पहनकर निभाया था।

आज भारतीय सिनेमा जगत का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित सम्मान उन्हीं के नाम पर दिया जाता है। हर साल देश भर के सिनेप्रेमी और कलाकार ‘Dadasaheb Phalke Award 2026 winners list’ का बेसब्री से इंतजार करते हैं, जो इस महान आत्मा को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।


2005: जब ग्लोबल वार्मिंग से डरी दुनिया (Kyoto Protocol)

सिनेमा के पर्दे से निकलकर अब बात करते हैं हमारी असल दुनिया की, जो लगातार गर्म हो रही है।

16 फरवरी 2005 को ‘क्योटो प्रोटोकॉल’ (Kyoto Protocol) आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू हुआ था। यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधि थी जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रीनहाउस गैसों (Greenhouse Gases) के उत्सर्जन को कम करना था ताकि बढ़ते जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और ग्लोबल वार्मिंग को रोका जा सके।

क्योटो प्रोटोकॉल क्यों जरूरी था?

  • सच्चाई की स्वीकारोक्ति: यह इतिहास में पहली बार था जब दुनिया के बड़े देशों ने कानूनी तौर पर यह माना कि “ग्लोबल वार्मिंग असली है, यह इंसानों की वजह से हो रही है, और इसे रोकना हमारी जिम्मेदारी है।”
  • लागू होने में देरी: हालांकि इस समझौते पर 1997 में ही जापान के क्योटो शहर में हस्ताक्षर हो गए थे, लेकिन इसे लागू करने के लिए दुनिया के कम से कम 55 देशों (जो 55% कार्बन उत्सर्जन करते हों) की सहमति जरूरी थी। 2004 में रूस के हस्ताक्षर करने के बाद, अंततः 16 फरवरी 2005 को यह दुनिया भर में लागू (Enforce) हो सका।

अगर आप यूपीएससी या राज्य लोक सेवा आयोग की तैयारी कर रहे हैं, तो पर्यावरण और पारिस्थितिकी (Environment and Ecology) खंड में ‘Kyoto Protocol UPSC notes in Hindi’ पढ़ना अनिवार्य है। ‘कार्बन क्रेडिट’ (Carbon Credit) और ‘उत्सर्जन व्यापार’ (Emissions Trading) जैसे आधुनिक कॉन्सेप्ट इसी प्रोटोकॉल की देन हैं।


1959: अमेरिका की नाक के नीचे क्रांति (Fidel Castro Cuba History)

विश्व राजनीति (Geopolitics) के इतिहास में 16 फरवरी 1959 एक ऐसा दिन था जिसने अमेरिका की नींद उड़ा दी थी।

  • क्रांति की जीत: क्यूबा के तानाशाह फुलगेंसियो बतिस्ता (Fulgencio Batista) को उखाड़ फेंकने के बाद, 32 वर्षीय युवा विद्रोही नेता फिदेल कास्त्रो (Fidel Castro) 16 फरवरी 1959 को आधिकारिक तौर पर क्यूबा के प्रधानमंत्री बने।
  • अमेरिका से दुश्मनी: क्यूबा, जो कि अमेरिका के फ्लोरिडा तट से मात्र 90 मील की दूरी पर स्थित है, वहां एक कम्युनिस्ट (साम्यवादी) सरकार का स्थापित होना अमेरिका के लिए एक सीधा खतरा था।
  • इतिहास का प्रभाव: Fidel Castro Cuba history सिर्फ एक नेता की कहानी नहीं है, बल्कि यह सोवियत संघ और अमेरिका के बीच चले शीत युद्ध (Cold War) का सबसे ‘गर्म’ बिंदु था। इसी के बाद ‘क्यूबन मिसाइल क्राइसिस’ (1962) हुआ था, जिसने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया था।

16 February: प्रमुख व्यक्तियों का जन्म (Famous Birthdays)

इतिहास केवल घटनाओं का नहीं, उन इंसानों का भी है जिन्होंने दुनिया को अपने नजरिए से ढाला। आज के दिन जन्मे कुछ प्रमुख चेहरे:

वर्षनामपहचान और महत्व
1941किम जोंग इल (Kim Jong Il)उत्तर कोरिया के पूर्व क्रूर तानाशाह। वे वर्तमान तानाशाह किम जोंग उन के पिता थे। उनके शासनकाल में उत्तर कोरिया पूरी दुनिया से कट गया था।
1978वसीम जाफ़र (Wasim Jaffer)भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनिंग बल्लेबाज। उन्हें घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) का ‘सचिन तेंदुलकर’ कहा जाता है क्योंकि रणजी में उनके नाम सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड दर्ज है।

16 February: प्रमुख व्यक्तियों का निधन (Famous Deaths)

आज ही के दिन हमने कुछ ऐसे महान चेहरों को खोया, जिनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती:

  • 1944 – दादा साहब फाल्के (Dadasaheb Phalke): भारतीय सिनेमा के पितामह, जिनका संघर्ष हमने ऊपर विस्तार से जाना।
  • 1956 – मेघनाद साहा (Meghnad Saha): भारत के महान खगोल वैज्ञानिक (Astrophysicist)। अंतरिक्ष विज्ञान में उनके द्वारा दिया गया ‘साहा आयनीकरण समीकरण’ (Saha Ionization Equation) पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस समीकरण की मदद से वैज्ञानिक तारों (Stars) के तापमान और उनके रासायनिक तत्वों का पता लगाते हैं। 16 फरवरी को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ था।
  • 2016 – बुतरस बुतरस-घाली (Boutros Boutros-Ghali): संयुक्त राष्ट्र (UN) के छठे महासचिव और मिस्र के दिग्गज राजनेता। उन्होंने शीत युद्ध के ठीक बाद की जटिल विश्व राजनीति में UN का नेतृत्व किया था।

Exam Corner: ज्ञान की बात (GK Questions)

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए 16 February historical events India और विश्व से जुड़े कुछ सीधे और महत्वपूर्ण प्रश्न:

Q: भारत की पहली फुल-लेंथ फीचर फिल्म कौन सी थी और यह कब रिलीज़ हुई?

Ans: ‘राजा हरिश्चंद्र’ (1913), जिसका निर्माण दादा साहब फाल्के ने किया था।

Q: ग्रीनहाउस गैसों को कम करने के लिए ‘क्योटो प्रोटोकॉल’ किस वर्ष लागू (Enforce) हुआ था?

Ans: 16 फरवरी 2005 को।

Q: दादा साहब फाल्के का असली नाम क्या था?

Ans: धुंडीराज गोविंद फाल्के।

Q: 1959 में किस क्रांतिकारी नेता ने क्यूबा के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी?

Ans: फिदेल कास्त्रो (Fidel Castro)।

Q: तारों के तापमान को मापने वाले ‘आयनीकरण समीकरण’ (Ionization Equation) किस भारतीय वैज्ञानिक ने दिए थे?

Ans: डॉ. मेघनाद साहा।


संघर्ष और बदलाव की दास्तान

16 February History का यह सफर हमें सिखाता है कि किसी भी बड़े बदलाव के लिए मजबूत इरादों और बेइंतहा संघर्ष की जरूरत होती है।

चाहे वह दादा साहब फाल्के का समाज के तानों को सहकर भारत में पहली फिल्म बनाने का संघर्ष हो, फिदेल कास्त्रो की दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश (अमेरिका) को चुनौती देने की हिम्मत हो, या फिर धरती के पर्यावरण को बचाने के लिए दुनिया के देशों का ‘क्योटो प्रोटोकॉल’ पर एक साथ आना हो—16 फरवरी का इतिहास यह साबित करता है कि जब इंसान ठान लेता है, तो वह परंपराओं, सत्ताओं और यहां तक कि विनाशकारी भविष्य को भी बदल सकता है।

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