15 February History

15 February History: भारत की ‘अंतरिक्ष’ में सबसे बड़ी छलांग और ‘शायरी के खुदा’ की विदाई

15 February History in Hindi: इतिहास के पन्नों में 15 फरवरी का दिन बहुत खास मुकाम रखता है। यह दिन विज्ञान की निर्भीकता और साहित्य की संवेदनशीलता के एक अनूठे संगम जैसा है।

एक तरफ यह तारीख हमें उस आधुनिक वैज्ञानिक गैलीलियो गैलिली की याद दिलाती है जिसने समाज के डर की परवाह किए बिना ब्रह्मांड का सच बोला, तो दूसरी तरफ यह दिन मिर्ज़ा ग़ालिब की उस रुहानी शायरी की गूँज है जो आज भी इंसानी जज़्बात को अल्फाज़ देती है। साथ ही, 15 फरवरी का दिन हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि इसी दिन ISRO ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में वो मुकाम हासिल किया था जिसे देख पूरी दुनिया दंग रह गई थी।

आइए, विस्तार से जानते हैं कि 15 फरवरी का दिन दुनिया की दिशा और दशा बदलने में क्यों महत्वपूर्ण रहा है।


2017: जब ISRO ने दुनिया को चौंका दिया (The 104 Satellites Record)

15 फरवरी 2017 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने भरोसेमंद रॉकेट PSLV-C37 के जरिए एक साथ 104 उपग्रहों (Satellites) को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। भारत एक ही मिशन में सौ से अधिक सैटेलाइट लॉन्च करने वाला दुनिया का पहला देश बना, जिसने रूस के 37 सैटेलाइट वाले पिछले रिकॉर्ड को भारी अंतर से पीछे छोड़ दिया।

PSLV-C37 मिशन की बारीकियां:

यह केवल एक लॉन्च नहीं था, बल्कि भारत की ‘कम लागत और उच्च सटीकता’ (Cost-effective and High Precision) वाली तकनीक का लोहा मनवाने वाला दिन था।

  • अंतर्राष्ट्रीय विश्वास: इन 104 सैटेलाइट्स में से केवल 3 भारत के थे, जबकि बाकी 101 उपग्रह दूसरे देशों के थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इनमें 96 सैटेलाइट्स अकेले अमेरिका के थे। यह दिखाता है कि नासा जैसे बड़े संगठनों वाले देश भी भारत की लॉन्चिंग तकनीक पर कितना भरोसा करते हैं।
  • रिकॉर्ड का महत्व: इससे पहले जून 2014 में रूस ने 37 सैटेलाइट एक साथ लॉन्च किए थे। इसरो ने न केवल उस रिकॉर्ड को तोड़ा, बल्कि उसे लगभग तीन गुना बढ़ा दिया। हालांकि बाद में स्पेस-एक्स (SpaceX) ने इस संख्या को पार किया, लेकिन 2017 में इसरो की इस कामयाबी ने भारत को ‘स्पेस सुपरपावर’ की कतार में सबसे आगे खड़ा कर दिया था।

1869: ‘ग़ालिब’ का शहर छोड़ जाना (Mirza Ghalib Death Anniversary)

आज के दिन उर्दू साहित्य की एक ऐसी आवाज़ खामोश हुई थी, जिसकी प्रतिध्वनि आज डेढ़ सौ साल बाद भी उतनी ही ताज़ा महसूस होती है।

“हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे,

कहते हैं कि ग़ालिब का है अंदाज़-ए-बयां और।”

उर्दू और फारसी के सबसे महान और लोकप्रिय शायर मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग खां, जिन्हें दुनिया मिर्ज़ा ग़ालिब (Mirza Ghalib) के नाम से जानती है, उनका निधन 15 फरवरी 1869 को पुरानी दिल्ली के बल्लीमारान स्थित उनके निवास पर हुआ था। ग़ालिब ने मुगल साम्राज्य के पतन और 1857 की क्रांति के दौर को अपनी आँखों से देखा और उसे अपनी बेबाक शायरी और खतों (Letters) में पिरोया।

ग़ालिब की विरासत:

ग़ालिब ने रवायती शायरी से हटकर दर्शन, जीवन के संघर्ष और इश्क की पेचीदगियों पर लिखा। उन्होंने उस दौर में उर्दू को वो ऊँचाई दी जहाँ वह महलों से निकलकर आम आदमी के दिल तक पहुँच गई।

  • अमर शेर: “इश्क ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया, वरना हम भी आदमी थे काम के”—ये पंक्तियाँ आज भी हर उस शख्स की ज़ुबान पर होती हैं जो मोहब्बत की गहराई को समझता है।
  • पुण्यतिथि का महत्व: आज उनकी मज़ार (निज़ामुद्दीन, दिल्ली) पर दुनिया भर से चाहने वाले जुटते हैं। ग़ालिब ने अपनी गरीबी और तंगहाली को भी जिस अंदाज़ में जिया और लिखा, वो उन्हें दुनिया का सबसे मानवीय शायर बनाता है।

1564: जिसने सच के लिए सजा काटी (Galileo Galilei Birthday)

विज्ञान के इतिहास में 15 फरवरी को ‘आधुनिक खगोल विज्ञान का उदय’ माना जा सकता है।

15 फरवरी 1564 को इटली के पीसा शहर में महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री गैलीलियो गैलिली (Galileo Galilei) का जन्म हुआ था। उन्हें ‘आधुनिक विज्ञान का पिता’ कहा जाता है। उन्होंने ही पहली बार दूरबीन (Telescope) का परिष्कृत रूप बनाया और दुनिया को बताया कि ब्रह्मांड का केंद्र पृथ्वी नहीं, बल्कि सूर्य है।

गैलीलियो का संघर्ष और आविष्कार:

  • चर्च से मुकाबला: उस समय कैथोलिक चर्च की मान्यता थी कि पृथ्वी स्थिर है और सूर्य उसके चक्कर लगाता है। जब गैलीलियो ने वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ इस बात का खंडन किया, तो उन्हें ‘पाखंडी’ करार दिया गया।
  • सज़ा और मौत: सच बोलने की कीमत गैलीलियो को अपनी आज़ादी देकर चुकानी पड़ी। उन्हें उम्र भर ‘हाउस अरेस्ट’ (नजरबंदी) में रहना पड़ा। उनके ऊपर धार्मिक किताबों के खिलाफ जाने का आरोप था। लेकिन उन्होंने झुकने से मना कर दिया।
  • प्रमुख आविष्कार: गैलीलियो ने न केवल ग्रहों की गति को समझा, बल्कि उन्होंने पेंडुलम के सिद्धांत, थर्मामीटर का शुरुआती स्वरूप और जुपिटर के चंद्रमाओं की खोज की। आज नासा के कई मिशनों का नाम उनके सम्मान में ‘गैलीलियो’ रखा जाता है।

1989: सोवियत संघ की अफगानिस्तान से वापसी (Geopolitical Turning Point)

विश्व राजनीति के इतिहास में 15 फरवरी 1989 एक बहुत बड़े ‘अंत’ का गवाह है।

  • घटना: लगभग 10 साल तक चले खूनी संघर्ष और गुरिल्ला युद्ध के बाद, इसी दिन सोवियत संघ की सेना की आखिरी टुकड़ी ने आधिकारिक तौर पर अफगानिस्तान की सीमा पार की और वापसी की।
  • परिणाम: इस युद्ध को अक्सर “सोवियत संघ का वियतनाम” कहा जाता है। इस सैन्य विफलता ने न केवल सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था को तोड़ा, बल्कि इसके कुछ ही समय बाद सोवियत संघ का विघटन (Dissolution) भी शुरू हो गया। 15 फरवरी शीत युद्ध (Cold War) के समापन की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ।

15 February: प्रमुख व्यक्तियों का जन्म (Famous Birthdays)

इतिहास केवल घटनाओं से नहीं, उन इंसानों से भी बनता है जिन्होंने समाज को नई दिशा दी। आज की अन्य प्रमुख जयंतियां इस प्रकार हैं:

वर्षनाममहत्व
1564गैलीलियो गैलिलीआधुनिक भौतिकी और खगोल विज्ञान के जनक।
1820सुसान बी. एंथनीअमेरिकी महिला अधिकार कार्यकर्ता, जिन्होंने महिलाओं के मताधिकार (Voting Rights) के लिए जीवन भर संघर्ष किया।
1924के.जी. सुब्रमण्यनभारत के मशहूर चित्रकार और मूर्तिकार, जिन्हें कला के क्षेत्र में ‘पद्म विभूषण’ मिला।
1947रणधीर कपूरबॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता, निर्देशक और कपूर खानदान की दूसरी पीढ़ी के सदस्य।
1949नामदेव ढसालप्रसिद्ध मराठी कवि और दलित पैंथर्स के संस्थापक, जिन्होंने अपनी कविताओं से समाज को झकझोरा।

Exam Corner: ज्ञान की बात (GK Questions for Students)

प्रतियोगी परीक्षाओं (SSC, UPSC, Railways) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए 15 फरवरी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर:

  • प्रश्न: इसरो ने एक साथ 104 सैटेलाइट्स किस रॉकेट की मदद से लॉन्च किए थे?
    • उत्तर: PSLV-C37 (लॉन्च तिथि: 15 फरवरी 2017)।
  • प्रश्न: मिर्ज़ा ग़ालिब का वास्तविक नाम क्या था और उनकी मृत्यु कहाँ हुई?
    • उत्तर: वास्तविक नाम मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग खां था और उनका निधन दिल्ली में 15 फरवरी 1869 को हुआ।
  • प्रश्न: गैलीलियो गैलिली ने किस ग्रह के चंद्रमाओं की खोज की थी?
    • उत्तर: बृहस्पति (Jupiter) के चार सबसे बड़े चंद्रमाओं की।
  • प्रश्न: सोवियत संघ ने किस वर्ष अफगानिस्तान से अपनी सेना पूरी तरह हटा ली थी?
    • उत्तर: 15 फरवरी 1989 को।
  • प्रश्न: ‘National Women’s Suffrage Association’ की स्थापना किसने की थी?
    • उत्तर: सुसान बी. एंथनी (जन्म: 15 फरवरी 1820)।

ज्ञान और जज़्बात का संगम

15 February History का यह सफर हमें सिखाता है कि दुनिया केवल सत्ता के संघर्ष से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक खोजों और साहित्यिक संवेदनाओं से चलती है।

गैलीलियो की कहानी हमें सिखाती है कि चाहे पूरा संसार आपके खिलाफ हो, यदि आपके पास सत्य और प्रमाण हैं, तो एक न एक दिन दुनिया को आपकी बात माननी ही होगी। इसरो की कामयाबी बताती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि जज़्बा बड़ा हो, तो हम आसमान में रिकॉर्ड लिख सकते हैं। और मिर्ज़ा ग़ालिब की याद हमें यह एहसास दिलाती है कि विज्ञान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले, इंसानी दिल के खालीपन को भरने के लिए ‘शायरी’ और ‘साहित्य’ हमेशा अनिवार्य रहेंगे।

आज का दिन अपने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मज़बूत करने और साहित्य के प्रति अपनी संवेदना जगाने का दिन है।


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